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Rajendra Prasad Jayanti: सादगी से भरा था देश के प्रथम डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जीवन

By शिव मौर्या 
Updated Date

नई दिल्ली। देश के प्रथम राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद की आज 136वीं जयंती है। राजेंद्र प्रसाद का जन्म 1884 में बिहार के एक छोटे से गांव भोजपुरा में हुआ था। राजेंद्र प्रसाद स्वभाव से काफी दयालु और निर्मल थे। उनकी जयंती पर पीएम मोदी समेत तमाम नेताओं ने उन्हें याद किया है और श्रद्धांजलि अर्पित की है। इसके साथ ही कई अन्य नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। बता दें कि, राजेंद्र प्रसाद की शुरूआती पढ़ाई छपरा जिला स्कूल में हुई थी।

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उनके पिता का नाम महादेव सहाय और माता का नाम कमलेश्वरी देवी था। उन्होंने पटना से कानून में मास्टर की डिग्री ली। डॉ प्रसाद की हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, बंगाली एवं फारसी पर अच्छी पकड़ थी। गौरतलब है कि, राजेंद्र प्रसाद देश के एकमात्र राष्ट्रपति थे जिनका कार्यकाल एक बार से ज्यादा का रहा। वह राष्ट्रपति के पद पर 1950-62 के बीच आसीन रहे।

साल 1962 में राजेंद्र प्रसाद को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। राजेंद्र प्रसाद महात्मा गांधी के बेहद करीबी सहयोगी थे। आजादी के बाद वह भारत के पहले राष्ट्रपति बने। उन्होंने संविधान सभा का भी नेतृत्व किया था। राजेंद्र प्रसाद को ‘नमक सत्याग्रह’ और ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान जेल में भी जाना पड़ा।

सादगी से भरा हुआ था जीवन
देश के सर्वोच्च पद पर रहने के दौरान भी वह काफी सादगी से रहा करते थे। उन्होंने राष्ट्रपति भवन में अपने उपयोग के लिए केवल दो-तीन कमरे ही रखे थे। उनमें से एक कमरे में चटाई बिछी रहती थी जहां बैठकर वे चरखा काता करते थे। बाद में उन्होंने राजनीति से संन्यास ले लिया। पटना के एक आश्रम में 28 फरवरी, 1963 को बीमारी के कारण उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली।

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