नहीं रहे अरुण जेटली, जाने कैसे तय किया छात्र राजनीति से लेकर वित्त मंत्री तक का सफर

नहीं रहे अरुण जेटली, जाने कैसे तय किया छात्र राजनीति से लेकर वित्त मंत्री तक का सफर
नहीं रहे अरुण जेटली, जाने कैसे तय किया छात्र राजनीति से लेकर वित्त मंत्री तक का सफर

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में से एक अरुण जेटली के निधन की खबर सुनते ही सभी स्तब्ध रह गए। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में उनके पास वित्त जैसा महत्वपूर्ण मंत्रालय था यही नहीं उनकी गिनती प्रधानमंत्री के बाद भाजपा के बाद दूसरे नंबर के नेताओं में होती थी। हाल ही में गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स (जीएसटी) को पूरे देश में लागू करने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान था।

वैसे तो अरुण जेटली का राजनीति करियर उनके छात्र रहते ही शुरू हो गया था। दरअसल, 1973 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने ‘संपूर्ण क्रांति आंदोलन’ शुरू किया। जिसमें विद्यार्थी और युवा संगठनों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अधिक से अधिक छात्रों को आंदोलन से जोड़ने के लिए जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने राष्ट्रीय समिति बनाई और जेटली को इस राष्ट्रीय समिति का संयोजक बनाया। आइये जानते हैं उनके छात्र राजनीति से लेकर वित्त मंत्री तक के सफर के बारे में…

Political Journey Of Former Finance Minister Arun Jaitley :

अरुण जेटली का राजनीतिक कैरियर

1991 से जेटली भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रहे।
1999 के आम चुनाव से पहले की अवधि के दौरान वह भाजपा के प्रवक्ता बने।
1999 में अटल बिहारी बाजपेयी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार में उन्हें सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नियुक्त किया गया था।
राम जेठमलानी के इस्तीफे के बाद 23 जुलाई 2000 को जेटली को कानून, न्याय और कंपनी मामलों के मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिला।
1974 में वे दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष भी बने थे।
1975-77 में 19 महीनों तक आपातकाल के दौरान वे मीसाबंदी थे और इसके बाद जनसंघ में शामिल हो गए थे।
वकील होने के नाते 1977 से उच्चतम न्यायालय तथा देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में उन्होंने वकालत भी की थी।
1989 में जेटली को विश्वनाथ प्रताप सिंह सरकार द्वारा अतिरिक्त महाधिवक्ता नियुक्त किया गया था।
2014 के आम चुनाव में, उन्होंने अमृतसर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और अमरिंदर सिंह (कांग्रेस उम्मीदवार) से हार गए।

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में से एक अरुण जेटली के निधन की खबर सुनते ही सभी स्तब्ध रह गए। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में उनके पास वित्त जैसा महत्वपूर्ण मंत्रालय था यही नहीं उनकी गिनती प्रधानमंत्री के बाद भाजपा के बाद दूसरे नंबर के नेताओं में होती थी। हाल ही में गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स (जीएसटी) को पूरे देश में लागू करने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान था। वैसे तो अरुण जेटली का राजनीति करियर उनके छात्र रहते ही शुरू हो गया था। दरअसल, 1973 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने 'संपूर्ण क्रांति आंदोलन' शुरू किया। जिसमें विद्यार्थी और युवा संगठनों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अधिक से अधिक छात्रों को आंदोलन से जोड़ने के लिए जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने राष्ट्रीय समिति बनाई और जेटली को इस राष्ट्रीय समिति का संयोजक बनाया। आइये जानते हैं उनके छात्र राजनीति से लेकर वित्त मंत्री तक के सफर के बारे में... अरुण जेटली का राजनीतिक कैरियर 1991 से जेटली भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रहे। 1999 के आम चुनाव से पहले की अवधि के दौरान वह भाजपा के प्रवक्ता बने। 1999 में अटल बिहारी बाजपेयी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार में उन्हें सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नियुक्त किया गया था। राम जेठमलानी के इस्तीफे के बाद 23 जुलाई 2000 को जेटली को कानून, न्याय और कंपनी मामलों के मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिला। 1974 में वे दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष भी बने थे। 1975-77 में 19 महीनों तक आपातकाल के दौरान वे मीसाबंदी थे और इसके बाद जनसंघ में शामिल हो गए थे। वकील होने के नाते 1977 से उच्चतम न्यायालय तथा देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में उन्होंने वकालत भी की थी। 1989 में जेटली को विश्वनाथ प्रताप सिंह सरकार द्वारा अतिरिक्त महाधिवक्ता नियुक्त किया गया था। 2014 के आम चुनाव में, उन्होंने अमृतसर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और अमरिंदर सिंह (कांग्रेस उम्मीदवार) से हार गए।