बाल दिवस पर बच्चों के लिए बड़ा सवाल बने चाचा नेहरू

लखनऊ। बाल दिवस के रूप में मनाया जाने वाला देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्मदिन हमेशा की तरह इस बार भी बड़ी धूमधाम से मनाया गया। पंडित नेहरू के 137वें जन्मदिन पर एक ओर स्कूलों में तरह—तरह के आयोजन किए गए, तो दूसरी ओर यूपी के सीतापुर जिले की एक प्राथमिक पाठशाला में बालदिवस का जो रूप देखने को मिला वह हैरान करने वाला था। इस स्कूल में बच्चों को मालूम नहीं था कि पंडित जवाहर लाल नेहरू कौन थे, और उससे बड़ी विडंबना ये थी कि इन बच्चों को ये बताने वाला कोई अध्यापक भी स्कूल में मौजूद नहीं था।




मामला सीतापुर की महोली तहसील के अंतर्गत आने वाले गुजिया गांव की प्राथमिक पाठशाला का है। जहां मीडिया कर्मी स्कूल पहुंचे तो सरकारी शिक्षा के स्तर की पोल खुलती नजर आई। आमतौर पर बच्चों में चाचा नेहरू के नाम से परचित कराए जाने वाले देश के महापुरूष और पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का नाम इस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के सामने एक पहेली के जैसा था।




इस स्कूल के बाल दिवस का दृश्य कुछ ऐसा था कि बच्चो स्कूल परिसर में लगे नल पर कपड़े उतार कर नहा रहे थे। बच्चों से पत्रकार ने जब पूछा कि चाचा नेहरू कौन थे तो बच्चे जमीन ताकते नजर आए। जब मास्टर जी के बारे में पूछा गया तो बच्चों ने तपाक से जवाब दिया कि रजिस्टर में दस्तखत बनाकर चले गए।

इसके बाद बच्चों ने स्कूल की पोल खोलना शुरू किया और कहने लगे कि स्कूल में अभी तक उन्हें थाली, कटोरी, चम्मच और गिलास भी नहीं मिला। कुछ एक ही बच्चे ऐसे थे जिन्होंने कहा कि हम पढ़ने आते हैं लेकिन मास्टर जी ने बताया ही नहीं कि चाचा नेहरू कौन है?




यह कहना गलत नहीं होगा कि जिस देश की ​प्राथमिक शिक्षा ही भ्रष्टाचार की बलि चढ़ रही हो उस देश में कालेधन पर चर्चा करना बेइमानी है। देश के लिए सबसे बड़ा धन कहलाने वाली नई पीढ़ी छोटी—छोटी जानकारियों के बिना आगे कैसे बढ़ेगी? जब तक हमारे देश के नौनिहालों का भविष्य शिक्षा व्यवस्था में मौजूद भ्रष्टाचार का शिकार होता रहेगा तब त​क देश के विकास की चर्चाएं करना, प्रदेश की तरक्की के खोखले दावों को गिनाना जनता को धोखे में रखने जैसा है।

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