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राजस्थान सरकार लागू करेगी जवाबदेही कानून, लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों पर कसेगा शिकंजा

Rajasthan Government Will Implement Accountability Law Will Tighten The Screws On Negligent Officers And Employees

By बलराम सिंह 
Updated Date

नई दिल्ली। राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार राज्य में जवाबदेही कानून लागू करने की तैयारी में है। सूत्रों का कहला है कि कानून बनकर तैयार है, नए साल से इसे लागू किया जा सकता है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि जवाबदेही कानून के दायरे में 25 विभागों की 220 सेवाओं को शामिल किया गया है। गहलोत सरकार जवाबदेही कानून के माध्यम से सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की मनमानी पर अंकुश लगाने और आम लोगों को राहत देने का प्रयास कर रही है। एक साल पहले सत्ता संभालते ही सीएम गहलोत ने सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदार तय करने की घोषणा की थी। इसके लिए उन्होंने देश में पहली बार प्रदेश में जवाबदेही कानून बनाने की बात कही थी।

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कानून का मसौदा तैयार करने के लिए गहलोत ने उच्च स्तरीय कमेटी गठित की थी। कमेटी ने गहलोत की मंशा के अनुसार कानून का मसौदा तैयार कर लिया है। अब नए साल में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस कानून पर मुहर लगाई जाएगी। इस कानून में पंचायती राज, जलदाय, स्वायत्त शासन, सार्वजनिक निर्माण, सिंचाई, ऊर्जा, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, परिवहन, कृषि, कृषि विपणन, स्थानीय निकाय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, शिक्षा, चिकित्सा, देवस्थान, ग्रामीण विकास, वन, रोड़वेज आदि विभागों और जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय से जुड़ी सेवाओं को शामिल किया गया है।

राज्य के स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल का दावा है कि देश में पहली बार राजस्थान में इस तरह का कानून अमल में लाया जाएगा। उन्होंने बताया कि सेवाओं की गारंटी और अधिकारियों की जवाबदेही को इस कानून में शामिल किया गया है। जवाबदेही कानून के तहत प्रदेश में प्रत्येक पंचायत समिति एवं नगर पालिका स्तर पर सुनवाई होगी। इसके लिए पंचायत समिति एवं नगर पालिक स्तर पर सूचना और सहयोग केंद्र स्थापित होंगे। उपखंड अधिकारी की अगुवाई में एक कमेटी गठित होगी। यह कमेटी आम लोगों की पानी, बिजली, शौचालय, सड़क, राशन, जन्म प्रमाण-पत्र, मृत्यु प्रमाण-पत्र, जाति-प्रमाण-पत्र, विधवा पेंशन, वाहन चालक का लाइसेंस सहित आम लोगों से जुड़ी समस्याओं की सुनवाई करेगी।

सुनवाई के बाद संबंधित विभागों के अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि वे शिकायतों का निस्तारण करें। सुनवाई के बाद शिकायत का निस्तारण यदि एक माह में नहीं होता है तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। एक माह बाद शिकायत पर जिला सतर्कता समिति सुनवाई करेगी। जिला स्तरीय समिति में मामलों का निस्तारण तय समय पर करना होगा, यदि इसमें कोई अधिकारी या कर्मचारी टालमटोल करेगा तो उसको दंड दिया जाएगा।

 

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