प्रयागराज : पूर्व मंत्री रंगनाथ मिश्र पर ईडी की कार्रवाई, जब्त हुई पांच करोड़ की सं​पत्ति

rangnath mishra
प्रयागराज : पूर्व मंत्री रंगनाथ मिश्र पर ईडी की कार्रवाई, जब्त हुई पांच करोड़ की सं​पत्ति

नई दिल्ली। बसपा सरकार में प्राथमिक शिक्षा मंत्री रहे रंगनाथ मिश्र पर ईडी का शिकंजा कसता जा रहा है। आय से अधिक संपत्ति के मामले में ईडी ने उनकी प्रयागराज स्थित पांच करोड़ की संपत्ति जब्त की है। ये जानकारी निदेशालय के लखनऊ जोनल आफिस ने दी है।

Prayagraj Eds Action Against Former Minister Ranganath Mishra Seized Rs 5 Crore Property :

बताया जा रहा है कि प्रयागराज के जार्ज टाउन टैगोर टाउन स्थित 250.83 वर्ग मीटर, 899.25 वर्ग मीटर के आवासीय भूखण्ड को ईडी ने जब्त किया है। वहीं आवास संख्या -54/171 को भी जब्त किया गया है। रंगनाथ मिश्र ने ये सारी संपत्तियां अपने व अपने परिवार के अन्य सदस्यों के नाम खरीदी थी। वो वर्ष 2010 में जब प्राथमिक शिक्षा मंत्री थे, तभी ये सारी संपत्तियां खरीदी गई थी।

प्रवर्तन निदेशालय ने मिश्र के खिलाफ उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के तहत जांच शुरू की थी। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 के तहत मिश्र के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का यह प्रकरण 2007 से 2011 के बीच रही बसपा सरकार के कार्यकाल का है। फिलहाल उनकी अन्य सम्पत्तियों और इन नामों से चल रहे ट्रस्ट, समितियों व संस्थानों की भी जांच की जा रही है।

नई दिल्ली। बसपा सरकार में प्राथमिक शिक्षा मंत्री रहे रंगनाथ मिश्र पर ईडी का शिकंजा कसता जा रहा है। आय से अधिक संपत्ति के मामले में ईडी ने उनकी प्रयागराज स्थित पांच करोड़ की संपत्ति जब्त की है। ये जानकारी निदेशालय के लखनऊ जोनल आफिस ने दी है। बताया जा रहा है कि प्रयागराज के जार्ज टाउन टैगोर टाउन स्थित 250.83 वर्ग मीटर, 899.25 वर्ग मीटर के आवासीय भूखण्ड को ईडी ने जब्त किया है। वहीं आवास संख्या -54/171 को भी जब्त किया गया है। रंगनाथ मिश्र ने ये सारी संपत्तियां अपने व अपने परिवार के अन्य सदस्यों के नाम खरीदी थी। वो वर्ष 2010 में जब प्राथमिक शिक्षा मंत्री थे, तभी ये सारी संपत्तियां खरीदी गई थी। प्रवर्तन निदेशालय ने मिश्र के खिलाफ उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के तहत जांच शुरू की थी। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 के तहत मिश्र के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का यह प्रकरण 2007 से 2011 के बीच रही बसपा सरकार के कार्यकाल का है। फिलहाल उनकी अन्य सम्पत्तियों और इन नामों से चल रहे ट्रस्ट, समितियों व संस्थानों की भी जांच की जा रही है।