चमत्कारी पत्थर पुखराज, रातों रात बदल सकता है अपकी किस्मत

चमत्कारी पत्थर पुखराज, रातों रात बदल सकता है अपकी किस्मत

ज्योतिष शास्त्र एक पुरातन विज्ञान है, एक ऐसा विज्ञान जो ग्रहों की चाल को देखकर भविष्य के पर्दे की पीछे छुपी जिन्दगी को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। ज्योतिष में भविष्य को बदलने के रास्ते भी छुपे है, हम यह दावा नहीं करते कि आप भविष्य को पूरी तरह से बदल सकते हैं लेकिन इतना जरूर है कि बुरे समय के प्रभाव को कम किया जा सकता है और अच्छे समय का भरपूर लाभ उठाया जा सकता है।

ज्योतिष में भविष्य को प्रभावित करने के लिए रत्नों का बड़े स्तर पर सहारा लिया जाता है। ये रत्न चमत्कारी प्रभाव रखते हैं। ऐसा ही एक चमत्कारी रत्न है पुखराज। जिसे देवताओं के गुरु बृहस्पति की कृपा बढ़ाने वाला रत्न माना जाता है। सीधे शब्दों में कहा जाए तो यह रत्न हमारे जीवन पर बृहस्पति गृह की स्थिति से होने वाले प्रभावों पर यह सकारात्मक प्रभाव डालता है।

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ज्योतिष के जानकारों के मुताबिक पुखराज सकारात्मक ऊर्जा का श्रोत है। जो व्यक्ति इसे धारण करता है उसके व्यक्तित्व में चमत्कारी बदलाव देखने को मिलते हैं। व्यक्ति का स्वास्थ्य बेहतर रहता है और उसके भीतर सकारात्मक ऊर्जा का स्तर बढ़ता है जो आत्मबल को बढ़ाती है। आर्थिक संपन्नता और प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले लोगों के लिए पुखराज बेहद लाभदायक माना जाता है। जिन लोगों के विवाह में समस्या आ रही है या फिर वैवाहिक जीवन में कष्ट आ रहे हैं उन्हें भी पुखराज धारण करने से सकारात्मक परिणाम मिलते हैं।

पुखराज खास तौर पर ऐसे लोगों को धारण करना चाहिए जो अपने जीवन में कठिन परिश्रम करते हैं और जोखिम लेने के बाद भी वो सफलता नहीं प्राप्त कर पाते जो उनसे कम प्रयास वालों को प्राप्त होती है। ज्योतिष के अनुसार ऐसे लोगों की जन्म कुंडली में गुरु की स्थिति कमजोर होती है। जिस वजह से सफलता हमेशा कम ही मिलती है, बड़ा जोखिम लेने के बाद भी लाभ नहीं होता। ऐसे लोगों की सफलता किसी असफलता की तरह ही होती है।

ज्योतिष के अनुसार जिन लोगों का गुरु कमजोर होता है उन्हें पुखराज धारण करना चाहिए। पुखराज कमजोर गुरु को बल प्रदान करता है, जिसके प्रभाव स्वरूप व्यक्ति को अच्छे परिणाम मिलते हैं।

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पुखराज खरीदने में इन बातों का रखें ध्यान —

पुखराज एक ऐसा रत्न है जो मंहगा माना जाता है। आम तौर पर इसे रत्ती के हिसाब से धारण किया जाता है। ज्योतिष के अनुसार कम से कम चार रत्ती और अधिकतम सवा सात रत्ती का पुखराज ही धारण करना चाहिए। बेहतर सलाह के लिए आप किसी जानकार ​ज्योतिषी से संपर्क कर सकते हैं।

यदि आप पुखराज खरीदना चाहते हैं तो कुछ बातों को ध्यान रखना चाहिए। जैसे आपको कौन सा पुखराज धारण करना है पीला या सफेद। आमतौर पर गुरु की कृपा के लिए पीला पुखराज धारण किया जाता है। पुखराज के भीतर जितनी परदर्शिता होती है उसकी कीमत उतनी ही ज्यादा होती है। भारत में मिलने वाला पुखराज अधिकतम 5,000 हजार रुपए रत्ती तक मिल जाता है, लेकिन भारतीय पुखराज की ग्रेविटी कम होने की वजह से इसे बेहतर नहीं माना जाता।

अगर आपको अच्छे परिणाम चाहते हैं तो आपको श्रीलंका के सिलोन की खानों से आने वाले पुखराज को धारण करना चाहिए, लेकिन इसकी कीमत भारतीय पुखराज से कहीं ज्यादा होती है। यह आपको 10 हजार रुपए रत्ती से लेकर 1,50,000 रुपए रत्ती तक मिलता है। जिसकी ग्रेविटी दुनिया की दूसरी खदानों से निकलने वाले पुखराज से बेहतर होती है। चाइनीज पुखराज भूल कर भी न धारण करें। आजकल बाजार में चाइनीज पुखराज भी चलन में है जो दिखने में बेहतर और कीमत में सस्ता होता है। इसलिए सस्ते के चक्कर में अपना नुकसान न करें।

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कब और कैसे धारण करें —

ज्योतिषी की सलाह पर अपनी जरूरत और जेब के अनुसार ही पुखराज को सोने या चांदी की अंगूठी के साथ दाएं हाथ की तर्जनी में धारण करें। तरजनी के निचले हिस्से में गुरु पर्वत का स्थान माना जाता है। बच्चों को पैंडेंट के रूप में गले में धारण करवा सकते हैं।

पुखराज को धारण करने का सही दिन गुरुवार है और सूर्योदय के बाद दोपहर से पहले इस रत्न को धारण करने का सबसे उचित समय माना गया है। पुखराज को धारण करने से पहले उसे गंगाजल और गाय के दूध में धोने के बाद घर में पूजा के स्थान पर रखकर इस विश्वास के साथ धारण करना चाहिए कि आप पूरी आस्था के साथ अपने जीवन में परिवर्तन लाने के लिए इस ​दैवीय गुण वाले रत्न को धारण कर रहे है। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि हम जिस भावना के साथ कोई पहल करते हैं, उसके परिणाम पर उस भावना का प्रभाव पड़ता है।

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