‘गांधी’ सरनेम की वजह से ‘राहुल’ की जिंदगी हुई दुश्वार, न कोई लोन देता है और न ही सिमकार्ड

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'गांधी' सरनेम की वजह से 'राहुल' की जिंदगी हुई दुश्वार, न कोई लोन देता है और न ही सिमकार्ड

भोपाल। मध्यप्रदेश के इंदौर में रहने वाले 22 वर्षीय युवक का दिलचस्प दावा है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी का हमनाम होने के कारण उसे अपनी पहचान को लेकर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। राहुल गांधी (नाम और सरनेम) के कारण इनको न तो किसी कंपनी ने मोबाइल की सिम दी, न ही मोबाइल और अन्य कोई खरीदी पर बिल मिलता है। अकसर लोग उनका मजाक उड़ाकर ये कह देते हैं कि ये आईडी फर्जी तो नहीं है? असल नाम क्या है बताएं?

Rahul Gandhi Madhya Pradesh Loan Driving License Sim Card Congress :

शहर के अखंड नगर में रहने वाले इस राहुल गांधी ने मंगलवार को को बताया, ‘मेरे पास अपनी पहचान के दस्तावेज के रूप में केवल आधार कार्ड है। मैं जब मोबाइल सिम खरीदने या दूसरे कामों के लिये इस दस्तावेज की प्रति किसी के सामने पेश करता हूं, तो लोग मेरे नाम के कारण इसे संदेह की निगाह से देखते हुए फर्जी समझते हैं। वे मेरे चेहरे पर आश्चर्य भरी निगाह डालते हैं।’

लोग समझ लेते हैं फर्जी कॉलर

उन्होंने कहा, ‘जब मैं किसी काम से अपरिचित लोगों को कॉल कर अपना परिचय देता हूं, तो इनमें से कई लोग यह तंज कसते हुए अचानक फोन काट देते हैं कि राहुल गांधी कब से इंदौर में रहने आ गए? वे मुझे फर्जी कॉलर समझते हैं।’ गांधी, पेशे से कपड़ा व्यापारी हैं और उनके मौजूदा उपनाम के पीछे एक दिलचस्प कहानी है। उन्होंने बताया कि उनके दिवंगत पिता राजेश मालवीय सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में वॉशरमैन के रूप में पदस्थ थे और उनके आला अधिकारी उन्हें ‘गांधी’ कहकर पुकारते थे।

पिता को गांधी कहते थे, उन्होंने सरनेम में लिखना शुरू किया

राहुल के पिता राजेश बीएसएफ में वॉटरमैन थे। वहां उन्हें लोग गांधी-गांधी कहकर बुलाते थे। राहुल ने कहा इसी कारण पिता ने अपने नाम के साथ गांधी लिखना शुरू कर दिया। बाद में मेरे स्कूल में नाम के साथ गांधी लिखवा दिया। 23 साल से ज्यादातर मार्कशीट अौर डॉक्यूमेंट्स में यही नाम चला आ रहा है।

भोपाल। मध्यप्रदेश के इंदौर में रहने वाले 22 वर्षीय युवक का दिलचस्प दावा है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी का हमनाम होने के कारण उसे अपनी पहचान को लेकर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। राहुल गांधी (नाम और सरनेम) के कारण इनको न तो किसी कंपनी ने मोबाइल की सिम दी, न ही मोबाइल और अन्य कोई खरीदी पर बिल मिलता है। अकसर लोग उनका मजाक उड़ाकर ये कह देते हैं कि ये आईडी फर्जी तो नहीं है? असल नाम क्या है बताएं? शहर के अखंड नगर में रहने वाले इस राहुल गांधी ने मंगलवार को को बताया, 'मेरे पास अपनी पहचान के दस्तावेज के रूप में केवल आधार कार्ड है। मैं जब मोबाइल सिम खरीदने या दूसरे कामों के लिये इस दस्तावेज की प्रति किसी के सामने पेश करता हूं, तो लोग मेरे नाम के कारण इसे संदेह की निगाह से देखते हुए फर्जी समझते हैं। वे मेरे चेहरे पर आश्चर्य भरी निगाह डालते हैं।' लोग समझ लेते हैं फर्जी कॉलर उन्होंने कहा, 'जब मैं किसी काम से अपरिचित लोगों को कॉल कर अपना परिचय देता हूं, तो इनमें से कई लोग यह तंज कसते हुए अचानक फोन काट देते हैं कि राहुल गांधी कब से इंदौर में रहने आ गए? वे मुझे फर्जी कॉलर समझते हैं।' गांधी, पेशे से कपड़ा व्यापारी हैं और उनके मौजूदा उपनाम के पीछे एक दिलचस्प कहानी है। उन्होंने बताया कि उनके दिवंगत पिता राजेश मालवीय सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में वॉशरमैन के रूप में पदस्थ थे और उनके आला अधिकारी उन्हें 'गांधी' कहकर पुकारते थे। पिता को गांधी कहते थे, उन्होंने सरनेम में लिखना शुरू किया राहुल के पिता राजेश बीएसएफ में वॉटरमैन थे। वहां उन्हें लोग गांधी-गांधी कहकर बुलाते थे। राहुल ने कहा इसी कारण पिता ने अपने नाम के साथ गांधी लिखना शुरू कर दिया। बाद में मेरे स्कूल में नाम के साथ गांधी लिखवा दिया। 23 साल से ज्यादातर मार्कशीट अौर डॉक्यूमेंट्स में यही नाम चला आ रहा है।