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राज्यसभा में बोले प्रधानमंत्री मोदी: हमें एनसीपी और बीजेडी से सीखना चाहिए

Prime Minister Modi Said In Rajya Sabha We Should Learn From Ncp And Bjd

By बलराम सिंह 
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नई दिल्ली। संसद का शीतकालीन सत्र आज से शुरू हो गया है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 250वें सत्र में राज्यसभा को संबोधित करत हुए कहा कि स्थायित्व और विविधता इस सदन की सबसे बड़ी खासियत है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और बीजू जनता दल की तारीफ करते हुए कहा कि यह दो दल ऐसे हैं जिन्होंने खुद में यह अनुशासन तय किया है कि विरोध में वेल में नहीं जाएंगे। ऐसा करने से न तो हमारी राजनीति में कमी आई और न ही एनसीपी की। पीएम ने कहा कि हमें और तमाम पार्टियों को बीजेडी और एनसीपी से सीखना चाहिए कि वेल में न जाकर भी जनता का दिल जीता जा सकता है।

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राज्यसभा में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राज्य सभा के 250वें सत्र के दौरान मैं यहां उपस्थित सभी सांसदों को बधाई देता हूं। लेकिन 250 सत्रों की ये जो यात्रा चली है, उसमें जिन-जिन सांसदों ने योगदान दिया है वो सभी अभिनंदन के अधिकारी हैं। मैं उनका आदरपूर्वक स्मरण करता हूं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि 250 सत्र ये अपने आप में समय व्यतीत हुआ ऐसा नहीं है। एक विचार यात्रा रही। समय बदलता गया, परिस्थितियां बदलती गई और इस सदन ने बदली हुई परिस्थितियों को आत्मसात करते हुए अपने को ढालने का प्रयास किया। सदन के सभी सदस्य बधाई के पात्र हैं।

उन्होंने कहा कि भारत की विकास यात्रा में निचले सदन से जमीन से जुड़ी चीजों का प्रतिबिंब झलकता है, तो उच्च सदन से दूर दृष्टि का अनुभव होता है। इस सदन के दो खास पहलू हैं- पहला स्थायित्व, दूसरा विविधता। स्थायित्व इसलिए महत्वपूर्ण है कि लोकसभा तो भंग होती रहती है लेकिन राज्य सभा कभी भंग नहीं होती और विविधता इसलिए महत्वपूर्ण है कि क्योंकि यहां राज्यों का प्रतिनिधित्व प्राथमिकता है।’

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि राज्यसभा ने कई महत्वपू्र्ण विधेयक पास किए थे। उन्होंने कहा, ‘इस सदन का एक और लाभ भी है कि हर किसी के लिए चुनावी अखाड़ा पार करना बहुत सरल नहीं होता है, लेकिन देशहित में उनकी उपयोगिता कम नहीं होती है, उनका अनुभव, उनका सामर्थय मूल्यवान होता है। यदि हम राज्यसभा के 250वें सदन का विश्लेषण करें तो देखेंगे कि इसने कई विधेयकों को पास किया है जो आगे चलकर कानून बने हैं। जो देश में शासन को परिभाषित करते हैं।’

प्रधानमंत्री ने बताया कि कैसे सदन के कुछ लोगों ने शासन व्यवस्था में निरंकुशता नहीं आने दी। उन्होंने कहा कि सदन की परिपक्वता थी जिसने तीन तालाक बिल को पारित किया, जो महिला सशक्तिकरण में एक प्रमुख कदम था। इसr सदन ने भारत में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण पारित किया था। हमारे देश में एक लंबा कालखंड ऐसा था जब विपक्ष जैसा कुछ खास नहीं था। उस समय शासन में बैठे लोगों को इसका बड़ा लाभ भी मिला। लेकिन उस समय भी सदन में ऐसे अनुभवी लोग थे जिन्होंने शासन व्यवस्था में निरंकुशता नहीं आने दी। ये हम सबके लिए स्मरणीय है।’

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प्रधानमंत्री ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने हम लोगों को जो दायित्व दिया है, हमारी प्राथमिकता है कल्याणकारी राज्य लेकिन उसके साथ हमारी जिम्मेदारी है राज्यों का भी कल्याण। राज्य और केंद्र मिल करके देश को आगे बढ़ा सकते हैं।

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