नोटबंदी के बाद जल्द ही पड़ने वाली है एक और मार

नई दिल्ली: नोटबंदी के बाद अब देशवासियों पर रेल किराये में वृद्धि की मार पड़ सकती है। एक अप्रैल से रेल यात्रियों की जेब अब और ढीली हो सकती है। रेलवे संसाधन जुटाने के लिए किरायों में बढ़ोतरी की तैयारी कर रही है। इससे पहले वित्त मंत्रालय ने रेलवे के विशेष सुरक्षा कोष के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।प्रस्ताव के अनुसार ट्रैक को बेहतर करने तथा सिग्नल पण्राली के उन्नयन तथा मानवरहित लेवल क्रासिंग को समाप्त करने तथा अन्य सुरक्षा संबंधी उपायों के लिए कोष जुटाने को सुरक्षा उपकर लगाया जाना था।



इससे पहले रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने वित्त मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिखकर विभिन्न सुरक्षा कायरें के लिए विशेष राष्ट्रीय रेल सुरक्षा कोष बनाने को 1,19,183 करोड़ रपए आवंटित करने की मांग की थी। वित्त मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए रेलवे से कहा कि वह किराया बढ़ाकर संसाधन जुटाए। सूत्रों ने बताया कि वित्त मंत्रालय ने इस कोष का सिर्फ 25 प्रतिशत उपलब्ध कराने की सहमति दी है। रेलवे से कहा गया है कि वह शेष 75 प्रतिशत संसाधन खुद जुटाए।एक सूत्र ने कहा कि रेल मंत्रालय फिलहाल किराया बढ़ोतरी के पक्ष में नहीं है क्योंकि यात्रियों की बुकिंग घट रही है और एसी-2 और एसी-1 के किराये पहले ही काफी ऊंचे हैं।




लेकिन वित्त मंत्रालय द्वारा राहत पैकेज देने से इनकार के बाद किराये में बढ़ोतरी के अलावा कोई विकल्प नहीं है। योजना के अनुसार स्लीपर, द्वितीय श्रेणी तथा एसी3 के लिए उपकर अधिक होगा, वहीं एसी-2 और एसी-1 के लिए यह मामूली होगा।रेल किराये बढ़ोतरी पर अभी अंतिम फैसला किया जाना है। फिलहाल इसके तौर तरीकों पर काम किया जा रहा है।