देश के सबसे करप्ट राज्यों में पहले नंबर पर राजस्थान, यूपी में काम कराने के लिए देने पड़ते हैं सबसे ज्यादा रुपये

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देश के सबसे करप्ट राज्यों में पहले नंबर पर राजस्थान, यूपी में काम कराने के लिए देने पड़ते हैं सबसे ज्यादा रुपये

नई दिल्ली। देश में भ्रष्टाचार को लेकर (इंडिया करप्शन सर्वे-2019) ने एक रिपोर्ट जारी की है। इंडिया करप्शन सर्वे की इस रिपोर्ट में राजस्थान पहले स्थान पर है, जबकि बिहार दूसरे, झारखंड तीसरे और उत्तर प्रदेश चौथे नंबर पर है। हालांकि, काम कराने के लिए सबसे ज्यादा अधिकारियों को रुपये उत्तर प्रदेश में देने पड़ते हैं, जबकि तेलांगना इस लिहाज से दूसरे नंबर पर है।

Rajasthan Ranks First Among The Most Corrupt States In The Country :

इंडिया करप्शन के सर्वे ने सरकार के दावों की पोल खोल दी है। चाहे वह राजस्थान हो या फिर उत्तर प्रदेश। हालांकि यह कोई चौंकाने वाली बात नहीं है, क्योंकि देश के उत्तरी राज्यों को सबसे भ्रष्ट राज्यों की नजर से ही पूरे देश में देखा जाता है। इंडिया करप्शन सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार के सर्वे में यह सामने आया कि 75 फीसदी लोगों ने यह स्वीकारा है कि उन्हें काम कराने के लिए रुपये देने पड़ते हैं।

वहीं, 50 प्रतिशत लोगों ने यह बताया कि उन्हें काम कराने के लिए अधिकारियों को कई बार रिश्वत देने पड़े हैं। वहीं तकरीबन 25 फीसदी लोगों ने यह बात कही है कि केवल उन्हें एक या दो बार घूस देना पड़ा। जबकि 25 फीसदी लोगों ने कहा कि बिना रिश्वत दिए ही उनका काम हो गया। वहीं, उत्तर प्रदेश में 74 फीसदी लोगों ने यह स्वीकारा है कि उन्हें काम कराने के लिए रुपये देने पड़ते हैं। जबकि अन्य राज्यों की आपेक्षा सबसे ज्यादा 57 फीसदी लोगों ने कहा है कि उन्हें काम कराने के लिए कई बार रुपये देने पड़े हैं।

वहीं, 17 फीसदी लोगों ने एक से अधिक बार काम कराने के लिए रुपये दिए हैं। इंडियन करप्शन सर्वे 2019 की इस रिपोर्ट में देशभर में 1 लाख 90 हजार लोगों से भ्रष्टाचार से संबंधित सवाल पूछे गए, जिसमें से 51 फीसदी लोगों ने माना है कि उन्हें पिछले 12 महीने में एक बार रिश्वत जरूर देनी पड़ी। इनमें सबसे ज्यादा पुलिस और नगर पालिका विभाग शामिल हैं। इस सर्वे में भ्रष्टाचार के टॉप 8 राज्य भी शामिल किए गए हैं।

गौरतलब है कि देश के विकास में भ्रष्टाचार एक बहुत बड़ी बाधा है। लोकसभा 2014 के चुनाव में नरेंद्र मोदी सरकार करप्शन पर हमला बोलकर केंद्र में आयी थी। उसके बाद से वो बार-बार भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ का हवाला देकर करप्शन खत्म करने का दावा करते रहे हैं, लेकिन भ्रष्टाचार खत्म हो गया है ऐसा लगता नहीं है। हाल यह है कि एक रेलवे स्टेशन से लेकर बड़े-बड़े ऑफिसों तक देशभर में भ्रष्टाचार समाया हुआ है। अधिकतर फाइलें तब तक आगे नहीं पढ़ पातीं, जब तक अधिकारियों को घूस नहीं दी जाए।

नई दिल्ली। देश में भ्रष्टाचार को लेकर (इंडिया करप्शन सर्वे-2019) ने एक रिपोर्ट जारी की है। इंडिया करप्शन सर्वे की इस रिपोर्ट में राजस्थान पहले स्थान पर है, जबकि बिहार दूसरे, झारखंड तीसरे और उत्तर प्रदेश चौथे नंबर पर है। हालांकि, काम कराने के लिए सबसे ज्यादा अधिकारियों को रुपये उत्तर प्रदेश में देने पड़ते हैं, जबकि तेलांगना इस लिहाज से दूसरे नंबर पर है। इंडिया करप्शन के सर्वे ने सरकार के दावों की पोल खोल दी है। चाहे वह राजस्थान हो या फिर उत्तर प्रदेश। हालांकि यह कोई चौंकाने वाली बात नहीं है, क्योंकि देश के उत्तरी राज्यों को सबसे भ्रष्ट राज्यों की नजर से ही पूरे देश में देखा जाता है। इंडिया करप्शन सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार के सर्वे में यह सामने आया कि 75 फीसदी लोगों ने यह स्वीकारा है कि उन्हें काम कराने के लिए रुपये देने पड़ते हैं। वहीं, 50 प्रतिशत लोगों ने यह बताया कि उन्हें काम कराने के लिए अधिकारियों को कई बार रिश्वत देने पड़े हैं। वहीं तकरीबन 25 फीसदी लोगों ने यह बात कही है कि केवल उन्हें एक या दो बार घूस देना पड़ा। जबकि 25 फीसदी लोगों ने कहा कि बिना रिश्वत दिए ही उनका काम हो गया। वहीं, उत्तर प्रदेश में 74 फीसदी लोगों ने यह स्वीकारा है कि उन्हें काम कराने के लिए रुपये देने पड़ते हैं। जबकि अन्य राज्यों की आपेक्षा सबसे ज्यादा 57 फीसदी लोगों ने कहा है कि उन्हें काम कराने के लिए कई बार रुपये देने पड़े हैं। वहीं, 17 फीसदी लोगों ने एक से अधिक बार काम कराने के लिए रुपये दिए हैं। इंडियन करप्शन सर्वे 2019 की इस रिपोर्ट में देशभर में 1 लाख 90 हजार लोगों से भ्रष्टाचार से संबंधित सवाल पूछे गए, जिसमें से 51 फीसदी लोगों ने माना है कि उन्हें पिछले 12 महीने में एक बार रिश्वत जरूर देनी पड़ी। इनमें सबसे ज्यादा पुलिस और नगर पालिका विभाग शामिल हैं। इस सर्वे में भ्रष्टाचार के टॉप 8 राज्य भी शामिल किए गए हैं। गौरतलब है कि देश के विकास में भ्रष्टाचार एक बहुत बड़ी बाधा है। लोकसभा 2014 के चुनाव में नरेंद्र मोदी सरकार करप्शन पर हमला बोलकर केंद्र में आयी थी। उसके बाद से वो बार-बार भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' का हवाला देकर करप्शन खत्म करने का दावा करते रहे हैं, लेकिन भ्रष्टाचार खत्म हो गया है ऐसा लगता नहीं है। हाल यह है कि एक रेलवे स्टेशन से लेकर बड़े-बड़े ऑफिसों तक देशभर में भ्रष्टाचार समाया हुआ है। अधिकतर फाइलें तब तक आगे नहीं पढ़ पातीं, जब तक अधिकारियों को घूस नहीं दी जाए।