श्रमिकों के दर्द पर भारी पड़ी सियासत: दिनभर चला घमासान, बसें न पहुंचने पर मिली निराशा

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श्रमिकों के दर्द पर भारी पड़ी सियासत: दिनभर चला घमासान, बसें न पहुंचने पर मिली निराशा

लखनऊ। कोरोना संकट के चलते प्रवासी कामगारों का दिल्ली-एनसीआर से अपने घरों की ओर लौटने का सिलसिला जारी है। कांग्रेस की ओर से मंगलवार को कामगारों के लिए 500 बसें गाजियाबाद से चलनी थीं जों उन्हें गृह जनपदों के लिए ले जातीं, लेकिन बसें नहीं पहुंचीं। सड़कों पर तेज धूप में पैदल और साइकिल से कई सौ किमी लंबे सफर के लिए निकले कामगारों को उनके गृह जनपदों के लिए पहुंचाने को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने पार्टी की ओर से 1000 बसें उपलब्ध कराने का प्रस्ताव प्रदेश सरकार के सामने रखा था।

Politics Is Heavy On The Pain Of The Workers Arrogance Lasted All Day Disappointment At Not Reaching Buses :

यूपी सरकार ने इसे स्वीकार भी कर लिया था। गाजियाबाद में परिवहन विभाग के अफसर बसों को खड़ी करने और कामगारों को भेजने के इंतजाम के साथ मंगलवार को इंतजार करते रहे। देर रात तक ये बसें गाजियाबाद के इंदिरापुरम रामलीला मैदान और साहिबाबाद वर्कशॉप पर नही पहुंचीं। इस संबंध में जिलाधिकारी को शासन से पत्र प्राप्त हुआ था। कांग्रेस जिलाध्यक्ष विजेंद्र यादव का कहना है कि सरकार की ओर से सूची मांगने पर कांग्रेस ने बसों की सूची उपलब्ध कराई थी। लेकिन बसों को आने की अनुमति ही नहीं दी गई। बसों को आगरा-राजस्थान यूपी बार्डर पर रोक लिया गया।

राजस्थान से आ रही बसें गाजियाबाद न आने पर कांग्रेसी साहिबाबाद डिपो से वापस लौट गए। कांग्रेस के नेता सुबह से साहिबाबाद डिपो पर बसों के आने का इंतजार कर रहे थे। कांग्रेस के पूर्व महानगर अध्यक्ष नरेंद्र भारद्वाज ने बताया कि उन्हें सुबह से ही बसों के आने का इंतजार था, ताकि उन लोगों को घर भेजा जा सके जो लंबे समय से जिले में फंसे हैं। हालांकि सरकार के इशारे पर बसों को आगरा ही रोक दिया गया।

उधर, नोएडा में भी प्रवासियों को उनके गृह जनपद भेजने के लिए कांग्रेस की बसों की मुहिम को लेकर मंगलवार को दिन भर सियासत हुई। कांग्रेसी सुबह से ही दावा करते रहे कि उनके पास पांच सौ बसें हैं और वह कामगारों को उनके गृह जनपद पहुंचाने के लिए तैयार हैं। वहीं दूसरी ओर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मात्र तीस बसें मिलीं। अधिकांश की स्थिति ऐसी नहीं थी कि उनसे कामगारों को भेजा जा सके, बसों की जांच कराई जा रही है। वहीं कांग्रेस पदाधिकारियों ने पूरे प्रकरण में पुलिस-प्रशासन पर तानाशाही का आरोप लगाया है।

लखनऊ। कोरोना संकट के चलते प्रवासी कामगारों का दिल्ली-एनसीआर से अपने घरों की ओर लौटने का सिलसिला जारी है। कांग्रेस की ओर से मंगलवार को कामगारों के लिए 500 बसें गाजियाबाद से चलनी थीं जों उन्हें गृह जनपदों के लिए ले जातीं, लेकिन बसें नहीं पहुंचीं। सड़कों पर तेज धूप में पैदल और साइकिल से कई सौ किमी लंबे सफर के लिए निकले कामगारों को उनके गृह जनपदों के लिए पहुंचाने को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने पार्टी की ओर से 1000 बसें उपलब्ध कराने का प्रस्ताव प्रदेश सरकार के सामने रखा था। यूपी सरकार ने इसे स्वीकार भी कर लिया था। गाजियाबाद में परिवहन विभाग के अफसर बसों को खड़ी करने और कामगारों को भेजने के इंतजाम के साथ मंगलवार को इंतजार करते रहे। देर रात तक ये बसें गाजियाबाद के इंदिरापुरम रामलीला मैदान और साहिबाबाद वर्कशॉप पर नही पहुंचीं। इस संबंध में जिलाधिकारी को शासन से पत्र प्राप्त हुआ था। कांग्रेस जिलाध्यक्ष विजेंद्र यादव का कहना है कि सरकार की ओर से सूची मांगने पर कांग्रेस ने बसों की सूची उपलब्ध कराई थी। लेकिन बसों को आने की अनुमति ही नहीं दी गई। बसों को आगरा-राजस्थान यूपी बार्डर पर रोक लिया गया। राजस्थान से आ रही बसें गाजियाबाद न आने पर कांग्रेसी साहिबाबाद डिपो से वापस लौट गए। कांग्रेस के नेता सुबह से साहिबाबाद डिपो पर बसों के आने का इंतजार कर रहे थे। कांग्रेस के पूर्व महानगर अध्यक्ष नरेंद्र भारद्वाज ने बताया कि उन्हें सुबह से ही बसों के आने का इंतजार था, ताकि उन लोगों को घर भेजा जा सके जो लंबे समय से जिले में फंसे हैं। हालांकि सरकार के इशारे पर बसों को आगरा ही रोक दिया गया। उधर, नोएडा में भी प्रवासियों को उनके गृह जनपद भेजने के लिए कांग्रेस की बसों की मुहिम को लेकर मंगलवार को दिन भर सियासत हुई। कांग्रेसी सुबह से ही दावा करते रहे कि उनके पास पांच सौ बसें हैं और वह कामगारों को उनके गृह जनपद पहुंचाने के लिए तैयार हैं। वहीं दूसरी ओर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मात्र तीस बसें मिलीं। अधिकांश की स्थिति ऐसी नहीं थी कि उनसे कामगारों को भेजा जा सके, बसों की जांच कराई जा रही है। वहीं कांग्रेस पदाधिकारियों ने पूरे प्रकरण में पुलिस-प्रशासन पर तानाशाही का आरोप लगाया है।