क्या भ्रष्टाचार के मामले में पुलिस वालों को पीछे छोड़ देंगे बैंककर्मी

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क्या भ्रष्टाचार के मामले में पुलिस वालों को पीछे छोड़ देंगे बैंककर्मी

लखनऊ। भारत में भ्रष्टाचार का जिक्र आते ही सबसे पहला चेहरा पुलिस वालों का नजर आता है, क्योंकि पुलिस वाले ही घूंसखोरी के लिए बदनाम हैं। लेकिन पिछले एक सप्ताह से बैं​ककर्मियों के ऐसे कारनामे सुर्खियों में हैं जिन्हें देखकर लगता है कि हमारे देश के सबसे बड़े घूंसखोर उन जगहों पर बैठे हैं, जहां हम अपनी खून पसीने की कमाई को सुर​क्षा की दृष्टि से जमा करते हैं। पुलिस जहां हमारी सुरक्षा की गारंटी देती है वहीं बैंक कर्मी हमारी पूंजी की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। अब जो माहौल बना है उसे देखकर लगता है कि 100—200 या 1000—500 रूपए की घूंस लेने वाला घूंसखोर पुलिसकर्मी उन बैंक कर्मियों से बेहतर है जो अपने फायदे के लिए हजारों करोड़ को दांव पर लगाने से नहीं चूकते। वह दिन दूर नहीं जब आम आदमी बैंककर्मियों को संदेह की दृष्टि से देखने लगेंगे।

11,300 करोड़ के पीएनबी महाघोटाले केे सामने आने के बाद बैंकिंग व्यवस्था पर आपका भरोसा कमजोर हुआ होगा। अगर ऐसा हुआ है तो गलत भी नहीं है, क्योंकि ये वही बैंक है जो हमारे आपके जैसे करोड़ों लोगों की गाढ़ी मेहनत की कमाई से जमा होने वाली रकम के दम पर ही अपने पूरे तंत्र को चलाते हैं। लेकिन जब हमारे आपके जैसा कोई आम आदमी इन्हीं बैंकों से छोटा सा कार लोन लेकर किसी कारणवश एक किश्त न चला पाए तो बैंक के कर्मचारी फोन करके ऐसा अपराध बोध करवाते हैं, मानो लोन लेना दुनिया का सबसे बड़ा अपराध हो। इनके एक दो लाख रुपए के कर्ज बसूलने के तरीके किसानों को आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर देते हैं।

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यही बैंक जब हम आम लोगों की जमा करवाई रकम किसी कारोबारी को हजारों करोड़ के लोन के रूप में देते हैं, और कारोबारी उस लोन को वापस नहीं लौटाते तो ये बैंक सालों तक चुप्पी साधे रहते हैं। पुराने लोन को रीस्ट्रक्चर करते हैं। 100 रूपए वापस पाने के लिए 25 रुपए और देते हैं। उसके बाद भी कारोबारी रकम को नहीं लौटाता तो उसे तो बैंक 125 रुपए वापस पाने के लिए 25 रुपए फिर उधार दे देती है। बैंक का ऐसा उदार रवैया कभी किसी किसान के प्रति नजर नहीं आया होगा।

आखिर ऐसा होता क्यों है?

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अगर आप कभी किसी ग्रामीण इलाके की बैंक में गए हों तो आप आसानी से समझ पाएंगे कि आखिर अमीरों को ऐसी सहूलियतें क्यों मिलतीं हैं? इन बैंकों में काम करने वाले अधिकारी बड़े वाले होते हैं, वही बड़े वाले जो आप समझ रहे हैं। अगर किसी किसान को रोजगार के लिए भैंस खरीदने के लिए लोन लेना है तो मानिए लोन का आवेदन करने वाला किसान केवल बकरी ही खरीद पाएगा, क्योंकि बैंक के अधिकारियों को घूंस खिलाने के बाद मिलने वाले लोन से बकरी ही खरीदी जा सकती है।

उत्तर प्रदेश के गांवों में बैंकों के कई ऐसे कर्जदार मिल जाएंगे, जिन्होंने सरकारी योजनाओं के तहत लोन ले रखे हैं। 1 लाख का लोन लेने वाले के हाथ में ले देकर 60 हजार रुपए आते हैं। इन 60 हजार रुपयों से उसे 1 लाख रूपए के ब्याज के साथ बैंक की रकम लौटाने की चुनौती का सामना करना पड़ता है।

किसी बड़े कारोबारी से तो मिला नहीं लेकिन इन मामलों को देखकर लगता है कि बैंक के अधिकारी बड़े कारोबारियों को भी ​कुछ इसी तरह से सहूलियतें देते होंगे। कम से कम नीरव मोदी के मामले में तो ऐसा नजर आता ही है। नहीं तो ऐसी क्या वजह रही होगी कि एक बैंक अधिकारी लेटर आॅफ अंडरस्टैंडिंग जारी करता रहे और वो भी बैंक के उच्च अधिकारियों की जानकारी के बिना।

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बैंक के अधिकारियों को लेकर एक और बड़ा खुलासा हुआ है। एक रिपोर्ट के मुताबिक आरबीआई ने माना है कि पिछले कुछ सालों के आंकड़ों को देखा जाए तो प्रत्येक 4 घंटे में एक बैंक कर्मी धांधली करता है। अब तक अलग अलग बैंकों को 66,000 करोड़ रूपए का चूना बैंक कर्मियों की धांधली के चलते लगा है।

बैंककर्मी जिस अंदाज में बैंकों को चूना लगा रहे हैं, उसे देखकर लगता है कि आने वाले समय में बैंक कर्मी हमारे पुलिस कर्मियों को भ्रष्टाचार के मामले में पीछे छोड़ देंगे। संभव है कि छोड़ चुके हों लेकिन बैंककर्मियों के भ्रष्टाचार के मामले सामने आने अब शुरू हुए हैं, ऐसे में उन्हें नंबर वन कहना जल्दबाजी होगी। बाकी बहुत कुछ उनके कारनामों पर निर्भर है जिनके बल पर वे अपनी नई कहानी लिखकर ही मानेंगे।

हो सकता है कि आपको यहां पर पुलिस और बैंककर्मियों की तुलना करना गलत लगा हो लेकिन इसमें हर्ज ही क्या है। पुलिस कर्मी हमारे चुकाए टैक्स से अपना वेतन पाते हैं और बैंक कर्मी बैंकों में जमा हमारी जमा पूंजी से। जब दोनों ही हम पर निर्भर है, हमें ही लूट रहे हैं तो ऐसे में इनके बीच तुलना करना गलत नहीं लगता।

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लखनऊ। भारत में भ्रष्टाचार का जिक्र आते ही सबसे पहला चेहरा पुलिस वालों का नजर आता है, क्योंकि पुलिस वाले ही घूंसखोरी के लिए बदनाम हैं। लेकिन पिछले एक सप्ताह से बैं​ककर्मियों के ऐसे कारनामे सुर्खियों में हैं जिन्हें देखकर लगता है कि हमारे देश के सबसे बड़े घूंसखोर उन जगहों पर बैठे हैं, जहां हम अपनी खून पसीने की कमाई को सुर​क्षा की दृष्टि से जमा करते हैं। पुलिस जहां हमारी सुरक्षा की गारंटी देती है वहीं बैंक कर्मी…
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