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कोरोना काल में प्रसव के नाम पर लूट रहे निजी नर्सिंग होम

Private Nursing Homes Looted In The Name Of Childbirth During The Corona Period

By टीम पर्दाफाश 
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शिवपुरी: शहर में एक ओर जहां कोरोना काल के कारण आमजन की कारोबार और व्यापार के नाम पर कमर टूटी हुई है तो वहीं दूसरी ओर कोरोना काल में ही कोरोना फाईटर्स का तमगा हासिल करने वाले चिकित्सकीय ही मानवीय संवेदनाऐं ना समझे तो इसे क्या कहिएगा, क्योंकि बुधवार को एक प्रसूता ने निजी अस्पताल में सामान्य रूप से स्वस्थ शिशु को जन्म दिया लेकिन जब उसे डिस्चार्ज करने बारी आई तो अस्पताल प्रबंधन द्वारा मनमाना डिस्चार्ज बिल थमा दिया गया जिसमें दवाऐं भी अलग से शामिल होना बताई गई। यहां सरेआम कोरोना काल में भी निजी नर्सिंग होम संचालक अपनी मनमानीयां बदस्तूर जारी किए हुए है उन्हीं में शामिल है शहर के सदर बाजार में संचालित कविता नर्सिंग होम जिसने एक मरीज से सामान्य प्रसव होने के बाबजूद भी जबरन 20 हजार रूपये की मांग कर डाली और ना देने की स्थिति में प्रसूता व परिजनों को जाने से भी इंकार कर दिया।

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ऐसे में जैसे-तैसे परिजनों और अपने संभव प्रयासों के माध्यम से उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से चर्चा कर राशि 15 हजार रूपये दी तब कहीं जाकर प्रसूता और उसके नवजात शिशु को घर जाने दिया अन्यथा एक तरह से इस निजी नर्सिंग होम ने तो उन्हें बंधक ही बना दिया था। ऐसे में कहां गई इंसानियत और मानवता जो सरेआम कोरोना फाईटर्स के नाम पर चिकित्सक अपनी मोटी जेंबें मनमाने बिलों के नाम पर भर रहे है और तो और मरीजों के उपचार के नाम पर जबरन से पैसा वसूल कर रहे है। शहर के हाथीखाना, पोहरी रोड़, न्यू ब्लॉक, विष्णु मंदिर के समीप ऐसे ही निजी नर्सिंग होम संचालित है जहां आने वाली प्रसूता के साथ रेट फिक्स कर शोषण का खेल जारी है।

ऐसा नहीं है कि शहर का कविता नर्सिग होम ही अकेला ऐसा हॉस्पिटल है जहां प्रसव के नाम पर अच्छी खासी रकम वसूली जा रही है बल्कि शहर में अनेकों निजी हॉस्पिटल भी मौजूद है जो प्रसूताओं को भर्ती तो कर लेते है और जब यहां भर्ती होते है तो उन्हें पहले ही बता दिया जाता है कि सामान्य प्रसव होने पर 15 हजार रूपये जबकि ऑपरेशन से प्रसव होता है तो उसके लिए 25 हजार रूपये देने होंगें।

इस तरह रेट फिक्स कर निजी नर्सिंग होम अपना व्यापार तो चमका रहे है लेकिन दूसरी ओर गरीबों की हाय लेने का काम भी वह कर रहे है क्योंकि कई गरीब परिवार अपने हालातों के मद्देनजर एक ओर जहां कोरोना के चलते अस्पताल जाने से डर रहे है तो दूसरी ओर वह निजी अस्पताल में पहुंचकर प्रसूताओं का प्रसव कराने को मजबूर है और जब यह राशि उन्हें देनी होती है तो इसके लिए वह बाजार या मिलने वालों से उधार पैसा लाकर इनकी पूर्ति करते है। ऐसे में उन गरीबों की हाय लेने का काम भी यह निजी हॉस्पिटल कर रहे है।

देखा जाए तो शासन की ओर से जिला अस्पताल में भर्ती होने वाली प्रसूताओं को ना केवल प्रसव उपरांत राशि प्रदाय की जाती है बल्कि कन्या होने पर प्रोत्साहन राशि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को भी मिलती है। लेकिन इन दिनों कोरोना काल के डर के कारण अधिकांश लोग निजी अस्पताल में ही अपने परिजनों का प्रसव कराने में भलाई समझ रहे है क्योंकि सरकारी अस्पताल में भी प्रसूता कोरोना संक्रमण के रूप में सामने आ चुकी है ऐसे में एक मरीज से पूरा परिवार प्रभावित होता है और इसे ध्यान में रखते हुए कई लोग सरकारी अस्पताल के बजाए निजी नर्सिंग होम पर ही प्रसव करा रहे है और सरकारी अस्पताल से दूरी बनाकर चल रहे है।

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हालांकि वह निजी नर्सिंग होमों पर शोषण का शिकार हो रहे है क्योंकि इन निजी नर्सिंग होम संचालकों ने प्रसव के लिए अपनी तय राशि फिक्स कर रखी है ऐसे में आमजन का शोषण सरेआम होता है और यह नर्सिंग होम संचालक कोरोना काल में भी अपने कर्तव्य के प्रति सामान्य रवैया नहीं रखते और केवल मरीजों से पैंसा ऐंठने का काम ही करते रहते है।

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