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पुलिस कमिश्नर प्रणाली: IAS और IPS लॉबी में तंज की जंग शुरू, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

Police Commissioner Tanzs Battle Started In Ias And Ips Lobby Debate Erupted On Social Media

By बलराम सिंह 
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लखनऊ। प्रदेश सरकार ने लखनऊ व नोएडा (गौतमबुद्धनगर) में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू कर दी है। दोनों जनपदों में पुलिस कमिश्नर तैनात भी हो गए हैं। इसके बाद आईएएस और आईपीएस संवर्ग के बीच तनातनी हो गई है। सोशल मीडिया पर दोनों संवर्ग के अधिकारियों के बीच जुबानी जंग भी शुरू हो गई है। आईएएस अधिकारी कह रहे हैं कि कमिश्नर प्रणाली में आईपीएस के पास पीसीएस अधिकारियों से भी कम अधिकार होंगे।

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दरअसल, आईएएस फ्रेटर्निटी नाम के ट्विटर हैंडल पर मंगलवार को ट्वीट किया गया कि तीन महीने इंतजार करें। उसके बाद पुलिस कमिश्नर को छोड़कर कमिश्नरेट के किसी आईपीएस से पूछा जाएगा तो वह पछताएगा। मेरठ, वाराणसी, गाजियाबाद और प्रयागराज के एसएसपी रहे नितिन तिवारी अब डीसीपी हैं। इस पर ट्वीट कर आईपीएस नितिन तिवारी ने खुद को इस बहस से अलग करते हुए लिख दिया कि जनता की सेवा ही उनका प्रथम और एकमात्र मकसद है।

इसके बाद एक ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट किया गया कि लखनऊ के नगर आयुक्त पीसीएस अफसर हैं। उनके अधिकार लखनऊ में तैनात आइजी रैंक के आइपीएस दोनों संयुक्त पुलिस आयुक्त से अधिक होंगे। इसके आगे लिखा कि गाजियाबाद का कोई भी एएसपी नोएडा में तैनात होने वाले एसएसपी रैंक के किसी भी डीसीपी से ज्यादा ताकतवर होगा। हालांकि इस बहस में एक आइपीएस शामिल हुए और लिखा कि नई व्यवस्था जनता की सुरक्षा के लिहाज से बेहतर है। बताया गया है कि इस ट्विटर हैंडल को कई आईएएस अधिकारी फॉलो करते हैं।

इस विवाद की शुरुआत ‘आईएएस फ्रैटर्निटी’ नामक ट्विटर हैंडल से किए गए एक ट्वीट से हुई। इस पर सबसे पहले ट्वीट किया गया कि ‘जिलों के एसएसपी डीसीपी बनने को आतुर। इसमें उन आईपीएस अफसरों को निशाना बनाया गया, जो जिलों में एसएसपी रहने के बाद डीसीपी बना दिए गए हैं। इसके बाद यह ट्वीट किया गया कि गाजियाबाद जिले का कोई भी एएसपी नोएडा के डीसीपी (एसएसपी) से ज्यादा पॉवरफुल है। इतना ही नहीं ‘आईएएस फ्रैटर्निटी’ नामक ट्विटर हैंडल से यह टिप्पणी भी की गई कि लखनऊ में नगर आयुक्त पद पर कार्यरत पीसीएस अफसर लखनऊ में नियुक्त दो संयुक्त पुलिस आयुक्तों (आईजी रैंक) से ज्यादा पॉवरफुल है।

आईपीएस अफसरों को चिढ़ाने वाला यह ट्वीट सामने आने के बाद दूसरे तरफ से भी प्रतिक्रिया होने लगी। एक आईपीएस ने जवाब में ट्वीट किया कि हमें अधिकारों के संघर्ष की भावना से ऊपर उठना चाहिए। एक एडीजी भी इस विवाद में कूदे। उन्होंने डीसीपी को ट्विट करते हुए कहा-‘मैं तुमसे बहुत ज्यादा सहमत नहीं हूं। पहले लोगों को नए सिस्टम के जरिए सुविधा और सुरक्षा का बोध होने दो।

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