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रोहतास बिल्डर पर किसकी कृपा! आंवटियों से करोड़ों हड़पने के बाद भी नहीं हो रही कार्रवाई

By पर्दाफाश समूह 
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Police Is Not Arresting Rohtas Builder

लखनऊ। रोहतास बिल्डर के रसूख के आगे राजधानी पुलिस बौनी साबित हो रही है। भूखंड और फ्लैट दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपयों की धोखाधड़ी के बाद भी वह खुलेआम घूम रहे हैं। लेकिन पुलिस उन पर कार्रवाई करने से कतरा रही है। बीते दो सालो मे आवंटियों ने लखनऊ के अलग-अलग थानों में रोहतास बिल्डर के मालिक परेश रस्तोगी समेत कंपनी के मैनेजर के खिलाफ 24 से ज्यादा मामले दर्ज कराये हैं।

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आवंटियों को उनकी जमीन पर ना ही कब्जा मिल सका और ना ही उनकी रकम वपास हो पाई। सूत्रों की माने तो रोहतास बिल्डर पर कई ब्यूरोक्रेट और सफेदपोश लोगों का हाथ है, जिसकी वजह से उसे राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण मिला हुआ है। सूत्रों की माने तो इसी कारण पुलिस भी रोहतास बिल्डर की गिरफ्तारी से बच रही है।

सूत्रों की मानें तो जिन बड़े नौकरशाहों ने प्रोजेक्ट में अपना पैसा लगाया था, अब उसके बदले में उन्हे उत्तराखंड, देहरादून, नोयडा, मुंबई और लखनऊ में ज़मीनें दी जा रही हैं। इस पूरे खेल में फंसे वो मध्यमवर्गी परिवार जिन्होने अपनी मेहनत की कमाई इस प्रोजेक्ट में लगाई। इस मामले में 200 से ज्यादा आवंटियों के द्वारा हजरतगंज कोतवाली मे मुकदमा दर्ज कराया भी जा चुका है। लेकिन इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड पुलिस की गिरफ्त से दूर है।

यहां भी नहीं ​मिली बिल्डर को राहत
रोहतास बिल्डर पर चौतरफा शिकंजा कसता जा रहा है। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स भंग कर अंतरिम रिजॉल्यूशन प्रफेशनल (आईआरपी) नियुक्त किए जाने के मामले में रोहतास डिवेलपर को नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के अपीलीय न्यायाधिकरण से भी कोई राहत नहीं मिली है। इस बीच कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स बनाने (आवंटी, बैंक और निवेशकों की कमिटी) का फैसला अब 29 नवंबर के बजाय दो दिसंबर को होगा। अपीलीय न्यायाधिकरण में मामले की अगली सुनवाई भी दो दिसंबर को है।

रोहतास डिवेलपर की बढेंगी मुश्किलें
आवंटियों के करोड़ों रुपये ठगने वाले रोहतास डिवेलपर की मुश्किलें कम नहीं हो रहीं हैं। बताया जा रहा है कि ​डेवलपर की कोशिश है कि एनसीएलटी में अपील करने वाले आवंटी- गौतम मलिक, सचिन गुप्ता, अभिषेक कुमार, रमेश चंद्रा और संगीता श्रीवास्तव को प्लॉट देकर मामला सुलझा ले। वहीं, आईआरपी को करीब 700 आवंटी क्लेम भेज चुके हैं, जबकि सैकड़ों इस कवायद में जुटे हैं। आईआरपी ने अगर कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स बनाई तो उसमें करीब 3000 आवंटी होंगे। कमिटी बनने के बाद 90% सदस्यों की शिकायतों के समाधान के बाद ही आगे सुनवाई हो सकेगी।

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