भीड़ में दिखा दोस्त तो प्रोटोकॉल भूले राष्ट्रपति कोविंद, स्टेज पर बुलाकर लगाया गले

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भीड़ में दिखा दोस्त तो प्रोटोकॉल भूले राष्ट्रपति कोविंद, स्टेज पर बुलाकर लगाया गले

नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ram Nath Kovind) ने उत्कल विश्वविद्यालय (Utkal University) के प्लेटिनम जुबली समारोह के दौरान दोस्ती की मिसाल पेश की।उन्होंने लोगों की भीड़ में अपने दोस्त को देख सब कुछ भूल उसे स्टेज पर बुला गले लगा लिया।

President Kovind Forgot The Protocol In The Crowd Called On The Stage And Hugged Him :

ऐसा रहा दोनों दोस्त का मिलन

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को उनके नरम स्वभाव के लिए ही जाना जाता है। सोमवार को उन्होंने समापन समारोह के दौरान लोगों की भीड़ में अपने एक पुराने मित्र को पहचान लिया। बिना सोचे समझे उन्होंने वहीं बैठे केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) से अपने मित्र को स्टेज पर लाने के लिए कहा। मित्र के स्टेज पर आते ही राष्ट्रपति ने उसे गले से लगा लिया। यह सब देख वहां मौजूद लोग भी आश्चर्य से देख खुश हो गए।

आखिर कौन है ये मित्र

इस समारोह में ओडिशा के पूर्व राज्यसभा सदस्य बीरभद्र सिंह मौजूद थे, जो राष्ट्रपति के करीब 12 साल पुराने मित्र हैं। बीरभद्र सिंह 2000 से 2006 तक राज्यसभा में एससी/एसटी के सदस्य थे, जहां उन्होंने राष्ट्रपति के साथ काम किया था। जैसे ही स्टेज पर आये तो दोनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा, दोनों मित्रों ने एक दूसरे को गले लगा लिया और एक साथ फोटो भी खिंचवाए। बीरभद्र सिंह ने बताया कि वो दोनों 12 साल बाद एक दूसरे से मिल रहें हैं।

खुद सांसद भी राष्‍ट्रपति की सादगी से हैरान

मयूरभंज जिले से तीन बार सांसद रहे बीरभद्र सिंह ने इसके बाद मीडिया को अपनी मुलाकात के बारे में बताया। उन्‍होंने कहा, ‘राज्‍यसभा के दिनों में हम दोनों काफी करीब थे और हमने साथ में कई महत्‍वपूर्ण विषयों पर चर्चा की है। मेरे राज्‍यसभा कार्यकाल के खत्‍म होने के बाद हमारा संपर्क टूट गया। मुझे तो हैरानी है कि मैं उन्‍हें याद हूं जबकि हम 13 साल बाद मिले हैं।’ उन्‍होंने बताया कि जब वह राष्‍ट्रपति भवन में राष्‍ट्रपति से मिलने जाएंगे तो अपने क्षेत्र में मौजूद एससी/एसटी मुद्दों को दिमाग में रखेंगे।

कौन हैं बीरभद्र सिंह

सिंह ने मयूरभंज जिले में छुआछूत को खत्‍म करने की दिशा में काफी काम किया है। इसके अलावा उन्‍होंने कबायली समुदायों में असाक्षरता को खत्‍म करने के लिए लड़ाई लड़ी है। वह ओडिशा के मुख्‍यमंत्री नवीन पटनायक के पिता और लीजेंडरी पॉलिटिशियन बीजू पटनायक के बहुत करीब थे। उनका राजनीतिक करियर जन कांग्रेस, जनता पार्टी और जनता दल जैसे दलों तक रहा है।

नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ram Nath Kovind) ने उत्कल विश्वविद्यालय (Utkal University) के प्लेटिनम जुबली समारोह के दौरान दोस्ती की मिसाल पेश की।उन्होंने लोगों की भीड़ में अपने दोस्त को देख सब कुछ भूल उसे स्टेज पर बुला गले लगा लिया। ऐसा रहा दोनों दोस्त का मिलन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को उनके नरम स्वभाव के लिए ही जाना जाता है। सोमवार को उन्होंने समापन समारोह के दौरान लोगों की भीड़ में अपने एक पुराने मित्र को पहचान लिया। बिना सोचे समझे उन्होंने वहीं बैठे केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) से अपने मित्र को स्टेज पर लाने के लिए कहा। मित्र के स्टेज पर आते ही राष्ट्रपति ने उसे गले से लगा लिया। यह सब देख वहां मौजूद लोग भी आश्चर्य से देख खुश हो गए। आखिर कौन है ये मित्र इस समारोह में ओडिशा के पूर्व राज्यसभा सदस्य बीरभद्र सिंह मौजूद थे, जो राष्ट्रपति के करीब 12 साल पुराने मित्र हैं। बीरभद्र सिंह 2000 से 2006 तक राज्यसभा में एससी/एसटी के सदस्य थे, जहां उन्होंने राष्ट्रपति के साथ काम किया था। जैसे ही स्टेज पर आये तो दोनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा, दोनों मित्रों ने एक दूसरे को गले लगा लिया और एक साथ फोटो भी खिंचवाए। बीरभद्र सिंह ने बताया कि वो दोनों 12 साल बाद एक दूसरे से मिल रहें हैं। खुद सांसद भी राष्‍ट्रपति की सादगी से हैरान मयूरभंज जिले से तीन बार सांसद रहे बीरभद्र सिंह ने इसके बाद मीडिया को अपनी मुलाकात के बारे में बताया। उन्‍होंने कहा, 'राज्‍यसभा के दिनों में हम दोनों काफी करीब थे और हमने साथ में कई महत्‍वपूर्ण विषयों पर चर्चा की है। मेरे राज्‍यसभा कार्यकाल के खत्‍म होने के बाद हमारा संपर्क टूट गया। मुझे तो हैरानी है कि मैं उन्‍हें याद हूं जबकि हम 13 साल बाद मिले हैं।' उन्‍होंने बताया कि जब वह राष्‍ट्रपति भवन में राष्‍ट्रपति से मिलने जाएंगे तो अपने क्षेत्र में मौजूद एससी/एसटी मुद्दों को दिमाग में रखेंगे। कौन हैं बीरभद्र सिंह सिंह ने मयूरभंज जिले में छुआछूत को खत्‍म करने की दिशा में काफी काम किया है। इसके अलावा उन्‍होंने कबायली समुदायों में असाक्षरता को खत्‍म करने के लिए लड़ाई लड़ी है। वह ओडिशा के मुख्‍यमंत्री नवीन पटनायक के पिता और लीजेंडरी पॉलिटिशियन बीजू पटनायक के बहुत करीब थे। उनका राजनीतिक करियर जन कांग्रेस, जनता पार्टी और जनता दल जैसे दलों तक रहा है।