केरल की राह पर चली पंजाब सरकार, CAA के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पास

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केरल की राह पर चली पंजाब सरकार, CAA के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पास

नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून को लेकर मोदी सरकार की सारी विपक्षी पार्टियां एकजुट नजर आ रही है। जहां केरल विधानसभा में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर प्रस्ताव पारित करवाया गया था वहीं अब पंजाब की कैप्टन सरकार ने भी इस कानून के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पारित करवा लिया है। आपको बता दें कि केरल सरकार इस कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर कर चुकी है।

Punjab Government On Keralas Path Resolution Passed In Ca Against Caa :

पंजाब विधानसभा में जैसे ही CAA के खिलाफ प्रस्ताव पारित हुआ तो वो केरल के बाद ऐसा करने वाला वह दूसरा राज्य बन गया। पंजाब सरकार के मंत्री ब्रह्म मोहिंद्रा ने दो दिवसीय विधानसभा सत्र के दूसरे दिन इस कानून के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया। मोहिंद्रा ने इस प्रस्ताव को पढ़ते हुए कहा, ‘संसद की ओर से पारित सीएए से देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए और इससे लोगों में काफी गुस्सा है और सामाजिक अशांति पैदा हुई है। इस कानून के खिलाफ पंजाब में भी विरोध प्रदर्शन हुआ जो कि शांतिपूर्ण था और इसमें समाज के सभी तबके के लोगों ने हिस्सा लिया था।

बता दें कि गुरूवार को जब पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से पूछा गया था तो उन्होने इंतजार करने की बात कही थी साथ यह भी कहा था कि उनकी सरकार विभाजनकारी सीएए को लागू नहीं करने देगी। बता दें कि पंजाब से पहले केरल विधानसभा में भी सीएए के खिलाफ एक प्रस्ताव पास किया गया था। प्रस्ताव पेश करते हुए मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा था कि सीएए धर्मनिरपेक्ष नजरिए और देश के ताने बाने के खिलाफ है तथा इसमें नागरिकता देने में धर्म के आधार पर भेदभाव होगा। यह कानून संविधान के आधारभूत मूल्यों और सिद्धांतों के विरोधाभासी है।

नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून को लेकर मोदी सरकार की सारी विपक्षी पार्टियां एकजुट नजर आ रही है। जहां केरल विधानसभा में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर प्रस्ताव पारित करवाया गया था वहीं अब पंजाब की कैप्टन सरकार ने भी इस कानून के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पारित करवा लिया है। आपको बता दें कि केरल सरकार इस कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर कर चुकी है। पंजाब विधानसभा में जैसे ही CAA के खिलाफ प्रस्ताव पारित हुआ तो वो केरल के बाद ऐसा करने वाला वह दूसरा राज्य बन गया। पंजाब सरकार के मंत्री ब्रह्म मोहिंद्रा ने दो दिवसीय विधानसभा सत्र के दूसरे दिन इस कानून के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया। मोहिंद्रा ने इस प्रस्ताव को पढ़ते हुए कहा, ‘संसद की ओर से पारित सीएए से देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए और इससे लोगों में काफी गुस्सा है और सामाजिक अशांति पैदा हुई है। इस कानून के खिलाफ पंजाब में भी विरोध प्रदर्शन हुआ जो कि शांतिपूर्ण था और इसमें समाज के सभी तबके के लोगों ने हिस्सा लिया था। बता दें कि गुरूवार को जब पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से पूछा गया था तो उन्होने इंतजार करने की बात कही थी साथ यह भी कहा था कि उनकी सरकार विभाजनकारी सीएए को लागू नहीं करने देगी। बता दें कि पंजाब से पहले केरल विधानसभा में भी सीएए के खिलाफ एक प्रस्ताव पास किया गया था। प्रस्ताव पेश करते हुए मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा था कि सीएए धर्मनिरपेक्ष नजरिए और देश के ताने बाने के खिलाफ है तथा इसमें नागरिकता देने में धर्म के आधार पर भेदभाव होगा। यह कानून संविधान के आधारभूत मूल्यों और सिद्धांतों के विरोधाभासी है।