अस्पताल की मनमानी: गर्भवती महिला और बच्चे की मौत के बाद थमाया 18 लाख का बिल

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अस्पताल की मनमानी: गर्भवती महिला और बच्चे की मौत के बाद थमाया 18 लाख का बिल

नई दिल्ली। निजी अस्पतालों के लिए मरीज ब्लैंक चैक बन चुके हैं। एक बार ​हत्थे चढ़े मरीज को इस हद तक लूटा जाता है कि उसका घर मकान और दुकान सब बिक जाता है। अस्पताल की इस लूट के बाद भी मरीज चमकदार अस्पतालों से सही सलामत वापस लौट आए तो मानिए की आप पर ईश्वर की असीम कृपा है।

ताजा मामला दिल्ली से सटे फरीदाबाद के एशियन हॉस्पिटल में सामने आया है। हरियाणा के फरीदाबाद शहर के सबसे मंहगे अस्पतालों में से एक इस अस्पताल में जहां सात माह की गर्भवती 20 वर्षीय श्वेता 13 दिसंबर को बुखार की समस्या बताकर भर्ती किया गया था। अस्पताल के डॉक्टर ने गर्भ में पल रहे बच्चे की मृत्यु को बुखार का कारण बताते हुए आॅपरेशन की बात कही थी। श्वेता की जान बचाने के लिए परिजनों ने रजामंदी दे दी, तो डॉक्टरों ने तुरंत ही साढ़े तीन लाख जमा करवाने को कह दिया।

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साढ़े तीन लाख रुपए अचानक से जुगाड़ करने में परिजनों को समय लगा तो उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से आॅपरेशन करवाने की गुजारिश की, लेकिन अस्पताल ने अपने नियमों का हवाला देते हुए बिना एडवांस आॅपरेशन न करने की मजबूरी जाहिर कर दी। रुपए जमा करवाने के लिए महिला के परिजनों ने इधर उधर हाथ पांव मारे लेकिन जब तक रकम जमा करवाई बहुत देर हो चुकी थी। महिला के गर्भ में मौजूद मृत बच्चे से हुए संक्रमण ने उसकी हालत को गंभीर बना दिया।

आनन फानन में डॉक्टरों ने आॅपरेशन किया और महिला को आईसीयू में भर्ती कर दिया। करीब 22 दिन अस्पताल में भर्ती रहने के बाद महिला की मृत्यु हो गई। जिसके बाद अस्पताल मृतका के परिजनों के सामने 18 लाख का बिल भरने के बाद ही शव देने की शर्त रख दी।

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मृतका के पिता का कहना है कि अस्पताल की लापरवाही के चलते ही गर्भस्थ बच्चे की मृत्यु हुई थी, जिसके बाद भी अस्पताल ने अपनी गलती सुधारने के बजाय उनकी बेटी के इलाज में भी ढ़िलाई बरती। अब 18 लाख रुपए का फर्जी बिल पकड़ा दिया है। उनकी सरकार से मांग है कि अस्पताल के खिलाफ इस बात की जांच करवाई जाए कि आखिर 22 दिनों के इलाज में उन्होंने ऐसा कौन सा ​इलाज किया जिसमें 18 लाख खर्च होने के बाद भी मरीज की मौत हो गई।

वहीं अस्पताल के प्रबंधकों का कहना है कि मरीज गर्भवती होने के साथ ही टाइफाइड से ग्रसित थी। 10 से 15 दिनों की बीमारी के बाद उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। अस्पताल के डॉक्टरों ने महिला और बच्चे को बचाने की पूरी कोशिश की लेकिन बच्चे की मौत हो गई। इलाज की पूरी जानकारी परिजनों की दी गई थी। परिजनों की जानकारी में ही मरीज का आॅपरेशन किया गया था, लेकिन उसकी आंत में छेद होने के कारण वह संक्रमण का शिकार हो गई। काफी प्रयास करने के बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका।

आपको बता दें यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले साल ही ​हरियाणा के ही गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में भी एक ऐसा ही मामला सामने आया था, जिसमें डेंगू पीड़ित बच्ची के इलाज के लिए 16 लाख रुपए लेने के बाद भी यह नामी अस्पताल बच्ची की जान को नहीं बचा सका था। बेटी की मौत के बाद पीड़ित पिता ने अस्पताल के बिल को पेश करते हुए अस्पताल की मनमानी का पर्दाफाश किया था।

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नई दिल्ली। निजी अस्पतालों के लिए मरीज ब्लैंक चैक बन चुके हैं। एक बार ​हत्थे चढ़े मरीज को इस हद तक लूटा जाता है कि उसका घर मकान और दुकान सब बिक जाता है। अस्पताल की इस लूट के बाद भी मरीज चमकदार अस्पतालों से सही सलामत वापस लौट आए तो मानिए की आप पर ईश्वर की असीम कृपा है। ताजा मामला दिल्ली से सटे फरीदाबाद के एशियन हॉस्पिटल में सामने आया है। हरियाणा के फरीदाबाद शहर के सबसे मंहगे…
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