90 साल पुरानी परंपरा समाप्त, रेल बजट और आम बजट का होगा विलय

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को आम बजट में रेल बजट को विलय संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। सुत्रों के अनुसार इस बार संसद में बजट एक फरवरी को पेश किया जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में विचार कर इस पर सहमति बन गई है।

अगले साल यानी 2017 से देश में अलग से रेल बजट पेश नहीं होगा। केंद्र सरकार अब रेल बजट और आम बजट एक साथ पेश करेगी। इसके लिए रेल मंत्रालय के प्रस्ताव पर वित्त मंत्रालय की मुहर लग गई है और दोनों बजट साथ-साथ कैसे पेश किए जाएं इसपर एक पांच सदस्यीय समिति विचार कर रही है। ये समिति इस महीने के आखिर तक अपनी रिपोर्ट दे देगी।

गौरतलब है कि अब तक देश में आम बजट और रेल बजट अलग-अलग पेश किए जाते रहे हैं। ये परंपरा अंग्रेजों के जमाने से जारी है और 92 साल से चल रही है। आमतौर पर 25 फरवरी को रेल बजट जारी किया जाता है जो रेलमंत्री पेश करते हैं। उसके एक या दो दिन बाद वित्त मंत्री आम बजट पेश करते हैं।

रेलवे के लिए ये इस तरह से फायदेमंद होगा क्योंकि हर साल अपने बजट आवंटन के लिए रेलवे वित्त मंत्रालय को जो वार्षिक डिविडेंट देता था वो उसे अब नहीं देना होगा। आम आदमी के लिए ये बदलाव इस लिहाज से खास होगा क्योंकि अब तक रेल किराये बढ़ेंगे या नहीं बढ़ेंगे ये फैसला रेलमंत्री लिया करते थे लेकिन अब इसपर अंतिम मुहर वित्त मंत्री की होगी।