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राहुल गांधी का आरोप, ICMR ने 245 की रैपिड किट 600 में क्यों खरीदी, भ्रष्ट लोगों पर कार्रवाई करे PM

Rahul Gandhis Allegation Why Icmr Bought 245 Rapid Kit In 600 Pm Should Take Action Against Corrupt People

नई दिल्ली। कोरोना संकट के बीच रैपिड किट मंहगी खरीदने का मामला तूल पकड़ता चला जा रहा है, अब राहुल गांधी ने भी इस पर सवालियां निशान खड़े करते हुए पीएम मोदी से भ्रष्ट आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। दरअसल इस मामले को लेकर सबसे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने सवाल उठाये हैं। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि यह पूरा मामला लोगों के जनहित से जुड़ा हुआ है ऐसे में यहां पर मुनाफा कमाने से ज्यादा आम लोगों को सस्ती किट मुहैया कराना ज्यादा जरूरी है।

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कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने रैपिड टेस्टिंग किट को लेकर मोदी सरकार से सवाल किए हैं। उन्होंने चीन से आयात की कई किट पर ‘मुनाफाखोरी’ के दावे वाली खबरों को लेकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘अनुचित मुनाफा’ कमाने वालों पर कार्रवाई करनी चाहिए।

राहुल गांधी ने एक खबर का हवाला देते हुए ट्वीट किया कि जब समूचा देश कोविड-19 आपदा से लड़ रहा है, तब भी कुछ लोग अनुचित मुनाफ़ा कमाने से नहीं चूकते। इस भ्रष्ट मानसिकता पर शर्म आती है, घिन आती है। उन्होंने कहा कि हम प्रधानमंत्री से मांग करते हैं कि इन मुनाफ़ाख़ोरों पर जल्द ही कड़ी कार्रवाई की जाए।देश उन्हें कभी माफ़ नहीं करेगा।

राहुल गांधी ने जिस खबर का हवाला दिया उसके मुताबिक भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) को बेची गई चीन से आयातित कोविड-19 रैपिड टेस्ट किट में बहुत मोटा मुनाफा कमाया गया है। इस किट की भारत में आयात लागत 245 रुपये ही है, लेकिन इसे आईसीएमआर को 600 रुपये प्रति किट बेचा गया है, यानी करीब 145 फीसदी का मोटा मुनाफा वसूला गया।

हाई कोर्ट के आदेश के बाद उठ रहे सवाल
कोरोना एंटीबॉडी रैपिड किट की खरीद को लेकर मोदी सरकार और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) सवालों के घेरे में है। दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि फिलहाल की स्थिति को देखते हुए कोविड-19 टेस्ट किट 400 रुपये से ऊपर के रेट पर नहीं बेची जानी चाहिए। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि कोरोनावायरस को नियंत्रित करने के लिए टेस्ट करने बेहद जरूरी है, ऐसे में टेस्ट किट का कम से कम रेट पर बेचा जाना भी उतना ही जरूरी है।

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हाईकोर्ट ने आदेश उन तीन निजी कंपनियों को दिया है, जिन्होंने 10 लाख किट चीन से भारत लाने का कॉन्ट्रैक्ट है। दरअसल रेयर मेटाबॉलिक्स लाइफ़ साइंसेज प्राइवेट लिमिटेड और आर्क फार्मास्यूटिकल्स की तरफ से दिल्ली हाई कोर्ट में यह याचिका लगाई गई थी।

इन दोनों कंपनियों ने भारत में कोविड 19 टेस्ट किट को भारत मे लाने के लिए मैट्रिक्सलेब के साथ समझौता किया था। मैट्रिक्स लैब 7 लाख 24 हजार कोविड-19 टेस्ट किट देने के बाद बाकी की 2 लाख 76 हज़ार किट तब तक जारी करने से इनकार कर रहा था, जब तक कि उसको पूरा पैसा नहीं मिल जाए।

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