हिमालय क्षेत्र में आ सकता है 8.5 की तीव्रता से भूकंप, मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी

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हिमालय क्षेत्र में आ सकता है 8.5 की तीव्रता से भूकंप, मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी

नई दिल्ली। एक अध्ययन के जरिये वैज्ञानिकों ने हिमालय क्षेत्र में भविष्य में उच्च तीव्रता के भूकंप आने की चेतावनी जारी की है। यह भी बताया है कि इसकी तीव्रता आठ से 8.5 तक भी हो सकती है। इस बारे में जवाहरलाल नेहरू सेंटर के भूकंप विशेषज्ञ सीपीने कहा कि केंद्रीय हिमालय में 8.5 या उससे अधिक की तीव्रता का भयानक भूकंप विकराल रूप ले सकता है।

Predictions Of 8 5 Magnitude Earthquake In Himalayas :

‘जियोलॉजिकल जर्नल’ में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने दो नए खोजी गई जगहों के आंकड़ों के साथ-साथ पश्चिमी नेपाल और चोरगेलिया में मोहन खोला के आंकड़ों के साथ मौजूदा डेटाबेस का मूल्यांकन किया, जोकि भारतीय सीमा के भीतर आता है। शोधकर्ताओं ने भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के कार्टोसैट -1 उपग्रह से गूगल अर्थ और इमेजरी का उपयोग करने के अलावा भूगर्भीय सर्वेक्षण के भारत द्वारा प्रकाशित स्थानीय भूविज्ञान और संरचनात्मक मानचित्र का उपयोग किया है।

इससे पहले नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (एनटीयू) की अगुवाई में एक रिसर्च टीम ने भी पाया था कि मध्य हिमालय क्षेत्रों में रिएक्टर पैमाने पर आठ से साढ़े आठ तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आने का खतरा है। शोधकर्ताओं ने एक बयान में कहा कि सतह टूटने संबंधी खोज का हिमालय पर्वतीय क्षेत्रों से जुड़े इलाकों पर गहरा असर है। प्रमुख वैज्ञानिक पॉल टैपोनियर ने कहा कि अतीत में इस तरह के खतरनाक भूकंपों का अस्तित्व का मतलब यह हुआ कि इतनी ही तीव्रता के भूकंप के झटके भविष्य में फिर से आ सकते हैं, खासकर उन इलाकों में जिनकी सतह भूकंप के झटके के कारण अभी टूटी नहीं है।

नई दिल्ली। एक अध्ययन के जरिये वैज्ञानिकों ने हिमालय क्षेत्र में भविष्य में उच्च तीव्रता के भूकंप आने की चेतावनी जारी की है। यह भी बताया है कि इसकी तीव्रता आठ से 8.5 तक भी हो सकती है। इस बारे में जवाहरलाल नेहरू सेंटर के भूकंप विशेषज्ञ सीपीने कहा कि केंद्रीय हिमालय में 8.5 या उससे अधिक की तीव्रता का भयानक भूकंप विकराल रूप ले सकता है।'जियोलॉजिकल जर्नल' में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने दो नए खोजी गई जगहों के आंकड़ों के साथ-साथ पश्चिमी नेपाल और चोरगेलिया में मोहन खोला के आंकड़ों के साथ मौजूदा डेटाबेस का मूल्यांकन किया, जोकि भारतीय सीमा के भीतर आता है। शोधकर्ताओं ने भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के कार्टोसैट -1 उपग्रह से गूगल अर्थ और इमेजरी का उपयोग करने के अलावा भूगर्भीय सर्वेक्षण के भारत द्वारा प्रकाशित स्थानीय भूविज्ञान और संरचनात्मक मानचित्र का उपयोग किया है।इससे पहले नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (एनटीयू) की अगुवाई में एक रिसर्च टीम ने भी पाया था कि मध्य हिमालय क्षेत्रों में रिएक्टर पैमाने पर आठ से साढ़े आठ तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आने का खतरा है। शोधकर्ताओं ने एक बयान में कहा कि सतह टूटने संबंधी खोज का हिमालय पर्वतीय क्षेत्रों से जुड़े इलाकों पर गहरा असर है। प्रमुख वैज्ञानिक पॉल टैपोनियर ने कहा कि अतीत में इस तरह के खतरनाक भूकंपों का अस्तित्व का मतलब यह हुआ कि इतनी ही तीव्रता के भूकंप के झटके भविष्य में फिर से आ सकते हैं, खासकर उन इलाकों में जिनकी सतह भूकंप के झटके के कारण अभी टूटी नहीं है।