प्राइवेट ट्रेनों के लिए किराया नियामक बनाने से रेलवे ने किया इनकार

सप्ताह में सिर्फ एक दिन चलेंगी ये स्‍पेशल ट्रेनें, देखिए नया शेड्यूल

नई दिल्ली: रेलवे ने प्रस्तावित निजी रेलगाड़ियों के किराए के लिए नियामक बनाने की संभावना से इनकार करते हुए कहा कि भारतीय परिवहन परिदृश्य में प्रतिस्पर्धा के जरिये किराए में वृद्धि के खतरे से निपटा जाना चाहिए। रेलवे द्वारा सार्वजनिक किए गए दस्तावेज में कहा गया कि इस योजना के जरिये 150 रेलगाड़ियों का परिचालन निजी परिचालकों द्वारा किया जाएगा और इसमें किराया नियामक बनाने का प्रावधान नहीं है। दस्तावेज में कहा गया कि किसी भी तरह के आर्थिक नियमन से परियोजना के राजस्व पर असर पड़ेगा।

Railways Refused To Make Fare Regulator For Private Trains :

निजी रेलगाड़ी परियोजना को लेकर ढांचागत, वित्तीय और परिचालन संबंधी व्यावहारिकता अध्ययन से जुड़े दस्तावेज में कहा गया, ”निजी रेलगाड़ी परिचालक प्रतिस्पर्धा के महौल में परिचालन करेंगे और इसके लिए स्वायत्तता की जरुरत होगी। भारतीय परिवहन परिदृश्य प्रतिस्पर्धी है और बाजार में पर्याप्त स्पर्धा है। इसमें कहा गया, निजी रेलगाड़ी परिचालक संभवत: परिवहन के सभी साधनों के साथ प्रतिस्पर्धा करेंगे और ऐसी संभावना नहीं है कि वे एकाधिकार प्राप्त माहौल में काम करेंगे।

इसलिए, निजी रेलगाड़ी परिचालकों को किराया तय करने की स्वायत्तता होगी, वहीं यत्रियों के पास हमेशा वैकल्पिक रेलगाड़ियों या परिवहन के साधनों के जरिये यात्रा करने का विकल्प होगा। इस तरह के प्रतिस्पर्धी महौल से निजी रेल परिचालकों द्वारा किराया बढ़ाने के खतरे से निपटा जा सकेगा। उल्लेखनीय है कि रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वी के यादव ने पहले कहा था कि मंत्रालय भविष्य में नियामक प्राधिकार बनाने पर विचार कर रहा है।

व्यावहारिकता अध्ययन में कहा गया कि विभिन्न संस्थाओं और उनके कार्यों को नियंत्रित करने के लिए भविष्य में देश में रेल नियामक संस्था बनाने की संभावना है। इसमें मंत्रालय को यह भी स्पष्ट करने की सलाह दी गई है कि प्रस्तावित नियामक की छत्रछाया में यह परियोजना नहीं रहेगी। दस्तावेज में कहा गया, इससे रुचि लेने वाले पक्षों को स्पष्टता और निश्चितता मिलेगी। हालांकि, अगर रेल मंत्रालय की इच्छा इस परियोजना को भविष्य में नियामक की देखरेख में करने की है, तो इसका प्रावधान इसमें शामिल किया जाना चाहिए।

दस्तावेज में निजी रेलगाड़ियों के लिए ढांचा बनाने के लिए ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के रेलवे नियामक प्राधिकारों को आदर्श के रूप में लिया गया है। इन दोनों देशों में आर्थिक नियामक है लेकिन वे किराए के ढांचे को नियंत्रित नहीं करते हैं। रेलवे ने स्पष्ट तौर पर कहा कि आवेदन करने से पहले संभावित परिचालकों की बैठक में भी पूछे जाने पर स्पष्ट किया गया था कि किराया पर सीमा लगाने की कोई योजना नहीं है।

नई दिल्ली: रेलवे ने प्रस्तावित निजी रेलगाड़ियों के किराए के लिए नियामक बनाने की संभावना से इनकार करते हुए कहा कि भारतीय परिवहन परिदृश्य में प्रतिस्पर्धा के जरिये किराए में वृद्धि के खतरे से निपटा जाना चाहिए। रेलवे द्वारा सार्वजनिक किए गए दस्तावेज में कहा गया कि इस योजना के जरिये 150 रेलगाड़ियों का परिचालन निजी परिचालकों द्वारा किया जाएगा और इसमें किराया नियामक बनाने का प्रावधान नहीं है। दस्तावेज में कहा गया कि किसी भी तरह के आर्थिक नियमन से परियोजना के राजस्व पर असर पड़ेगा।

निजी रेलगाड़ी परियोजना को लेकर ढांचागत, वित्तीय और परिचालन संबंधी व्यावहारिकता अध्ययन से जुड़े दस्तावेज में कहा गया, ''निजी रेलगाड़ी परिचालक प्रतिस्पर्धा के महौल में परिचालन करेंगे और इसके लिए स्वायत्तता की जरुरत होगी। भारतीय परिवहन परिदृश्य प्रतिस्पर्धी है और बाजार में पर्याप्त स्पर्धा है। इसमें कहा गया, निजी रेलगाड़ी परिचालक संभवत: परिवहन के सभी साधनों के साथ प्रतिस्पर्धा करेंगे और ऐसी संभावना नहीं है कि वे एकाधिकार प्राप्त माहौल में काम करेंगे।

इसलिए, निजी रेलगाड़ी परिचालकों को किराया तय करने की स्वायत्तता होगी, वहीं यत्रियों के पास हमेशा वैकल्पिक रेलगाड़ियों या परिवहन के साधनों के जरिये यात्रा करने का विकल्प होगा। इस तरह के प्रतिस्पर्धी महौल से निजी रेल परिचालकों द्वारा किराया बढ़ाने के खतरे से निपटा जा सकेगा। उल्लेखनीय है कि रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वी के यादव ने पहले कहा था कि मंत्रालय भविष्य में नियामक प्राधिकार बनाने पर विचार कर रहा है।

व्यावहारिकता अध्ययन में कहा गया कि विभिन्न संस्थाओं और उनके कार्यों को नियंत्रित करने के लिए भविष्य में देश में रेल नियामक संस्था बनाने की संभावना है। इसमें मंत्रालय को यह भी स्पष्ट करने की सलाह दी गई है कि प्रस्तावित नियामक की छत्रछाया में यह परियोजना नहीं रहेगी। दस्तावेज में कहा गया, इससे रुचि लेने वाले पक्षों को स्पष्टता और निश्चितता मिलेगी। हालांकि, अगर रेल मंत्रालय की इच्छा इस परियोजना को भविष्य में नियामक की देखरेख में करने की है, तो इसका प्रावधान इसमें शामिल किया जाना चाहिए।

दस्तावेज में निजी रेलगाड़ियों के लिए ढांचा बनाने के लिए ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के रेलवे नियामक प्राधिकारों को आदर्श के रूप में लिया गया है। इन दोनों देशों में आर्थिक नियामक है लेकिन वे किराए के ढांचे को नियंत्रित नहीं करते हैं। रेलवे ने स्पष्ट तौर पर कहा कि आवेदन करने से पहले संभावित परिचालकों की बैठक में भी पूछे जाने पर स्पष्ट किया गया था कि किराया पर सीमा लगाने की कोई योजना नहीं है।