NPA ने तोड़ी बैंकों की कमर, पिछले साल के मुकाबले 50 गुना ज्यादा का घाटा

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NPA ने तोड़ी बैंकों की कमर, पिछले साल के मुकाबले 50 गुना ज्यादा का घाटा

Public Sector Banks Loss 50 Times Higher In June Quarter

नई दिल्ली। जून तिमाही में सरकारी बैंकों को पिछले साल के मुकाबले 50 गुना से ज्यादा का घाटा हुआ है। इसकी मुख्य वजह कर्ज की रकम वापस नहीं होने के कारण होने वाली प्रोविजनिंग लगातार बढ़ते रहना है। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 21 पब्लिक सेक्टर बैंकों का कुल घाटा बढ़कर 16,600 करोड़ हो गया, जो सालभर पहले सिर्फ 307 करोड़ था। इसका पता रेग्युलेटरी फाइलिंग के डेटा से चला है।

इससे पता चलता है कि किस कदर एनपीए ने मोदी सरकार में बैंकों की कमर तोड़ कर रख दी है। इस घाटे ने बैंकिंग जगत के सामने नई चुनौतियां और समस्याएं पेश की हैं। इससे आर्थिक गतिविधियों के भी प्रभावित होने की आशंका है। इकरा के ग्रुप हेड फाइनैंशल सेक्टर रेटिंग्स कार्तिक श्रीनिवासन ने कहा, “हमारा मानना है कि एनपीए पीक पर पहुंचने वाला है और इस साल के अंत तक एनपीए का लेवल घटता नजर आ सकता है। आरबीआई ने एनसीएलटी भेजे जानेवाले लोन अकाउंट्स के रेजॉलुशन की टाइमलाइन 6 से 9 महीने के बीच तय की है। अगर देरी भी होती है तो फाइनैंशल इयर के अंत तक रेजॉलुशन हो ही जाएंगे।”

एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने भी माना है कि मुसीबत अभी खत्म नहीं हुई है। उन्होंने कहा,”सितंबर में हम प्रविजन कवरेज रेशियो बढ़ाना चाहते हैं ताकि दिसंबर में हमें पीछे मुड़कर देखना नहीं पड़े और पिछले एनपीए का घाव बचा नहीं रहे।”

रुपये में गिरावट से बढ़ेगा आम आदमी के किचन का बजट-

बताते चलें कि डॉलर के मुक़ाबले रुपये में लगातार गिरावट का दौर गुरुवार तक जारी रहा। करेंसी मार्केट में रुपये ने डॉलर की तुलना में अब तक के सबसे निचले स्तर 70.32 को छुआ। रुपये की गिरावट अब आम आदमी के किचन के बजट पर नेगेटिव असर डालने जा रही है। इससे ऑयल इंपोर्ट बिल बढ़ेगा और रिटेल में पेट्रोल-डीजल महंगा होंगे। साथ में रसोई गैस सिलिंडर के दाम में बढ़ोतरी का भार सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। यानी महंगाई फिर से तेजी के साथ फन उठाएगी।

नई दिल्ली। जून तिमाही में सरकारी बैंकों को पिछले साल के मुकाबले 50 गुना से ज्यादा का घाटा हुआ है। इसकी मुख्य वजह कर्ज की रकम वापस नहीं होने के कारण होने वाली प्रोविजनिंग लगातार बढ़ते रहना है। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 21 पब्लिक सेक्टर बैंकों का कुल घाटा बढ़कर 16,600 करोड़ हो गया, जो सालभर पहले सिर्फ 307 करोड़ था। इसका पता रेग्युलेटरी फाइलिंग के डेटा से चला है। इससे पता चलता है कि किस कदर…