राहुल गांधी ने यूट्यूब पर शेयर किया प्रवासी मजदूरों का दर्द, बनवाई डॉक्यूमेंट्री

Rahul Gandhi
राहुल गांधी ने यूट्यूब पर शेयर किया प्रवासी मजदूरों का दर्द, बनवाई डॉक्यूमेंट्री

नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और केरल के वायनाड से सांसद राहुल गांधी ने पिछले दिनों प्रवासी मजदूरों के साथ बातचीत के बाद आज अपने यूट्यूब चैनल पर पूरा वीडियो जारी किया है- राहुल की आवाज में इस डॉक्युमेंट्री में मजदूरों की मुश्किलों को बयां किया गया है- राहुल ने 17 मिनट 27 सेकेंड के इस वीडियो में लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों के दर्द को दिखाया है. राहुल ने वीडियो के जरिए केंद्र सरकार पर भी हमला बोला है. बता दें कि लॉकडाउन के कारण ट्रेन और बसों के बंद होने के बाद प्रवासी मजदूर पैदल ही अपने-अपने घरों को निकल पड़े थेत्र

Rahul Gandhi Shared The Pain Of Migrant Laborers On Youtube Documentary Made :

बाद में लोगों की जुबानी उनकी दर्द बताई गई है. झांसी के रहने वाले महेश कुमार कहते हैं, 120 किलो मीटर चले हैं. रात में रुकते रुकते आगे बढ़े. मजबूरी है कि हमलोगों को पैदल जाना है. एक अन्य महिला कहती हैं, बड़े आदमी को दिक्कत नहीं है. हम तीन दिन से भूखे मर रहे हैं. बच्चा भी है हमारा साथ में, वो भी तीन दिन से भूखा-प्यासा है. एक अन्य महिला कहती हैं कि जो भी कमाया था पिछले दो महीनों में खत्म हो गया है. इसलिए अब पैदल ही घर निकल पड़े हैं.


राहुल गांधी एक मजदूर से बात करते हैं. वो पूछते हैं कि वो कहां से आ रहे हैं और क्या करते थे. शख्स बताता है कि वह हरियाणा से आ रहा है और कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करता था. शख्स बताता है कि एक दिन पहले ही उसने चलना शुरू किया है. उनके साथ उनका पूरा परिवार है. शख्स ने बताया कि उसे एकाएक ही लॉकडाउन की जानकारी मिली. जहां रहते थे वहां किराए के नाम पर 2500 रुपये देने पड़ते थे. इसलिए अह वो झांसी रवाना हो रहे हैं. राहुल गांधी ने पूछा है कि पैसे हैं पास में, खाना खा रहे हो? इस सवाल के जवाब में परिवार ने बताया कि लोग रास्ते में उन्हें खाने के लिए दे देते हैं. कई बार खाना मिलता भी है कई बार नहीं मिलता तो पैदल चलते हुए आगे बढ़ जाते हैं.

700 किलोमीटर की दूरी तय करने निकले थे मजदूर

दरअसल राहुल गांधी दिल्ली की सड़कों पर भटकते मजदूरों से मिलने सड़कों पर उतरे थे. फुटपाथ किनारे बैठे मजदूरों से राहुल गांधी ने बातचीत की थी और उनके दुख-दर्द सुने थे. घर वापसी के लिए 700 किमी के पैदल सफर पर निकले इन मजदूरों और इनके जैसे दूसरे मजदूरों के हौसले की कुछ कहानियां राहुल गांधी आज पूरे देश से साझा करेंगे.

लौटकर वापस नहीं जाएंगे मजदूर!
इससे पहले राहुल गांधी ने वीडियो टीजर पेश किया था. वीडियो में राहुल गांधी पूछते नजर आ रहे हैं कि कितनी दूर से आप पैदल चल रहे हैं, वीडियो में एक शख्स जवाब देता है कि 100 किलोमीटर. एक महिला ने कहा कि अब हम लौटकर कभी नहीं वापस जाएंगे.’

मजदूरों के मुद्दे पर मुखर हैं राहुल गांधी

कोरोना संकट में लॉकडाउन में फंसे मजदूरों की मुश्किलों और इनकी घर वापसी की मुश्किलों को लेकर राहुल गांधी लगातार आवाज उठाते रहे हैं. केंद्र सरकार को सुझाव भी देते रहे हैं. सरकार की ओर से मजदूरों की मदद के लिए बस और ट्रेनें भी चलाई गईं लेकिन प्रवासी मजदूरों की तादाद के आगे फिलहाल सारे इंतजाम कम दिख रहे हैं. सड़कों पर मजदूरों की बेबसी की तस्वीरें अब भी दिखाई दे रही हैं.

पहले भी कर चुके हैं बातचीत

मजदूरों की बेबसी को अपनी आवाज देकर राहुल गांधी लोगों का ध्यान इस मुद्दे पर दिलाना चाहते हैं. राहुल गांधी पहले भी वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए अपनी पार्टी के लोगों, पत्रकारों, और जानी मानी हस्तियों से कोरोना संकट, लॉकडाउन और अर्थव्यवस्था पर बातचीत कर चुके हैं. इस बार वे मजदूरों के संकट पर बातचीत करने जा रहे हैं.

नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और केरल के वायनाड से सांसद राहुल गांधी ने पिछले दिनों प्रवासी मजदूरों के साथ बातचीत के बाद आज अपने यूट्यूब चैनल पर पूरा वीडियो जारी किया है- राहुल की आवाज में इस डॉक्युमेंट्री में मजदूरों की मुश्किलों को बयां किया गया है- राहुल ने 17 मिनट 27 सेकेंड के इस वीडियो में लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों के दर्द को दिखाया है. राहुल ने वीडियो के जरिए केंद्र सरकार पर भी हमला बोला है. बता दें कि लॉकडाउन के कारण ट्रेन और बसों के बंद होने के बाद प्रवासी मजदूर पैदल ही अपने-अपने घरों को निकल पड़े थेत्र बाद में लोगों की जुबानी उनकी दर्द बताई गई है. झांसी के रहने वाले महेश कुमार कहते हैं, 120 किलो मीटर चले हैं. रात में रुकते रुकते आगे बढ़े. मजबूरी है कि हमलोगों को पैदल जाना है. एक अन्य महिला कहती हैं, बड़े आदमी को दिक्कत नहीं है. हम तीन दिन से भूखे मर रहे हैं. बच्चा भी है हमारा साथ में, वो भी तीन दिन से भूखा-प्यासा है. एक अन्य महिला कहती हैं कि जो भी कमाया था पिछले दो महीनों में खत्म हो गया है. इसलिए अब पैदल ही घर निकल पड़े हैं. राहुल गांधी एक मजदूर से बात करते हैं. वो पूछते हैं कि वो कहां से आ रहे हैं और क्या करते थे. शख्स बताता है कि वह हरियाणा से आ रहा है और कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करता था. शख्स बताता है कि एक दिन पहले ही उसने चलना शुरू किया है. उनके साथ उनका पूरा परिवार है. शख्स ने बताया कि उसे एकाएक ही लॉकडाउन की जानकारी मिली. जहां रहते थे वहां किराए के नाम पर 2500 रुपये देने पड़ते थे. इसलिए अह वो झांसी रवाना हो रहे हैं. राहुल गांधी ने पूछा है कि पैसे हैं पास में, खाना खा रहे हो? इस सवाल के जवाब में परिवार ने बताया कि लोग रास्ते में उन्हें खाने के लिए दे देते हैं. कई बार खाना मिलता भी है कई बार नहीं मिलता तो पैदल चलते हुए आगे बढ़ जाते हैं. 700 किलोमीटर की दूरी तय करने निकले थे मजदूर दरअसल राहुल गांधी दिल्ली की सड़कों पर भटकते मजदूरों से मिलने सड़कों पर उतरे थे. फुटपाथ किनारे बैठे मजदूरों से राहुल गांधी ने बातचीत की थी और उनके दुख-दर्द सुने थे. घर वापसी के लिए 700 किमी के पैदल सफर पर निकले इन मजदूरों और इनके जैसे दूसरे मजदूरों के हौसले की कुछ कहानियां राहुल गांधी आज पूरे देश से साझा करेंगे. लौटकर वापस नहीं जाएंगे मजदूर! इससे पहले राहुल गांधी ने वीडियो टीजर पेश किया था. वीडियो में राहुल गांधी पूछते नजर आ रहे हैं कि कितनी दूर से आप पैदल चल रहे हैं, वीडियो में एक शख्स जवाब देता है कि 100 किलोमीटर. एक महिला ने कहा कि अब हम लौटकर कभी नहीं वापस जाएंगे.' मजदूरों के मुद्दे पर मुखर हैं राहुल गांधी कोरोना संकट में लॉकडाउन में फंसे मजदूरों की मुश्किलों और इनकी घर वापसी की मुश्किलों को लेकर राहुल गांधी लगातार आवाज उठाते रहे हैं. केंद्र सरकार को सुझाव भी देते रहे हैं. सरकार की ओर से मजदूरों की मदद के लिए बस और ट्रेनें भी चलाई गईं लेकिन प्रवासी मजदूरों की तादाद के आगे फिलहाल सारे इंतजाम कम दिख रहे हैं. सड़कों पर मजदूरों की बेबसी की तस्वीरें अब भी दिखाई दे रही हैं. पहले भी कर चुके हैं बातचीत मजदूरों की बेबसी को अपनी आवाज देकर राहुल गांधी लोगों का ध्यान इस मुद्दे पर दिलाना चाहते हैं. राहुल गांधी पहले भी वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए अपनी पार्टी के लोगों, पत्रकारों, और जानी मानी हस्तियों से कोरोना संकट, लॉकडाउन और अर्थव्यवस्था पर बातचीत कर चुके हैं. इस बार वे मजदूरों के संकट पर बातचीत करने जा रहे हैं.