नियमों की अनदेखी कर निजी आपरेटर डाल रहे हैं ओवरहेड और अंडरग्राउंड केबिल

cabel oprators
नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं निजी आपरेटर, अफसरों की मिलभगत से डाल रहे हैं ओवरहेड और अंडरग्राउंड केबिल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में निजी केबल आपरेटर नियमों की ​धज्जियां उड़ा रहे हैं। अफसरों से मिलीभगत करके बेधड़क तरीके से ओवरहेड और अंडरग्राउंड केबिल डालने में जुटे हैं। केबिल आपरेटरों के इस कार्य से सरकारी राजस्व को क्षति पहुंच रही है लेकिन अफसरों की मेहरबानी इन पर जारी है। सूत्रों की माने तो केबिल आपरेटर नगर निगम से सांठगांठ करके यह काम कर रहे हैं। इसको लेकर हाईकोर्ट ने लखनऊ नगर निगम को फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने पूछा है कि किस कानून के तहत निजी अपापरेटर केबिल डाल रहे हैं।

Private Cabal Operator Breaking The Rules :

सूत्रों की माने तो ओवरहेड केबिल डालने में निजी आपरेटर बड़ा खेल कर रहे हैं। नगर निगम के अफसरों से मिलीभगत करके वह कुछ दूरी का परमिशन लेकर शहर के ज्यादातर हिस्सों में केबिल डाल दे रहे हैं। निजी आपरेटरों और अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी राजस्व को क्षति पहुंच रही है। सूत्रों की माने तो ओवरहेड के साथ ही आपरेटर अंडरग्राउंड केबिल डालने के लिए भी विभाग का परमिशन नहीं ले रहे हैं। वह बेधड़क होकर सड़कों की खुदाई करके केबिल डाल रहे हैं।

यह सब देखने के बाद भी ​संबंधित विभाग आंखे बंद किये हुए है। रोड़ कटिंग को लेकर सख्त नियम ​बने हैं लेकिन निजी कंपिनयों के ठेकेदार अफसरों और इंजीनियरों से मिलीभगत करके इसका माखौल उड़ा रहे हैं। एक ओर नई सड़कें बिना अनुमति के खोद दी जा रही हैं और इनकी मरमत भी नहीं हो रही है। बारिश के कारण रोड कटिंग पर रोक लगा दी गयी है। इसके बावजूद लखनऊ समेत कई जिलों में निजी आपरेटरों की मनमानी जारी है।

हाईकोर्ट ने पूछा, किस नियम के तहत डाले जा रहे हैं केेबिल
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में राजधानी की साफ सफाई को लेकर कचरे, आवारा पशुओं, पॉलिथीन के इस्तेमाल आदि से मुफ्त कराने के लिए सुनवाई हो रही है। इस दौरान न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति आलोक माथुर की खंडपीठ ने नगर आयुक्त इंद्रमणि त्रिपाठी से पूछा कि शहर में किस कानून के तहत निजी आपरेटर के कबिल डाले जा रहे हैं। नगर आयुक्त को हलफनामे पर जवाब देना होगा। इसके साथ ही उन्हें जरूरी दस्तावेज भी संग्लन करने होंगे।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में निजी केबल आपरेटर नियमों की ​धज्जियां उड़ा रहे हैं। अफसरों से मिलीभगत करके बेधड़क तरीके से ओवरहेड और अंडरग्राउंड केबिल डालने में जुटे हैं। केबिल आपरेटरों के इस कार्य से सरकारी राजस्व को क्षति पहुंच रही है लेकिन अफसरों की मेहरबानी इन पर जारी है। सूत्रों की माने तो केबिल आपरेटर नगर निगम से सांठगांठ करके यह काम कर रहे हैं। इसको लेकर हाईकोर्ट ने लखनऊ नगर निगम को फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने पूछा है कि किस कानून के तहत निजी अपापरेटर केबिल डाल रहे हैं। सूत्रों की माने तो ओवरहेड केबिल डालने में निजी आपरेटर बड़ा खेल कर रहे हैं। नगर निगम के अफसरों से मिलीभगत करके वह कुछ दूरी का परमिशन लेकर शहर के ज्यादातर हिस्सों में केबिल डाल दे रहे हैं। निजी आपरेटरों और अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी राजस्व को क्षति पहुंच रही है। सूत्रों की माने तो ओवरहेड के साथ ही आपरेटर अंडरग्राउंड केबिल डालने के लिए भी विभाग का परमिशन नहीं ले रहे हैं। वह बेधड़क होकर सड़कों की खुदाई करके केबिल डाल रहे हैं। यह सब देखने के बाद भी ​संबंधित विभाग आंखे बंद किये हुए है। रोड़ कटिंग को लेकर सख्त नियम ​बने हैं लेकिन निजी कंपिनयों के ठेकेदार अफसरों और इंजीनियरों से मिलीभगत करके इसका माखौल उड़ा रहे हैं। एक ओर नई सड़कें बिना अनुमति के खोद दी जा रही हैं और इनकी मरमत भी नहीं हो रही है। बारिश के कारण रोड कटिंग पर रोक लगा दी गयी है। इसके बावजूद लखनऊ समेत कई जिलों में निजी आपरेटरों की मनमानी जारी है। हाईकोर्ट ने पूछा, किस नियम के तहत डाले जा रहे हैं केेबिल इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में राजधानी की साफ सफाई को लेकर कचरे, आवारा पशुओं, पॉलिथीन के इस्तेमाल आदि से मुफ्त कराने के लिए सुनवाई हो रही है। इस दौरान न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति आलोक माथुर की खंडपीठ ने नगर आयुक्त इंद्रमणि त्रिपाठी से पूछा कि शहर में किस कानून के तहत निजी आपरेटर के कबिल डाले जा रहे हैं। नगर आयुक्त को हलफनामे पर जवाब देना होगा। इसके साथ ही उन्हें जरूरी दस्तावेज भी संग्लन करने होंगे।