GST के विरोध में रेलवे कंट्रेक्टर यूनियन की हड़ताल जारी

Strike
GST के विरोध में रेलवे कंट्रेक्टर यूनियन हड़ताल पर

Railway Contractor Union On Strike Against Gst

नई दिल्ली। जीएसटी (GST) लागू होने के बाद से आम लोगों के जीवन में भले ही कोई विशेष बदलाव न आया हो लेकिन कुछ क्षेत्र ऐसे हैं, जिनसे जुड़े लोगों के सामने रोजी रोटी की समस्या खड़ी हो गई है। ऐसा ही कुछ मामला रेलवे कंट्रेक्टर्स का है। जिन्हें जीएसटी लागू होने के बाद से अपने ठेकों में सीधे 8 प्रतिशत का नुकसान हो रहा है। जिसे लेकर नार्दन रेलवे जोन के कंट्रेक्टर्स की यूनियन इंडियन रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स एसोसिएशन ने 20 अगस्त से हड़ताल कर दी है।

रेलवे जोन थ्री में मिसलीनियस वर्क करने वाली कंपनी एसटी कंस्ट्रक्शनस के डायरेक्टर सुधीर सिन्हा का कहना है कि 1 जुलाई को जीएसटी लागू होने के साथ कांट्रेक्टरों के सामने 12 प्रतिशत की दर से जीएसटी भरने की वाध्यता सामने आ गई है। सिन्हा के मुताबिक जब उन्होंंने टेंडर भरा था उस समय टैक्स की दर 4 प्रतिशत थी, इसी दर के हिसाब से उन्होंने रेलवे को रेट कोट किए थे। जीएसटी लागू होने से उनके जैसे तमाम रेलवे कांट्रेक्टर्स को 8 प्रतिशत का सीधा नुकसान नज़र आ रहा है।

रेलवे कंट्रेक्टर यूनियन ने अपनी मांगों के साथ रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्या से अवगत करवाया है। वहीं दूसरी ओर लंबे समय से हड़ताल पर होने के बावजूद कोई समाधान न निकलता देख यूनियन के अध्यक्ष धीरेन्द्र पाल तोमर ने दिल्ली के जंतर मंतर पर 21 अगस्त से धरना शुरू कर दिया है।

यूनियन की मांग है कि 30 जून 2017 से पहले के सभी कांट्रेक्ट्स को जीएसटी से बाहर किया जाए। जो टेंडर जीएसटी लागू होने के बाद दिए गए हैं या दिए जाने हैं केवल उन्हीं पर 12 प्रतिशत की दर से टैक्स लगाया जाए।

वहीं रेलवे कंट्रेक्टरोें के हड़ताल पर जाने से रेलवे के लिए मजदूरी कर अपने परिवार पालने वाले मजदूरों के सामने रोजी रोटी समस्या ने सिर उठा लिया है। हजारों दिहाड़ी मजदूर काम न होने की वजह से बेरोजगारी का​ शिकार हो रहे हैं। इस विषय पर कांट्रेक्टर्स का कहना है कि वे घाटा उठाकर काम नहीं कर सकते सरकार को इस समस्या का हल निकालना ही होगा, जब तक उन्हें कोई लिखित आश्वासन नहीं मिलता वे काम पर नहीं लौटेंगे।

नई दिल्ली। जीएसटी (GST) लागू होने के बाद से आम लोगों के जीवन में भले ही कोई विशेष बदलाव न आया हो लेकिन कुछ क्षेत्र ऐसे हैं, जिनसे जुड़े लोगों के सामने रोजी रोटी की समस्या खड़ी हो गई है। ऐसा ही कुछ मामला रेलवे कंट्रेक्टर्स का है। जिन्हें जीएसटी लागू होने के बाद से अपने ठेकों में सीधे 8 प्रतिशत का नुकसान हो रहा है। जिसे लेकर नार्दन रेलवे जोन के कंट्रेक्टर्स की यूनियन इंडियन रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स एसोसिएशन…