महाराष्ट्र में लग गया राष्ट्रपति शासन, शिवसेना और NCP नही साबित कर पायी बहुमत

President's rule in Maharashtra
महाराष्ट्र में लग गया राष्ट्रपति शासन, शिवसेना और NCP नही साबित कर पायी बहुमत

मुम्बई। महाराष्ट्र में सोमवार की तरह मंगलवार को भी शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के बीच गठबन्धन को लेकर सिर्फ बातचीत चलती रही लेकिन कोई भी पार्टी 145 विधायकों के समर्थन की लिस्ट राज्यपाल तक नही पंहुचा सकी। जिसके बाद राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की केन्द्रीय मंत्रिमंडल से सिफारिश की है। केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने भी राष्ट्रपति शासन लगाने का राष्ट्रपति के पास प्रस्ताव भेजा जिस पर राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की मंजूरी दे दी।

Presidents Rule In Maharashtra Shiv Sena And Ncp Could Not Prove Majority :

महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने केन्द्रीय मंत्रिमंडल से जो सिफारिश की थी उसमे कहा था कि संविधान के मुताबिक़ राज्य में सरकार बनने के कोई आसार नहीं लग रहे हैं। हालांकि आज प्रधानमंत्री मोदी को ब्राजील दौरे पर रवाना होना था लेकिन उनके जाने से पहले ही केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई और महाराष्ट्र में राष्टपति शासन लगाने का फैसला किया गया।

आपको बता दें कि राज्यपाल ने सबसे पहले बीजेपी को सरकार बनाने का न्यौता दिया था। लेकिन रविवार तक बीजेपी बहुमत साबित नही कर पायी तो राज्यपाल द्वारा शिवसेना को 24 घंटे की मोहलत दी गयी। सोमवार शाम साढ़े 7 बजे तक शिवसेना को बहुमत साबित करना था, शिवसेना नेता राज्यपाल के पास पंहुचे तो लेकिन उनके पास ​बहुमत नही था, शिवसेना ने दो दिन का वक्त मांगा जिसे राज्यपाल ने नामंजूर कर दिया और मंगलवार रात 8.30 बजे तक एनसीपी से बहुमत साबित करने के लिए कहा । लेकिन एनसीपी को दिये गये समय से पहले ही महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया।

हालांकि अभी भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सबकी निगाहें टिकी हैं। जैसे ही शिवसेना को राष्ट्रपति शासन लगने की जानकारी मिली तो शिवसेना ने सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे खटखटाये। शिवसेना की ओर से सुप्रीम कोर्ट में जो याचिका दायर की गयी है उसमें राज्यपाल द्वारा उन्हें सरकार बनाने के लिए और समय न देने को चुनौती दी गई है। एडवोकेट सुनील फ़र्नांडीज ने शिवसेना की ओर से याचिका दायर की है। शिवसेना कहा कहना है कि सोमवार को जब वह राज्यपाल से मिले थे तो साफ तौर पर कहा था कि एनसीपी और कांग्रेस उन्हे समर्थन दे रही है, बस थोड़े समय की जरूरत है।

मुम्बई। महाराष्ट्र में सोमवार की तरह मंगलवार को भी शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के बीच गठबन्धन को लेकर सिर्फ बातचीत चलती रही लेकिन कोई भी पार्टी 145 विधायकों के समर्थन की लिस्ट राज्यपाल तक नही पंहुचा सकी। जिसके बाद राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की केन्द्रीय मंत्रिमंडल से सिफारिश की है। केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने भी राष्ट्रपति शासन लगाने का राष्ट्रपति के पास प्रस्ताव भेजा जिस पर राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की मंजूरी दे दी। महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने केन्द्रीय मंत्रिमंडल से जो सिफारिश की थी उसमे कहा था कि संविधान के मुताबिक़ राज्य में सरकार बनने के कोई आसार नहीं लग रहे हैं। हालांकि आज प्रधानमंत्री मोदी को ब्राजील दौरे पर रवाना होना था लेकिन उनके जाने से पहले ही केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई और महाराष्ट्र में राष्टपति शासन लगाने का फैसला किया गया। आपको बता दें कि राज्यपाल ने सबसे पहले बीजेपी को सरकार बनाने का न्यौता दिया था। लेकिन रविवार तक बीजेपी बहुमत साबित नही कर पायी तो राज्यपाल द्वारा शिवसेना को 24 घंटे की मोहलत दी गयी। सोमवार शाम साढ़े 7 बजे तक शिवसेना को बहुमत साबित करना था, शिवसेना नेता राज्यपाल के पास पंहुचे तो लेकिन उनके पास ​बहुमत नही था, शिवसेना ने दो दिन का वक्त मांगा जिसे राज्यपाल ने नामंजूर कर दिया और मंगलवार रात 8.30 बजे तक एनसीपी से बहुमत साबित करने के लिए कहा । लेकिन एनसीपी को दिये गये समय से पहले ही महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। हालांकि अभी भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सबकी निगाहें टिकी हैं। जैसे ही शिवसेना को राष्ट्रपति शासन लगने की जानकारी मिली तो शिवसेना ने सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे खटखटाये। शिवसेना की ओर से सुप्रीम कोर्ट में जो याचिका दायर की गयी है उसमें राज्यपाल द्वारा उन्हें सरकार बनाने के लिए और समय न देने को चुनौती दी गई है। एडवोकेट सुनील फ़र्नांडीज ने शिवसेना की ओर से याचिका दायर की है। शिवसेना कहा कहना है कि सोमवार को जब वह राज्यपाल से मिले थे तो साफ तौर पर कहा था कि एनसीपी और कांग्रेस उन्हे समर्थन दे रही है, बस थोड़े समय की जरूरत है।