कुछ ऐसा है यूपी के सरकारी स्कूल का हाल, बदहाल झोपड़ी में चल रहा प्राथमिक विद्यालय

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कुछ ऐसा है यूपी के सरकारी स्कूल का हाल, बदहाल झोपड़ी में चल रहा प्राथमिक विद्यालय

बिजनौर। सरकार भले ही सरकारी स्कूलों को अच्छी व्यवस्था करने का दावा करती हो लेकिन जमीनी हक़ीकत तो कुछ और ही है। यूपी के बिजनौर जिले का प्राथमिक विद्यालय इच्छावाला आज भी बदहाल झोपड़ी में चल रहा है। बच्चो के पढ़ने के लिए पक्का भवन तक नहीं है न ही कोई शौचालय बना है। स्कूल में पंजीकृत 58 छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।

Primary School Running In A Cottage In Bijnor District In Up :

यूपी के बिजनौर जिला ब्लॉक मोहम्मदपुर देवमल का प्राथमिक विद्यालय इच्छावाला आज भी बदहाल झोपड़ी में चलाने को शिक्षक मजबूर हैं। इस प्राथमिक विद्यालय में एक शिक्षक तैनात है। इच्छावाला गांव में ये प्राथमिक विद्यालय 5 वर्षों से ऐसे ही चल रहा है। ग्राम प्रधान द्वारा विगत वर्ष बच्चों के पेयजल के लिए स्कूल के पास एक हैंडपंप लगवाया गया था।

इस प्राथमिक विद्यालय के लिए कोई शौचालय तक नहीं बना है। जबकि शिक्षा विभाग के अलावा स्कूलों में पंचायत राज विभाग द्वारा भी शौचालयों का निर्माण कराया गया। इच्छावाला स्कूल की हर स्तर पर उपेक्षा की जा रही है।

स्कूल के शिक्षक पुष्पेंद्र की माने तो स्कूल में 58 पंजीकृत छात्र हैं। गांव के बच्चों में पढ़ने की काफी उत्सुकता है। स्कूल का समय होते ही बच्चे स्कूल पहुंच जाते हैं। पर स्कूल में बैठने की सुविधा न होने से भारी परेशानी होती है। झोंपडी में चल रहे स्कूल की हालत ग्रीष्मकालीन अवकाश में और भी बदतर हो गई है। स्कूल की झोपड़ी काफी टूट गई है।

बिजनौर। सरकार भले ही सरकारी स्कूलों को अच्छी व्यवस्था करने का दावा करती हो लेकिन जमीनी हक़ीकत तो कुछ और ही है। यूपी के बिजनौर जिले का प्राथमिक विद्यालय इच्छावाला आज भी बदहाल झोपड़ी में चल रहा है। बच्चो के पढ़ने के लिए पक्का भवन तक नहीं है न ही कोई शौचालय बना है। स्कूल में पंजीकृत 58 छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। यूपी के बिजनौर जिला ब्लॉक मोहम्मदपुर देवमल का प्राथमिक विद्यालय इच्छावाला आज भी बदहाल झोपड़ी में चलाने को शिक्षक मजबूर हैं। इस प्राथमिक विद्यालय में एक शिक्षक तैनात है। इच्छावाला गांव में ये प्राथमिक विद्यालय 5 वर्षों से ऐसे ही चल रहा है। ग्राम प्रधान द्वारा विगत वर्ष बच्चों के पेयजल के लिए स्कूल के पास एक हैंडपंप लगवाया गया था। इस प्राथमिक विद्यालय के लिए कोई शौचालय तक नहीं बना है। जबकि शिक्षा विभाग के अलावा स्कूलों में पंचायत राज विभाग द्वारा भी शौचालयों का निर्माण कराया गया। इच्छावाला स्कूल की हर स्तर पर उपेक्षा की जा रही है। स्कूल के शिक्षक पुष्पेंद्र की माने तो स्कूल में 58 पंजीकृत छात्र हैं। गांव के बच्चों में पढ़ने की काफी उत्सुकता है। स्कूल का समय होते ही बच्चे स्कूल पहुंच जाते हैं। पर स्कूल में बैठने की सुविधा न होने से भारी परेशानी होती है। झोंपडी में चल रहे स्कूल की हालत ग्रीष्मकालीन अवकाश में और भी बदतर हो गई है। स्कूल की झोपड़ी काफी टूट गई है।