प्रतीक यादव को अखिलेश सरकार ने बना दिया प्रदेश का सबसे बड़ा गौ सेवक

लखनऊ। समाजवादी नेता मुलायम सिंंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव की पहचान मंहगी गाड़ियों के शौकीन और बॉडी बिल्डर के रूप में रही है। वह एक बड़े रियल इस्टेट कारोबारी भी हैं। लेकिन हाल ही में प्रतीक यादव की पहचान एक बड़े गौ सेवक के रूप में हुई है। यह खुलासा लखनऊ की आरटीआई एक्टविस्ट नूतन ठाकुर द्वारा मांगी गई जानकारी में हुआ है।

नूतन ठाकुर को यूपी के गौ सेवा आयोग की ओर से दी गई जानकारी में सामने आया है कि वर्ष 2012 से 2016 के बीच यानी अखिलेश यादव के कार्यकाल के दौरान गौ सेवा और गौ रक्षा के लिए दिए जाने वाले अनुदानों का 86.4 प्रतिशत हिस्सा प्रतीक यादव के संरक्षण में चलने वाली संस्था जीव आश्रय को मिला है।

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प्रतीक यादव की संस्था पर अखिलेश सरकार की मेहरबानी की अगर कोई खास वजह नजर आती है तो वह है परिवारवाद। प्रतीक यादव की संस्था को इतना बड़ा लाभ सिर्फ इसलिए मिला क्योंकि वह मुलायम सिंह यादव के बेटे हैं और उनके सौतेले भाई अखिलेश यादव उस समय सूबे के मुख्यमंत्री थे।

नूतन ठाकुर की ओर से गौ सेवा आयोग से मांगी गई जानकारी के जवाब में आयोग के जन सूचना अधिकारी डॉ0 संजय यादव ने बताया है कि वर्ष 2012 से 2017 के बीच आयोग की ओर से 9.66 करोड़ रूपए का अनुदान जारी किया गया। जिसमें से 8.35 करोड़ का अनुदान लखनऊ की जीव आश्रय नाम की संस्था को दिया गया।

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अब आपको बताते हैं क्या है जीव आश्रय संस्था—

जीव आश्रय प्रतीक यादव के संरक्षण में पशुओं की सेवा के लिए बनाया गई एक समाजसेवी संस्था है। यह संस्था लखनऊ के इंड​स्ट्रियल एरिया कान्हा उपवन में जीव आश्रय गौशाला चलाती है। इस गौशाला का दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कर चुके हैं। प्रतीक यादव के अलावा उनकी पत्नी अपर्णा यादव भी इस संस्था के कार्यों से जुड़ी रहीं हैं।

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