कैटेलोनिया में अपदस्थ राष्ट्रपति की गिरफ्तारी के बाद विरोध प्रदर्शन

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कैटेलोनिया में अपदस्थ राष्ट्रपति की गिरफ्तारी के बाद विरोध प्रदर्शन
बार्सिलोना। कैटेलोनिया के अपदस्थ राष्ट्रपति कार्ल्स पुइगडेमोंट की जर्मनी में गिरफ्तारी के बाद स्पेन के इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। कैटेलोनिया के पूर्व राष्ट्रपति के वकील ने कहा कि उन्हें जर्मनी के न्यूमनस्टर में एक पुलिस थाने में हिरासत में रखा गया गया है। उन्हें फिनलैंड से बेल्जियम लौटते समय रविवार को गिरफ्तार किया गया। स्पेन की न्यायपालिका द्वारा कैटेलोनिया में अलगाववादी जनमत संग्रह आयोजित करने और उसके बाद इसकी आजादी की घोषणा…

बार्सिलोना। कैटेलोनिया के अपदस्थ राष्ट्रपति कार्ल्स पुइगडेमोंट की जर्मनी में गिरफ्तारी के बाद स्पेन के इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। कैटेलोनिया के पूर्व राष्ट्रपति के वकील ने कहा कि उन्हें जर्मनी के न्यूमनस्टर में एक पुलिस थाने में हिरासत में रखा गया गया है। उन्हें फिनलैंड से बेल्जियम लौटते समय रविवार को गिरफ्तार किया गया। स्पेन की न्यायपालिका द्वारा कैटेलोनिया में अलगाववादी जनमत संग्रह आयोजित करने और उसके बाद इसकी आजादी की घोषणा करने में उनकी भूमिका की जांच की घोषणा के बाद वह अक्टूबर में देश छोड़ कर बेल्जियम भाग गए थे।

काएल सिटी आपराधिक पुलिस के एक प्रवक्ता ने सूत्रों से कहा कि पुइगडेमोंट को जर्मनी से डेनमार्क को जोड़ने वाले एक मार्ग पर सुबह 11.19 बजे गिरफ्तार किया गया। पुइगडेमोंट को सोमवार को जर्मनी की एक अदालत में पेश किया जाएगा। न्यायिक सूत्रों ने कहा कि जर्मनी के पास इस पर फैसला करने के लिए 90 दिनों से ज्यादा का समय है कि पुइगडेमोंट को स्पेन को प्रत्यर्पित किया जाए या नहीं। हालांकि वह इस कदम का विरोध कर रहे हैं क्योंकि उनका मानना है कि वहां उनकी निष्पक्ष सुनवाई नहीं की जाएगी।

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सूत्रों के मुताबिक, पुइगडेमोंट की गिरफ्तारी को लेकर सबसे बड़ा प्रदर्शन बार्सिलोना में हुआ, जहां 55,000 से ज्यादा आजादी के समर्थक प्रदर्शनकारी रविवार को सड़कों पर निकल आए। इन प्रदर्शनकारियों ने हाथों में कैटेलोनिया के झंडे व बैनर थामे हुए थे।

सूत्रों के मुताबिक, गिरोना, तारागोना व लेइडा में भी प्रदर्शन किए गए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने ने कई जगहों पर सड़कों को जाम कर दिया। इस बीच कैटेलोनिया में तनाव चरम पर है। स्पेन में उन पर राजद्रोह और विद्रोह के आरोप साबित होते हैं तो उन्हें जेल में 30 साल बिताने पड़ सकते हैं।

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