राष्ट्रपति ने मंजूर की निर्वाचन आयोग की सिफारिश, आप के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द

राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द
राष्ट्रपति ने मंजूर की निर्वाचन आयोग की सिफारिश, आप के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द

नई दिल्ली। निर्वाचन आयोग की सिफारिश पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने रविवार को आम आदमी पार्टी (आप) के 20 विधायकों की सदस्यता को रद्द करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इससे पहले आप ने अपने विधायकों के साथ राष्ट्रपति से मुलाकात का समय मांगा था, दिल्ली की सत्ता में बैठी इस पार्टी का अरोप था कि निर्वाचन आयोग ने दोषी पाए गए विधायकों को पक्ष सुने बिना ही अपना उनकी सदस्यता को रद्द करने की सिफारिश भेजी है।

राष्ट्रपति कार्यालय की मंजूरी के बाद आप के सामने केवल सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई से राहत मिलने की आखिरी उम्मीद बची है, लेकिन पहले दिन विधायकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत द्वारा की गई गंभीर टिप्पणी को ध्यान में रखते हुए यह उम्मीद भी कमजोर पड़ती नजर आ रही है।

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एक ओर अपने 20 विधायकों की सदस्यता जाने से आप के भीतर निराशा का माहौल है वहीं दूसरी ओर कांग्रेस और भाजपा में उपचुनावों की तैयारी शुरू हो चुकी है। कांग्रेस पार्टी एक के बाद एक कई बैठकें कर इस चुनावी तैयारियों में जुटने के संकेत दे दिए हैं। वहीं दूसरी ओर भाजपा है जिसे उम्मीद है कि वह इन 10 सीटों में से अधिकतम सीटें जीतकर दिल्ली विधानसभा में एक मजबूत विपक्ष खड़ाकर आप की मनमानियों पर नकेल कसेगी।

क्या था पूरा मामला —

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साल 2015 में 67 विधायकों के साथ दिल्ली में सरकार बनाने वाली आम आदमी पार्टी ने अपने विधायकों को खुश करने के लिए सात ​मंत्रियों के अतिरिक्त 21 विधायकों को संसदीय सचिव बनाया था। जिन्हें भत्तों के साथ कार्यालय मुहैया करवाया गया था। इन संसदीय सचिवों की नियुक्ति को तीन विधायकों के साथ विपक्ष में बैठेी भाजपा और कांग्रेस ने असंवैधानिक करार देते हुए विरोध किया था। चूंकि संसदीय सचिव का पद लाभ का पद था और एक निर्वाचित विधानसभा सदस्य एक साथ दो लाभ के पदों पर नहीं रह सकता इस लिहाज से दिल्ली के एक वकील प्रशांत पटेल ने इन नियुक्तियों को लेकर राष्ट्रपति कार्यालय में शिकायत की थी।

संसदीय सचिवों की नियुक्ति के मामले को मिली संवैधानिक चुनौती को ध्यान में रखते हुए बहुमत से सत्ता में आसीन आप ने अपना दांव चलते हुए, दिल्ली विधानसभा के सदस्यों की अयोग्यता से जुडे कानून में संशोधन कर डाला। इस संशोधन को लागू करने के लिए संसदीय सचिवों की नियुक्ति के समय से लागू किया गया। इस कानून संशोधन के मामले में भी दिल्ली सरकार उस समय बैकफुट पर आ गई जब दिल्ली के तत्कालीन उप राज्यपाल की संतुति के बिना ही इसे लागू किया गया।

आप का आरोप है कि उसने अपने विधायकों को संसदीय सचिव नियुक्त करने के बाद किसी तरह की कोई सुविधा प्रदान नहीं की है। उन्हें सिर्फ सचिवालय में कार्यालय प्रदान किया गया था।

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निर्वाचन आयोग ने आप के आरोपों को अपनी जांच में गलत पाया है, क्योंकि आयोग के सामने संस​दीय सचिवों को भत्तों के भुगतान किए गए थे और इन संसदीय सचिवों ने मंत्री की अनुपस्थिति में विभागीय बैठकों में पूरे अधिकारों के साथ हिस्सा लिया था और बैठकों के फैसलों को प्रभावित किया था।

नई दिल्ली। निर्वाचन आयोग की सिफारिश पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने रविवार को आम आदमी पार्टी (आप) के 20 विधायकों की सदस्यता को रद्द करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इससे पहले आप ने अपने विधायकों के साथ राष्ट्रपति से मुलाकात का समय मांगा था, दिल्ली की सत्ता में बैठी इस पार्टी का अरोप था कि निर्वाचन आयोग ने दोषी पाए गए विधायकों को पक्ष सुने बिना ही अपना उनकी सदस्यता को रद्द करने की सिफारिश भेजी है। राष्ट्रपति…
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