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प्रवासी-अप्रवासी मजदूरों की बदहाली: कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का खटखटाया दरवाजा

Poverty Of Migrant Laborers Congress Knocked At The Door Of Supreme Court

नई दिल्ली। भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या एक लाख 50 हजार के पार पहुंच चुकी है। प्रवासी मज़दूरों की बदहाली पर सुप्रीम कोर्ट की तरफ से संज्ञान लिए जाने के बाद कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अप्रवासी मजदूरों की दुर्दशा के मामले में कोर्ट में अपनी दलीलें रखने की अनुमति मांगी है। कल अप्रवासी मजदूरों के मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट सुरजेवाला की याचिका पर विचार कर सकता है।

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रणदीप सुरजेवाला ने अपनी याचिका में कहा है कि वे Covid19 महामारी से लड़ने के लिए बनाये गए कांग्रेस कोर कमेटी के सदस्य हैं। पिछले 2 महीने में उन्होंने कोरोना महामारी और लॉक डाउन को लेकर दस से अधिक प्रेस वार्ता किया है। कोर कमेटी के सदस्य के रूप में पार्टी कार्यकर्ताओं के द्वारा भेजे गए तमाम ग्राउंड रिपोर्ट का अध्ययन किया है और सरकार को कई सुझाव भी दिये हैं। याचिका में कहा गया है कि कोरोना के चलते मार्च 2020 से संसद का सत्र नहीं चल रहा है जिसके चलते कांग्रेस पार्टी एक विपक्ष के रूप में अप्रवासी मजदूरों के मुद्दे को संसद में नहीं उठा पा रही है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि सरकार ने कोरोना महामारी से लड़ने के लिए विपक्षी पार्टियों के साथ मिलकर कोई जॉइंट कमिटि नहीं बनाया है और न ही किसी विपक्षी पार्टी या सांसद की सलाह पर ही विचार कर रही है। इसलिए याचिकाकर्ता को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा है।

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में जगह जगह फंसे प्रवासी मज़दूरों की बदहाली का स्वतः संज्ञान लेते हुए, केन्द्र सरकार व सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। 28 मई को सरकारों के जवाब पर कोर्ट सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट के 20 सीनियर एडवोकेट्स ने प्रवासी मज़दूरों की बदहाली पर संज्ञान लेने की मांग को लेकर सोमवार रात को सुप्रीम कोर्ट के जजों को पत्र लिखा था। अगले दिन सुप्रीम कोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया और जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एम आर शाह की बेंच ने देशभर में जगह जगह फंसे प्रवासी मज़दूरों की बदहाली पर गहरी चिंता जताते केन्द्र सरकार व सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर इस पर गुरूवार तक जवाब देने का आदेश दिया।

प्रवासी मजदूरों की हालत पर चिंता जताते हुए कोर्ट ने कहा था कि अपने घरों को वापस पहुँचने के लिए देश की सड़कों पर पैदल चल रहे मज़दूरों को मदद की सख्त ज़रूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों के इंतज़ाम नाकाफी हैं, जिसके लिए सभी सरकारों को जवाब देना होगा।

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गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने प्रवासी मजदूरों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई से इंकार कर दिया था। औरंगाबाद में रेल की पटरी पर कटकर मजदूरों के मौत के मामले में कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि जब लोग रेल की पटरी पर सो जाएंगे तो उन्हें कोई कैसे बचा सकता है! कोर्ट की इस टिप्पणी को लोगों ने असंवेदनशील करार दिया था। इसके पहले देश के कई हाइकोर्ट्स ने अप्रवासी मजदूरों के मामले में सरकारों से जवाब मांगा है।

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