राजा भैया की वजह से अखिलेश बसपा प्रत्याशी को जिताने से चूके: मायावती

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राज भैया की वजह से अखिलेश बसपा प्रत्याशी को जिताने से चूके: मायावती
लखनऊ। राज्यसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी के हारने के बाद शनिवार को बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक प्रेस कांफ्रेंस की है। जिसमें उन्होंने रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया पर अखिलेश यादव के साथ प्रत्यक्ष रूप से विश्वासघात करने का आरोप लगाया है। मायावती ने कहा है कि भाजपा के इशारे पर राजा भैया ने सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव को अपने झूठे मकड़जाल में फंसाए रखा, जिस वजह से वह बसपा प्रत्याशी को जितवाने के लिए पूरा प्रयास नहीं कर…

लखनऊ। राज्यसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी के हारने के बाद शनिवार को बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक प्रेस कांफ्रेंस की है। जिसमें उन्होंने रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया पर अखिलेश यादव के साथ प्रत्यक्ष रूप से विश्वासघात करने का आरोप लगाया है। मायावती ने कहा है कि भाजपा के इशारे पर राजा भैया ने सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव को अपने झूठे मकड़जाल में फंसाए रखा, जिस वजह से वह बसपा प्रत्याशी को जितवाने के लिए पूरा प्रयास नहीं कर सके। जिस वजह से वह बसपा प्रत्याशी को जीत दिलाने से भी चूक गए।

मायावती ने अखिलेश यादव को याद दिलाते हुए कहा कि राजा भैया को भाजपा वाले कभी कुंडा का गुंडा कह कर बुलाते थे, जिसे उन्होंने अपनी सरकार बनने के बाद एक लाइन पर लाने का काम किया था।

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मायावती की प्रेस कांफ्रेंस के बाद अखिलेश यादव और राजा भैया के संबन्धों में दूरियां आने की संभावनाएं देखी जा रहीं हैं। ऐसी जानकारी भी मिली है कि अखिलेश यादव ने शुक्रवार को राज्यसभा के मतदान के दौरान राजा भैय्या के समर्थन के लिए जो ट्वीट किया था उसे भी​ डिलीट कर दिया है।

आपको बाता दें कि मायावती और राजा भैय्या के बीच पुरानी दुश्मनी है। मायावती ने साल 2002 में मुख्यमंत्री बनने के बाद राजा भैया, उनके पिता उदय प्रताप सिंह और चचेरे भाई अक्षय प्रताप सिंह को पोटा कानून के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इस मामले में उनके पिता और चचेरे भाई को कुछ दिनों के बाद जमानत मिल गई थी, लेकिन राजा भैया के खिलाफ मायावती की तत्कालीन सरकार ने एक के बाद एक कई केस दर्ज कर दिए थे। हालांकि मायावती की सरकार गिरने के बाद सत्ता में आई समाजवादी पार्टी ने राजा भैया को रिहा करवाने के लिए उनके खिलाफ प्रयोग किए गए पोटा कानून को उत्तर प्रदेश से खत्म किया और जेल से रिहाई के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव स्वयं जेल तक पहुंचे थे।

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भाजपा ने सरकारी मशीनरी का दुरउपयोग किया—

मायावती ने राज्यसभा चुनावों में अपने प्रत्याशी की हार के बाद भाजपा की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि गोरखपुर और फूलपुर की जिस हार का बदला लेने के लिए भाजपा ने सरकारी मशीनरी का दुरउपयोग किया है। जिस वजह से बसपा और सपा के एक एक विधायक को मतदान से दूर रखा गया और धन बल के प्रयोग से विधायकों की खरीद फरोख्त की गई।

उन्होंने कहा कि भाजपा अगर समझती है कि राज्यसभा चुनाव में षड्यंत्र कर वह उप चुनावों की हार के दाग छुपा लेगी तो ऐसा संभव नहीं है। लोकसभा के चुनाव में वोट जनता करती है, जिसका उदाहरण गोरखपुर और फूलपुर की जनता पेश कर चुकी है।

अगर भाजपा सोचती है कि राज्यसभा चुनाव में बसपा के प्रत्याशी को हराकर वह सपा और बसपा के बीच आई नजदीकी को खत्म कर देगी तो ऐसा होने वाला नहीं है। सपा और बसपा के बीच बनता गठबंधन टूटेगा नहीं, जिससे कि 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को आसानी से जीत मिल सके। बसपा और सपा भाजपा सरकार की गलत नीतियों को लेकर जनता के बीच पैदा हुए गुस्से की वजह से साथ आए हैं।

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