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पुलिस प्रशासन बना हैवान, जनप्रतिनिधि हैं हैरान

Police Administration Has Surprised Public Representative Surprised

By रवि तिवारी 
Updated Date

नीले और हरे झंडे कि प्रशासनिक नीतियों से परेशान जनता ने भगवा को विकल्प चुना और उससे ज्यादा जनता तब प्रशन्न हुई जब गोरखनाथ मंदिर के महंत को सूबे का मुखिया बना दिया गया। पूरी जनता को लगा की सूबे में पूरी तरह से न्याय होगा भ्रष्टाचार खत्म होगा और योगी मोदी की सरकार में पुनः रामराज वापस आएगा।

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लेकिन हुआ उसका उल्टा भ्रष्टाचार खत्म होने की जगह अपनी चर्म सीमा पार कर गया और तहसील तथा थानों पर न्याय का सौदा होने लगा तहसील और थाने अवैध कामो का केंद्र बन गए। सारे सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार की जड़े गहरी हो गई। बॉलीवुड के ड्रामा की तरह सरकारी दफ्तरों की कार्य शैली हो गयी है जनता हैरान व परेशान है। रामराज की कल्पना करने वाले रामण राज को पुनः देख रहे हैं। प्रशासनिक जानकारी के आभाव में पूरी योगी सरकार अधिकारियों पर आश्रित हो गई है।

भाजपा नेताओं और जनप्रतिनिधियों को पूरी तरह शून्य बना दिया गया है। नीले और  हरे झंडे को जमाने के इन बिगड़ैल अधिकारियों को बिना सी बी आइ जांच के बिना सूबे के कमान सौंप दी गई है।ये अधिकारी पूरी तरह से मनमानी पर उतारू है। इसका सीधा उदाहरण बसखारी थाने में मिला सब्र टूट जाने के बाद भाजपा विधायिका को एक थानेदार के खिलाफ अपनी ही सरकार में थाने का घेराव करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

इसके पहले जिले के एक दलित विधायिका द्वारा एक अधिकारी को हटाने के लिए सूबे के मुखिया को चिट्ठी लिखनी पड़ी थी। इससे साफ जाहिर होता है। कि जिले में आम जनता का क्या हाल होगा सूबे के इस जिले अम्बेडकर नगर में सब कुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है।

भाजपा कार्यकर्ता आम जनता जनप्रतिनिधि सब हैरान व परेशान है। और न्याय इसी तरह खरीदा और बेचा गया तो जनप्रतिनिधि से लेकर आम जनता तक बगावत कर देगी और जिले की बात तो छोड़िए ये चिंगारी सूबे तक पहुंच सकती हैं। अम्बेडकर नगर में भाजपा पिछले उपचुनाव में भाजपा का तीसरे स्थान पर रहना यह दर्शाता है कि भाजपा से जनता का धीरे धीरे मोह भंग हो रहा है। अगर हालत इसी तरह ही रहा तो अगले चुनाव में भाजपा कहीं शून्य पर ना सिमट जाए याद रखिए कि जनता के साथ न्याय नहीं हुआ-न्याय खरीदा और बेचा गया तो जनता बगावत कर देगी।

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बगावत का ठीकरा सूबे के मुखिया के सर पर फूटेगा। बिना किसी जांच के इन बिगड़ैल अधिकारियों को सूबे की कमान देना अपने जनप्रतिनिधियों की पावर को शून्य करना कहीं न कही जनता के साथ बेईमानी है।और यही कारण इस सरकार के ताबूत में आखिरी कील ठोकेगा।

रिपोर्ट- अजय तिवारी

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