कल शाम 5 बजे तक बहुमत साबित करें कमलनाथ – सुप्रीम कोर्ट

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कल शाम 5 बजे तक बहुमत साबित करें कमलनाथ - सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के राजनीतिक घटनाक्रम पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कल मध्य प्रदेश विधानसभा का सत्र फिर से बुलाया जाए। अदालत ने कहा कि कमलनाथ सरकार कल शाम 5 बजे बहुमत हासिल करे। सुप्रीम कोर्ट ने सदन की कार्यवाही का वीडियोग्राफी कराने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बागी विधायकों की सुरक्षा सुनिश्चित कराई जाए।

Prove Majority By 5 Pm Tomorrow Kamal Nath Supreme Court :

एक लाइन का होना चाहिए इस्तीफा: SC

सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि एक बात बहुत स्पष्ट है कि विधायक सभी एक साथ कार्य कर रहे हैं। यह एक राजनैतिक ब्लॉक हो सकता है। हम कोई भी अर्थ नहीं निकाल सकते। वहीं जस्टिस हेमंत गुप्ता ने कहा कि संसद या विधानसभा के सदस्यों को विचार की कोई स्वतंत्रता नहीं है। वे व्हिप से संचालित होते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नियम के मुताबिक इस्तीफा एक लाइन का होना चाहिए।

एक विकल्प राज्यपाल अपनी रिपोर्ट केंद्र को दें: SC  

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक सिद्धांत जो उभरता है, उसमें अविश्वास मत पर कोई प्रतिबंध नहीं है, क्योंकि स्पीकर के समक्ष इस्तीफे या अयोग्यता का मुद्दा लंबित है। इसलिए हमें यह देखना होगा कि क्या राज्यपाल उसके साथ निहित शक्तियों से परे काम करें या नहीं। एक अन्य सवाल है कि अगर स्पीकर राज्यपाल की सलाह को स्वीकार नहीं करता है तो राज्यपाल को क्या करना चाहिए। एक विकल्प है कि राज्यपाल अपनी रिपोर्ट केंद्र को दें।

 

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के राजनीतिक घटनाक्रम पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कल मध्य प्रदेश विधानसभा का सत्र फिर से बुलाया जाए। अदालत ने कहा कि कमलनाथ सरकार कल शाम 5 बजे बहुमत हासिल करे। सुप्रीम कोर्ट ने सदन की कार्यवाही का वीडियोग्राफी कराने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बागी विधायकों की सुरक्षा सुनिश्चित कराई जाए। एक लाइन का होना चाहिए इस्तीफा: SC सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि एक बात बहुत स्पष्ट है कि विधायक सभी एक साथ कार्य कर रहे हैं। यह एक राजनैतिक ब्लॉक हो सकता है। हम कोई भी अर्थ नहीं निकाल सकते। वहीं जस्टिस हेमंत गुप्ता ने कहा कि संसद या विधानसभा के सदस्यों को विचार की कोई स्वतंत्रता नहीं है। वे व्हिप से संचालित होते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नियम के मुताबिक इस्तीफा एक लाइन का होना चाहिए। एक विकल्प राज्यपाल अपनी रिपोर्ट केंद्र को दें: SC   सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक सिद्धांत जो उभरता है, उसमें अविश्वास मत पर कोई प्रतिबंध नहीं है, क्योंकि स्पीकर के समक्ष इस्तीफे या अयोग्यता का मुद्दा लंबित है। इसलिए हमें यह देखना होगा कि क्या राज्यपाल उसके साथ निहित शक्तियों से परे काम करें या नहीं। एक अन्य सवाल है कि अगर स्पीकर राज्यपाल की सलाह को स्वीकार नहीं करता है तो राज्यपाल को क्या करना चाहिए। एक विकल्प है कि राज्यपाल अपनी रिपोर्ट केंद्र को दें।