अमेठी में राहुल गांधी की हार पर हो रही ‘गोपनीय समीक्षा’

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अमेठी में राहुल गांधी की हार पर हो रही 'गोपनीय समीक्षा'

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की अमेठी सीट से राहुल गांधी की हार ने कांग्रेस को हिलाकर रख दिया था। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को परंपरागत सीट अमेठी में मिली हार की पार्टी समीक्षा कर रही है।

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यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के करीबियों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। अमेठी से तीन बार सांसद रहे राहुल को इस बार केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा।

समिति के सदस्य कांग्रेस सचिव जुबैर खान और केएल शर्मा ने शनिवार को स्पष्ट तौर पर कहा कि अमेठी में एसपी और बीएसपी की स्थानीय इकाई ने कांग्रेस को सहयोग नहीं दिया और इस वजह से इन पार्टियों के अधिकांश वोट बीजेपी के खाते में चले गए।

इस बात को थोड़ा और ठीक से समझाते हुए अमेठी के एक स्थानीय कांग्रेसी ने कहा, ‘राहुल गांधी को साल 2014 के मुकाबले इस बार ज्यादा वोट मिले थे। पिछले लोकसभा चुनाव में जहां उन्हें 4.08 लाख वोट मिले थे, वहीं इस बार उन्हें 4.13 लाख लोगों ने वोट दिया था।’

कांग्रेस नेता ने कहा कि पिछले चुनाव में यहां से बीएसपी कैंडिडेट को 57 हजार वोट मिले थे और 2019 के चुनाव में राहुल गांधी की हार 55 हजार वोटों से हुई है। अगर बीएसपी का वोट कांग्रेस के खाते में आ जाता तो राहुल गांधी नहीं हारते। अमेठी के कांग्रेस प्रमुख योगेंद्र मिश्रा भी इस बात का समर्थन करते हैं।

उन्होंने भी कहा कि एसपी-बीएसपी का असहयोग ही राहुल की हार का प्रमुख कारण है। उन्होंने बताया कि दोनों ही पार्टियों के नेताओं ने अमेठी में कांग्रेस को समर्थन देने का ऐलान किया था, लेकिन फिर भी कांग्रेस को उनका साथ नहीं मिला।

पीढ़ियों के पुराने गढ़ में पार्टी अध्यक्ष के ही हार जाने के बाद से स्थानीय कांग्रेस इकाई में उथल-पुथल शुरू हो गयी थी। पार्टी जिला अध्यक्ष योगेंद्र मिश्रा ने पद से इस्तीफा दे दिया था। वहीं, पार्टी के नेता धर्मेन्द्र शुक्ला ने राहुल को पत्र लिख कर उनके प्रतिनिधि चंद्र कांत दुबे को हार के लिए जिम्मेदार बताते हुए जांच की मांग की थी।

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की अमेठी सीट से राहुल गांधी की हार ने कांग्रेस को हिलाकर रख दिया था। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को परंपरागत सीट अमेठी में मिली हार की पार्टी समीक्षा कर रही है। यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के करीबियों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। अमेठी से तीन बार सांसद रहे राहुल को इस बार केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। समिति के सदस्य कांग्रेस सचिव जुबैर खान और केएल शर्मा ने शनिवार को स्पष्ट तौर पर कहा कि अमेठी में एसपी और बीएसपी की स्थानीय इकाई ने कांग्रेस को सहयोग नहीं दिया और इस वजह से इन पार्टियों के अधिकांश वोट बीजेपी के खाते में चले गए। इस बात को थोड़ा और ठीक से समझाते हुए अमेठी के एक स्थानीय कांग्रेसी ने कहा, 'राहुल गांधी को साल 2014 के मुकाबले इस बार ज्यादा वोट मिले थे। पिछले लोकसभा चुनाव में जहां उन्हें 4.08 लाख वोट मिले थे, वहीं इस बार उन्हें 4.13 लाख लोगों ने वोट दिया था।' कांग्रेस नेता ने कहा कि पिछले चुनाव में यहां से बीएसपी कैंडिडेट को 57 हजार वोट मिले थे और 2019 के चुनाव में राहुल गांधी की हार 55 हजार वोटों से हुई है। अगर बीएसपी का वोट कांग्रेस के खाते में आ जाता तो राहुल गांधी नहीं हारते। अमेठी के कांग्रेस प्रमुख योगेंद्र मिश्रा भी इस बात का समर्थन करते हैं। उन्होंने भी कहा कि एसपी-बीएसपी का असहयोग ही राहुल की हार का प्रमुख कारण है। उन्होंने बताया कि दोनों ही पार्टियों के नेताओं ने अमेठी में कांग्रेस को समर्थन देने का ऐलान किया था, लेकिन फिर भी कांग्रेस को उनका साथ नहीं मिला। पीढ़ियों के पुराने गढ़ में पार्टी अध्यक्ष के ही हार जाने के बाद से स्थानीय कांग्रेस इकाई में उथल-पुथल शुरू हो गयी थी। पार्टी जिला अध्यक्ष योगेंद्र मिश्रा ने पद से इस्तीफा दे दिया था। वहीं, पार्टी के नेता धर्मेन्द्र शुक्ला ने राहुल को पत्र लिख कर उनके प्रतिनिधि चंद्र कांत दुबे को हार के लिए जिम्मेदार बताते हुए जांच की मांग की थी।