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रवींद्रनाथ टैगोर की भांजी से हुआ था गांधी को प्रेम, मानते थे ‘आध्यात्मिक पत्नी’

By बलराम सिंह 
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Rabindranath Tagores Niece Was In Love With Gandhi Considered A Spiritual Wife

नई दिल्ली। आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती है। आज हम आपको बताते हैं कैसे बापू को रवीन्द्रनाथ टैगोर की भांजी सरला देवी चौधरानी से प्रेम हो गया था। बापू उन्हें आध्यात्मिक पत्नी मानते थे। काफी समय तक यह प्रेम प्रसंग जारी रहा। हालांकि कस्तूरबा गांधी और बच्चों के विरोध के चलते यह रिश्ता टूट गया। सरला देवी चौधरानी उस वक्त लाहौर में अपने पति के साथ रहती थीं। महात्मा गांधी, सरला देवी चौधरानी के आकर्षक व्यक्तित्व की तरफ आकर्षित हो गए थे। प्रसिद्ध इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने अपनी किताब में इस अधूरी प्रेम कहानी का जिक्र किया है।

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रामचन्द्र गुहा लिखते हैं कि सरला देवी चौधरानी, गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की बहन की बेटी थीं। रवींद्रनाथ टैगोर की ही तरह उनकी भांजी सरला देवी चौधरानी भी कविताएं लिखती थीं। उनकी आवाज भी बेहद मधुर थी और अक्सर अंग्रेजों से आजादी दिलाने के लिए होने वाली बैठकों के दौरान वह गाना गाया करती थीं। महात्मा गांधी ने भी सरला देवी चौधरानी को गाते हुए सुना था।

रामचंद्र गुहा ने अपनी किताब ‘गांधी- द इयर दैट चेंज्ड द वर्ल्ड’ में बताया है कि सरला देवी चौधरानी स्वतंत्र मानसिकता की थीं और उनका व्यक्तित्व करिश्माई था। सरला देवी चौधरानी की भाषा, संगीत और लेखन में गहरी रुचि थी। महात्मा गांधी और सरला देवी की नजदीकी का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं, कि जब वह लाहौर जाते थे तब सरला के घर ही रुकते थे। उस वक्त सरला देवी के पति स्वतंत्रता सेनानी रामभुज दत्त चौधरी जेल में थे। गांधी और सरला दोनों एक दूसरे के करीब रहे। यहां तक कि गांधी सरला को अपनी ‘आध्यात्मिक पत्नी’ बताते थे। हालांकि बाद के दिनों में गांधी ने ये भी माना कि इस रिश्ते की वजह से उनकी शादी टूटते-टूटते बची।

आपको बता दें कि महात्मा गांधी एकमात्र ऐसे व्यक्ति हुए जिन्होंने अपनी आत्मकथा- ‘सत्य के साथ मेरे प्रयोग’ में अपने बारे में सारी बातों को खुलकर लिखा। हालांकि, सरला देवी और गांधी के बीच के रिश्ता का जिक्र सिर्फ इतिहासकार रामचंद्र गुहा की किताब में मिलता है।

इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने अपने एक इंटरव्यू में कहा कि महात्मा गांधी, सरला देवी चौधरानी के प्रति मुग्ध थे लेकिन उनके बीच सिर्फ मुग्धता का ही रिश्ता था। महात्मा गांधी जब लाहौर से लौटकर गुजरात आए तो उनके और सरला देवी चौधरानी के बीच खतों के जरिए बातचीत होने लगी।

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रामचंद्र गुहा के मुताबिक, बाद में सी राजगोपालाचारी के कहने पर महात्मा गांधी ने सरला देवी चौधरानी से अपना यह रिश्ता खत्म किया। हालांकि, महात्मा गांधी और सरला देवी चौधरानी के बीच के रिश्ते को लेकर इतना ज्यादा बातचीत नहीं होती है और न ही गांधी जी की पुरानी जीवन में इस पर कोई प्रकाश डाला गया है।

महात्मा गांधी की पत्नी कस्तूरबा गांधी का इस रिश्ते के बारे में क्या कहना था? इस बारे में महात्मा गांधी की किसी भी जीवनी में जिक्र नहीं मिलता है। महात्मा गांधी जब सरला देवी चौधरानी की तरफ आकर्षित हुए उस वक्त उनकी उम्र 50 साल थी और सरला देवी चौधरानी उनसे तीन साल ही छोटी थीं।

सरला देवी जब 29 साल की थीं तब महात्मा गांधी की उनसे पहली मुलाकात हुई थी। यह 1901 का साल था। अपनी एक चिट्ठी में महात्मा गांधी ने सरला देवी चौधरानी को यहां तक लिखा था कि उन्हें उसके सपने आते हैं।

महात्मा गांधी सरला देवी चौधरानी के करीब साल 1919 में आए थे। गांधी 1915 में भारत लौटने के बाद 1919 में सरला देवी चौधरानी के लाहौर स्थित घर पर रुके थे। यह भी कहा जाता है कि सरला देवी और महात्मा गांधी के रिश्ते पर कस्तूरबा गांधी ने तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की थी। महात्मा गांधी के बेटों ने भी इस रिश्ते का विरोध किया था।

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