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नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर प्रदर्शनकारियों ने मोदी सरकार को दी धमकी

Prime Minister And Central Minister Not Be Allowed Enter Asaam Threatens

By रवि तिवारी 
Updated Date

नई दिल्ली। असम में नागरिकता विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन अभी तक नहीं थमा है। विधेयक को लेकर हो रहा विरोध गुरुवार को भी जारी रहा। छात्रों, वकीलों व डॉक्टरों ने समूचे राज्य में विधेयक के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। बता दें कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक को दो दिन पहले लोकसभा ने पारित कर दिया था। इस विधेयक के कानून बनने के बाद, धार्मिक अत्याचार के कारण बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से भागकर 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आने वाले गैर मुस्लिमों को भारतीय नागरिकता मिल जाएगी।

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असम में एक तरह का विशेष स्कार्फ हाथ में पकड़े लोगों ने यहां सचिवालय के सामने संकल्प दिवस मनाया और कहा कि यह विधेयक असमी लोगों के अस्तित्व के लिए खतरा है। उन्होंने चेताया कि अगर उनके हितों को नुकसान पहुंचाया गया तो ‘प्रधानमंत्री व उनके कैबिनेट सहयोगियों को’ राज्य में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। अपने 70 साझेदार संगठनों के साथ आंदोलन की अगुवाई कर रहे कृषक मुक्ति संग्राम समिति (केएमएसएस) ने बुधवार को संकल्प लिया था कि जब तक नागरिकता (संशोधन) विधेयक को वापस नहीं लिया जाता है, तब तक प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों को पूर्वोत्तर में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।

गुवाहाटी में सचिवालय के सामने हाथ में गमछा (असम में सम्मान के रूप में सिर पर बांधा जाने वाला गमोसा) लेकर संकल्प दिवस मनाया गया। लोगों ने विधेयक को असम के निवासियों के अस्तित्व पर खतरा कहा। गौहाटी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के जूनियर डॉक्टरों ने गुरुवार को काली पट्टी लगाकर काम किया। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के विधि विभाग ने सरकार के खिलाफ नारे लगाए। गुवाहाटी और राज्य के अन्य शहरों में कई शिक्षण संस्थानों के छात्र सड़कों पर उतरे।

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