योगी सरकार में मिड डे मील को लगी बुरी नजर, दो महीनों से नहीं पहुंचा बच्चों का राशन

योगी सरकार में मिड डे मील को लगी बुरी नजर, दो महीनों से नहीं पहुंचा बच्चों का राशन

लखनऊ। यूपी के कन्नौज जिले में पिछले 15 दिनों से प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों में मिड डे मील न पकने से बच्चे भूखे ही घर वापस लौट रहे हैं। बच्चे मास्टर जी से गणित का नहीं मिड डे मील का सवाल पूछते फिर रहे हैं। मास्टर जी ने भी समझा दिया है जब सरकार राशन भेजेगी तभी खाना मिलेगा। ये हाल कन्नौज जिले के अधिकांश स्कूलों का है जिम्मेदार मामले की जांच की बात कहकर खानापूर्ति कर रहे है।

कन्नौज जिले के इनदुइया ग्राम पंचायत का प्राथमिक विद्यालय के रजिस्टर में 150 से ज्यादा बच्चों के नाम दर्ज हैं। ये 150 गरीब बच्चे दोपहर के भोजन और सरकारी स्कूल से मिलने वाली अन्य सुविधाओं के लालच में शिक्षा के इस मन्दिर में आते हैं। लेकिन पिछले ​15 दिनों से मिड डे मील के लिए चूल्हा नहीं जला। मासूम भूखे पेट घर वापस लौटने को मजबूर हैं।

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स्कूल के हेड मास्टर की माने तो जिले भर के स्कूलों को पिछले 2 महीनों से मिड दे मील के लिए खाद्यान्न नहीं मिला। ग्राम प्रधानों ने अपनी क्षमता भर स्कूलों में खाना बनवाया लेकिन पिछले 15 दिन से ग्राम प्रधानों ने भी अपने हांथ खड़े कर दिए हैं। जिसके चलते स्कूलों में मिड डे मील बंद हो गया।

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वहीं इस स्कूल में रसोइये का काम करने वाली गंगा देवी और उषा देवी का कहना है कि 15 दिनों में वे दोनों हाजरी लगाने ही आतीं हैं। पकाने के लिए कुछ है नहीं इसलिए चूल्हा ठंडा पड़ा है और वे दोनों वहां बैठ कर अपनी ड्यूटी पूरी कर रहीं हैं।

इस मामले में जब ग्राम प्रधान से बात करने की कोशिश की गई तो उनके प्रतिनिधि बताया कि प्रधान ने अपनी जेब से जब तक क्षमता थी बच्चों को जैसा बन पड़ा मिड डे मील दिया। लेकिन अब मजबूरी में बंद करना पड़ा।

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जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अखंड प्रताप सिंह से इस विषय में सवाल किया गया तो वह पूरी तरह सरकारी ढर्रे पर नजर आए और जांच कराने की आश्वासन भर देकर बच निकले।

अब सवाल उठता है कि ये जिम्मेदारी किसकी है? कौन सुनिश्चित करेगा कि स्कूलों में मिड डे मील के नाम पर खिलवाड़ हो? आखिर इस ढर्रे पर चलकर सरकार कुपोषण मिटाने के लिए कितने दशक बिताएगी?

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