योगी जी कैसे भ्रष्टाचार मुक्त होगा प्रदेश, जब अहम विभाग है भ्रष्टाचारियों के हवाले..

सवाल: अाखिर प्रदेश सरकार में मंत्री पद के आगे क्यों नहीं रास आ रही सांसदी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ईमानदार छवि और सख्त फैसले लेने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार है। कहा जाता है कि सीएम योगी को भ्रष्टचार बर्दाश्त नहीं है। भ्रष्टा​चारियों को वह अपने आस पास तक नहीं भटकने देते, लेकिन इसे विडंबना ही कहेंगे कि उनके सबसे अहम विभागों में सर्वेसर्वा वही लोग हैं जो पिछली सरकारों में भ्रष्टाचार में लिप्त रहे। मुख्यमंत्री के सबसे वरिष्ठ सहयोगी और कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना के नगर विकास विभाग के अंतर्गत आने वाले यूपी जल निगम की सबसे बड़ी कुर्सी पर एक भ्रष्टाचारी इंजीनियर को तैनात कर रखा है।

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हम बात कर रहे हैं यूपी जल निगम के प्रबंधन निदेशक इंजीनियर राजेश मित्तल की। इंजीनियर राजेश मित्तल की छवि एक भ्रष्टाचारी और घूंसखोर अधिकारी के तौर पर रही है। उनके खिलाफ कई विभागीय जांचे हो चुकीं हैं तो कई अभी लंबित हैं। एक दागदार छवि होने के बावजूद मित्तल को जल निगम जैसे बेहद अहम विभाग का प्रबंध निदेशक बनाया गया है। ​मित्तल को यह कुर्सी देने की योग्यता के बारे में पता किया गया तो जानकारी मिली कि मित्तल साहब जल निगम के लेविल-1 में आने वाले चीफ इंजीनियरों में सबसे सीनियर हैं। इसलिए उन्हें एमडी बना दिया गया है।

क्या कहता है जल निगम एक्ट –

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विभागीय जानकारों की माने तो जल निगम की स्थापना के साथ बनाए गए जल निगम एक्ट 1975 में स्पष्ट रूप से निर्देशित है कि विभाग का प्रबंध निदेशक उसी इंजीनियर को बनाया जा सकता है जो वरिष्ठ होने के साथ—साथ योग्यता में मामले में यानी एसीआर (एनुअल कॉन्फीडेन्सियल रिपोर्ट) के अंक भी ज्यादा रखता हो।

योग्यता के आधार पर राकेश मित्तल नहीं बन सकते एमडी-

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विभागीय सूत्रों की माने तो इंजीनियर राकेश मित्तल व​रिष्ठता के मामले में भले ही नंबर एक पर हो लेकिन योग्यता के मामले में वह वर्तमान के छह चीफ इंजीनियरों में तीसरा स्थान रखते हैं। यानी उनके एसीआर अंक उनके एमडी बनाए जाने पर सवाल खड़ा करते हैं। जल निगम के संविधान के मुताबिक उन्हें एमडी पद के विकल्प के रूप में तीसरा और आखिरी विकल्प माना जाना चाहिए था।

योग्यता की अनिवार्यता की ऐसी निकली हवा-

विभाग के ही अधिकारियों का कहना है कि वरिष्ठता के साथ योग्यता का जो क्लॉज कानून में जुड़ा है उसका काट गणित से किया गया है। विभाग अपनी सहूलियत के हिसाब से योग्यता के अंकों की एक सीमा निर्धारित कर देता है। यह सीमा अयोग्य व्यक्ति को सहूलियत देने के लिए तय की जाती है। ताकि कम योग्यता वाले व्यक्ति को भी वरिष्ठता के आधार पर कुर्सी के योग्य बनाया जा सके।

जल निगम एमडी के साथ-साथ सीएंडडीएस के डायरेक्टर भी हैं मित्तल –

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पूर्व एमडी जल निगम के ​सेवानिवृत्त होने से पूर्व निगम की ही निर्माण इकाई सीएडंडीएस के डायरेक्टर रहे राकेश मित्तल के खिलाफ धन उगाही की कई शिकायतें सामने आईं थीं। उन्होंने सीएंडडीएस में अपनी तैनाती के पहले से काम कर रहे ठेकेदारों से कमीशन की डिमांड की, जो ठेकेदार कमीशन नहीं दे पाए उन्हें काम से हाथ धोना पड़ा। सीएंडडीएस का डायरेक्टर रहते ही राकेश मित्तल ने अपनी वरिष्ठता का हवाला देकर जल निगम के एमडी की कुर्सी भी कब्जा कर ली। वर्तमान में दोनों पदों का चार्ज इन्हीं के पास है।

मंत्री सुरेश खन्ना और तत्कालीन प्रमुख सचिव से हो चुकी है मित्तल की शिकायत-

सीएंडडीएस के डायरेक्टर रहते राकेश मित्तल के कारनामों को लेकर पर्दाफाश ने तथ्य समेंत पूरी जानकारी मंत्री सुरेश खन्ना और तत्कालीन प्रमुख सचिव कुमार कमलेश को दी थी। जिसके बाद मित्तल के खिलाफ कोई कार्रवाई तो नहीं हुई बल्कि उन्हें जल निगम का एमडी बना दिया गया। बताया जाता है कि मंत्री के गृह जनपद से आने वाले उनके बेहद करीबी ठेकेदार की मदद से मित्तल को यह कुर्सी दी गई है। जिसमें पार्टी के संगठन से जुड़े लोगों के नाम का हवाला भी दिया जा रहा है।

टीम पर्दाफ़ाश जल्द ही उत्तर प्रदेश सरकार के अन्य विभागों जैसे लोक निर्माण विभाग, यूपी पॉवर करपोरेशन, सिंचाई विभाग, स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग से जुड़े ऐसे ही भ्रष्टाचारों का ख़ुलासा करेगा। जिनमें कहीं अधिकारियों ने आयु विवाद तो कहीं अपनी नौकरी से जुड़े विभागीय दस्तावेज़ों से छेड़छाड़ कर उच्च पदों पर तैनाती प्राप्त की है और उन्हें तैनाती देने के ज़िम्मेदार लोगों की जानकारी में पूरा मामला है।

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