मजबूर बाप ने 15 किलोमीटर तक कंधे पर ढ़ोई बेटी की लाश

भुवनेश्वर। ओडिशा में एकबार फिर इंसानियत को शर्मासार करने वाली घटना सामने आई है। यह घटना ओडिशा के अंगुल जिले की है। जहां एक बाप की गरीबी ऐसी मजबूरी बन गई कि उसे अपनी बेटी की लाश को 15 किलोमीटर तक अकेले कंधे पर ढ़ोना पड़ा।




मिली जानकरी के मुताबिक, ढीबर नामक व्यक्ति अपनी बीमार बेटी को बेहतर इलाज के लिए शहर लाया था, लेकिन उसे क्या पता था इसकी ये कोशिश बेकार साबित होगी और यह अपने कलेजे के टुकड़े को खो देगा। बच्ची के इलाज में सारी जमा पूंजी खर्च करने के बाद ढीबर के पास इतने पैसे नहीं बचे थे कि वह अपनी बेटी के शव को घर तक लेजाने के लिए एंबुलेंस तक कर सके। मजबूरी में वह अपनी बेटी का शव कंधे पर उठाकर अपनी पत्नी के साथ गांव के लिए पैदल ही वापस चल पड़ा।

अगर इस गरीब की गरीबी को अलग रख दें और सरकारी तंत्र की बात करें तो देश के हर राज्य में केन्द्र सरकार की एनआरएचएम योजना और राज्य सरकारों की मदद से मुफ्त एंबुलेंस की सेवा उपलब्ध है। यह सेवा देश के हर नागरिक के लिए मुफ्त है। फिर चाहें वह गरीब हो या अमीर, लेकिन ढीबर को यह सुविधा क्यों नहीं मुहैया करवाई गई ये बात अपने आप में एक बड़ा सवाल है। अगर सरकारी सेवाओं का लाभ जरूरत मंदों को तक नहीं मिलेगा तो ऐसी सेवाओं को तुरंत बंद कर देना चाहिए। अाखिर ये सेवाएं कब तक चंद तिजोरियों को भरने का साधन बनतीं रहेंगी।




यह कोई पहला मामला नहीं है जब ओडीशा सरकार का यह अमानवीय चेहरा सामने आया हो। इससे पहले कुछ माह पूर्व ही दीना मांझी ने सारे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था। जिसके बाद दो भाई अपनी मां के शव को तोड़कर बांस पर लटका कर अपने गांव को ले जाते नजर आए थे। ऐसी घटनाओं के जिक्र से आम आदमी का दिल जरूर भर सकता है लेकिन ओडिशा सरकार की संवेदनाएं शायद इस हद तक मर चुकीं हैं कि उसे किसी बात से कोई फर्क नहीं पड़ता।