अब आम आदमी भी कर सकेंगे मंत्री अफसर वाले इस रेल कोच में सफर

रेलवे सैलून ,railway saloon
अब आम आदमी भी कर सकेंगे मंत्री अफसर वाले इस रेल कोच में सफर

नई दिल्ली। ट्रेन में यात्रा के दौरान आने वाली समस्याओं को दूर करने के लिए अब भारतीय रेलवे आपको कई सुविधा देने की तैयारी में है। अभी तक रेलवे की वो सुविधाएँ जो सिर्फ राष्ट्रपति, रेल मंत्री और रेल राज्यमंत्री को मिलती थी वो अब आम लोगों के लिए भी उपलब्ध हो चुकी है। बता दें कि भारतीय रेल में सैलून कोच का आनंद अब आम लोग भी उठा सकेंगे।

Railway Open Vip Saloon For Common Travelers :

क्या है खासियत

  • सैलून में ड्राइंग, डाइनिंग, किचन और दो बेडरूम होते हैं।
  • हर एक बेडरूम में अटैच्ड टॉयलेट होते हैं।
  • वालेट सर्विस भी इसमें यात्री को मिलती है।
  • अभी ऐसे कुल 336 सैलून हैं। इनमें से 62 एसी हैं।
  • एक डिब्बे में दो परिवार सफर कर सकये हैं।

अंग्रेजों के जमाने में बनाए गए थे

रेलवे में यह सैलून आज से ही नहीं बल्कि सालों पहले से चल रहे हैं। इन्हें अंग्रेजों के जमाने में तैयार किया गया था। यह किसी चलते-फिरते लग्जरी होटल की तरह होते हैं। अंग्रेजों के जमाने में दूर-दराज वाले इलाकों में जाने के लिए रोड सही नहीं थी। तब अफसर ट्रेन से सफर किया करते थे। उसी वक्त ऐसे खास सैलून तैयार किए गए थे। आजादी के बाद से आज तक भी रेलवे के सभी आला अफसरों के लिए सैलून की व्यवस्था जारी है।

क्या हैं सैलून कोच

  • रेलवे के सलून कोच उसके वरिष्ठ अफसरों के लिए होते हैं।
  • वे हादसे वाली जगह या दूर-दराज के इलाकों में जांच पर जाने के लिए इन कोच का इस्तेमाल करते हैं।
  • देश के सभी रेलवे जोन में मौजूद सलून को मिलाकर ऐसे कुल 336 कोच हैं।
  • इनमें से 62 वातानुकूलित हैं।

 

नई दिल्ली। ट्रेन में यात्रा के दौरान आने वाली समस्याओं को दूर करने के लिए अब भारतीय रेलवे आपको कई सुविधा देने की तैयारी में है। अभी तक रेलवे की वो सुविधाएँ जो सिर्फ राष्ट्रपति, रेल मंत्री और रेल राज्यमंत्री को मिलती थी वो अब आम लोगों के लिए भी उपलब्ध हो चुकी है। बता दें कि भारतीय रेल में सैलून कोच का आनंद अब आम लोग भी उठा सकेंगे।क्या है खासियत
  • सैलून में ड्राइंग, डाइनिंग, किचन और दो बेडरूम होते हैं।
  • हर एक बेडरूम में अटैच्ड टॉयलेट होते हैं।
  • वालेट सर्विस भी इसमें यात्री को मिलती है।
  • अभी ऐसे कुल 336 सैलून हैं। इनमें से 62 एसी हैं।
  • एक डिब्बे में दो परिवार सफर कर सकये हैं।
अंग्रेजों के जमाने में बनाए गए थेरेलवे में यह सैलून आज से ही नहीं बल्कि सालों पहले से चल रहे हैं। इन्हें अंग्रेजों के जमाने में तैयार किया गया था। यह किसी चलते-फिरते लग्जरी होटल की तरह होते हैं। अंग्रेजों के जमाने में दूर-दराज वाले इलाकों में जाने के लिए रोड सही नहीं थी। तब अफसर ट्रेन से सफर किया करते थे। उसी वक्त ऐसे खास सैलून तैयार किए गए थे। आजादी के बाद से आज तक भी रेलवे के सभी आला अफसरों के लिए सैलून की व्यवस्था जारी है।क्या हैं सैलून कोच
  • रेलवे के सलून कोच उसके वरिष्ठ अफसरों के लिए होते हैं।
  • वे हादसे वाली जगह या दूर-दराज के इलाकों में जांच पर जाने के लिए इन कोच का इस्तेमाल करते हैं।
  • देश के सभी रेलवे जोन में मौजूद सलून को मिलाकर ऐसे कुल 336 कोच हैं।
  • इनमें से 62 वातानुकूलित हैं।