60 करोड़ किसानों की बजाय सिर्फ उद्योगपतियों का माफ हो रहा कर्ज, छलावा निकला सबका साथ सबका विकास का नारा

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RBI ने जारी किया आदेश, कैश ट्रांसफर सेवा के लिए बढ़ाया समय

नई दिल्ली। सरकार एक ओर जहां बैंकों को टैक्स देने वाले लोगों के पैसे मुहैया कराकर डूबने से बचाने में जुटी है, वहीं पिछले कुछ सालों में बड़े पैमाने पर कर्जों को माफ किया गया है. हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बताया कि अप्रैल-2014 से अब तक 5 लाख 55 हजार 603 करोड़ रुपये राइट ऑफ हुए।

Question Marks On Government Policies Forgiveness Loan For Sages :

बता दें कि ‘राइट ऑफ’ की श्रेणी में वैसे लोन आते हैं, जिनके बारे में बैंक ये सोंच लेता है कि अब इस वसूलना नामुमकिन है। इस रिपोर्ट के मुताबिक दिसंबर-2018 से लेकर पिछले 9 महीनों में करीब 1 लाख 56 हजार 702 करोड़ के बैड लोन को इस श्रेणी में डाला गया है। पिछले 10 सालों में 7 लाख करोड़ से ज्यादा के लोन ‘राइट ऑफ’ हुए जिनमें से 80 फीसदी मोदी सरकार के दौरान हुए।

अब सवाल ये उठता है कि जिस देश की ज्यादातर आबादी खेती पर निर्भर है, उसमें उन लोगों को ये सहूलियत न देकर बड़े लोगों का लाखों करोड़ रूपए का लोन माफ कर दिया जाता है। जिससे सीधे तौर पर किसानों को कोई भी फायदा नही होता है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर विपरीत प्रभाव भी पड़ता है।

धनकुबेरों को कर्जमाफी की ये सुविधा सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में मुहैया कराई जाती हैं। इस खुलासा तब हुआ जब फ्रांस के अधिकारियों ने अनिल अंबानी की टेलीकॉम कंपनी ‘रिलांयस अटलांटिक फ्लैग फ़्रांस’ का 143.7 मिलियन यूरो यानि 1125 करोड़ रुपये की राशि माफ़ कर दी थी। फ्रांसीसी अखबार में इस बात खुलासा होने पर सीधे पीएम मोदी पर सवाल उठने लगे। सूत्रों का कहना है कि पीएम मोदी की फ्रांस विजिट के बाद ही वहां की सरकार ने अनिल अंबानी का हजारों करोड़ रूपए का टैक्स माफ कर दिया।

नई दिल्ली। सरकार एक ओर जहां बैंकों को टैक्स देने वाले लोगों के पैसे मुहैया कराकर डूबने से बचाने में जुटी है, वहीं पिछले कुछ सालों में बड़े पैमाने पर कर्जों को माफ किया गया है. हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बताया कि अप्रैल-2014 से अब तक 5 लाख 55 हजार 603 करोड़ रुपये राइट ऑफ हुए।

बता दें कि 'राइट ऑफ' की श्रेणी में वैसे लोन आते हैं, जिनके बारे में बैंक ये सोंच लेता है कि अब इस वसूलना नामुमकिन है। इस रिपोर्ट के मुताबिक दिसंबर-2018 से लेकर पिछले 9 महीनों में करीब 1 लाख 56 हजार 702 करोड़ के बैड लोन को इस श्रेणी में डाला गया है। पिछले 10 सालों में 7 लाख करोड़ से ज्यादा के लोन 'राइट ऑफ' हुए जिनमें से 80 फीसदी मोदी सरकार के दौरान हुए।

अब सवाल ये उठता है कि जिस देश की ज्यादातर आबादी खेती पर निर्भर है, उसमें उन लोगों को ये सहूलियत न देकर बड़े लोगों का लाखों करोड़ रूपए का लोन माफ कर दिया जाता है। जिससे सीधे तौर पर किसानों को कोई भी फायदा नही होता है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर विपरीत प्रभाव भी पड़ता है।

धनकुबेरों को कर्जमाफी की ये सुविधा सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में मुहैया कराई जाती हैं। इस खुलासा तब हुआ जब फ्रांस के अधिकारियों ने अनिल अंबानी की टेलीकॉम कंपनी ‘रिलांयस अटलांटिक फ्लैग फ़्रांस’ का 143.7 मिलियन यूरो यानि 1125 करोड़ रुपये की राशि माफ़ कर दी थी। फ्रांसीसी अखबार में इस बात खुलासा होने पर सीधे पीएम मोदी पर सवाल उठने लगे। सूत्रों का कहना है कि पीएम मोदी की फ्रांस विजिट के बाद ही वहां की सरकार ने अनिल अंबानी का हजारों करोड़ रूपए का टैक्स माफ कर दिया।