राज्यसभा चुनाव 2018 : बसपा प्रत्याशी की जीत नामुमकिन, 36 के आंकड़े पर अटका विपक्ष

राज्यसभा चुनाव 2018, यूपी राज्यसभा चुनाव नतीजे
यूपी राज्यसभा चुनाव नतीजे: भाजपा ने 9 सीटों पर दर्ज करवाई जीत

लखनऊ । राज्यसभा की 58 सीटों पर हो रहे चुनाव में 10 सीटें उत्तर प्रदेश के खाते में आतीं हैं। जिनमें से 8 सीटों पर भाजपा सीधे कब्जा जमाती नजर आ रही है और उसके समर्थन से पर्चा भरने वाले 9वें उम्मीदवार अनिल अग्रवाल भी बसपा के उम्मीदवार भीम राव अंबेडकर को मात देकर राज्यसभा में अपनी जगह पक्की करते नजर आ रहे हैं।

Rajya Sabha Election 2018 Uttar Pradesh Bsp Candidate Suppose To Loose :

राज्यसभा की जिस सीट को प्रतिष्ठा बनाकर बसपा सुप्रीमो मायावती ने गोरखपुर और फूलपुर सीट पर सपा उम्मीदवारों को समर्थन दिया था। वह अब राजनीतिक लाभ की दृष्टि से बेकार होता नजर आ रहा है। जिसे उपचुनावों में हार का सामना करने वाली भाजपा के रणनीतिक काउंटर अटैक के रूप में भी देखा जा सकता है।

विधायकों के गणित के आधार पर होने वाले इस चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा 324 विधायकों के साथ सबसे मजबूत स्थिति में 10 में से 8 सीटों पर सीधे कब्जा जमाती नजर आ रही है। वहीं उसे अमन मणि त्रिपाठी के रूप में एक निर्दलीय विधायक का भी समर्थन प्राप्त है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा में मौजूद कुल विधायकों की संख्या को ध्यान में रखें तो, प्रत्येक उम्मीदवार को राज्यसभा पहुंचने के लिए 37 विधायकों के वोट की आवश्यकता होगी।

राज्यसभा चुनाव को लेकर एक ​हुए विपक्ष में सपा के 47, बसपा के 19, कांग्रेस के 7 और आरजेडी के 1 विधायक को मिलाकर कुल विधायकों की संख्या 74 होती है। संख्या बल के हिसाब से सपा अपनी एक मात्र उम्मीदवार जया बच्चन को जिताने में सक्षम है। उसके बाद सपा के 10 अतिरिक्त विधायक मिलकर बसपा के उम्मीदवार भीम राव अंबेडकर के लिए आवश्यक 37 मत पूरे करते हैं।

नेरश अग्रवाल के बेटे नितिन अग्रवाल ने बिगाड़ा मायावती का खेल—

बसपा के प्रत्याशी को सपा के सभी 10 विधायकों के वोट मिलने की दशा में ही बसपा का उम्मीदवार जीत सकता है। इस गणित को सपा से बागी हुए नरेश अग्रवाल ने पलट कर रख दिया है। अग्रवाल के बेटे नितिन अग्रवाल जोकि सपा से विधायक हैं। अपने पिता के साथ भाजपा के साथ आ गए हैं। नितिन अग्रवाल का वोट कम होने की स्थिति में बसपा उम्मीदवार जीत के आंकड़े से एक कम रह जाएगा।

राज्यसभा उम्मीदवार न बनाए जाने से खफा नरेश अग्रवाल ने हाल ही में छोड़ी सपा—

नरेश अग्रवाल सपा की​ टिकट पर ही राज्यसभा सांसद चुने गए थे। सांसद के रूप में उनका कार्यकाल पूरा हो रहा है। जिस वजह से वह सपा से दोबारा राज्यसभा जाने की उम्मीद लगाए बैठे थे। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने नरेश अग्रवाल की अनदेखी करते हुए अन्य सांसद और पार्टी में महिलाओं का नेतृत्व करने वाली अभिनेत्री जया बच्चन को पार्टी का उम्मीदवार बनाने का फैसला लिया। जिससे खफा होकर नरेश अग्रवाल ने सपा छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली।

बसपा प्रत्याशी हारा तो भाजपा समर्थित अनिल अग्रवाल का जीतना तय—

राज्यसभा की 10वीं सीट के लिए सपा के बागी नितिन अग्रवाल ने गणित बिगाड़ दिया है। अगर बसपा प्रत्याशी 36 वोटों के साथ हार जाता है तो उस परिस्थिति में दूसरी प्राथमिकता वाले मतों को गिना जाएगा। नियमानुसार प्रथम प्राथमिकता के मतों से उम्मीदवार का चुनाव न होने की स्थिति में दूसरी प्राथमिकता के रूप में मिले मतों की गिनती की जाएगी।

विधायकों की संख्याबल के आधार पर भाजपा के एक तिहाई विधायक भी अग्रवाल को द्वितीय प्राथमिकता के रूप में चुनते हैं, तो उस परिस्थिति में बसपा के प्रत्याशी का हारना तय है।

लखनऊ । राज्यसभा की 58 सीटों पर हो रहे चुनाव में 10 सीटें उत्तर प्रदेश के खाते में आतीं हैं। जिनमें से 8 सीटों पर भाजपा सीधे कब्जा जमाती नजर आ रही है और उसके समर्थन से पर्चा भरने वाले 9वें उम्मीदवार अनिल अग्रवाल भी बसपा के उम्मीदवार भीम राव अंबेडकर को मात देकर राज्यसभा में अपनी जगह पक्की करते नजर आ रहे हैं।राज्यसभा की जिस सीट को प्रतिष्ठा बनाकर बसपा सुप्रीमो मायावती ने गोरखपुर और फूलपुर सीट पर सपा उम्मीदवारों को समर्थन दिया था। वह अब राजनीतिक लाभ की दृष्टि से बेकार होता नजर आ रहा है। जिसे उपचुनावों में हार का सामना करने वाली भाजपा के रणनीतिक काउंटर अटैक के रूप में भी देखा जा सकता है।विधायकों के गणित के आधार पर होने वाले इस चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा 324 विधायकों के साथ सबसे मजबूत स्थिति में 10 में से 8 सीटों पर सीधे कब्जा जमाती नजर आ रही है। वहीं उसे अमन मणि त्रिपाठी के रूप में एक निर्दलीय विधायक का भी समर्थन प्राप्त है।उत्तर प्रदेश विधानसभा में मौजूद कुल विधायकों की संख्या को ध्यान में रखें तो, प्रत्येक उम्मीदवार को राज्यसभा पहुंचने के लिए 37 विधायकों के वोट की आवश्यकता होगी।राज्यसभा चुनाव को लेकर एक ​हुए विपक्ष में सपा के 47, बसपा के 19, कांग्रेस के 7 और आरजेडी के 1 विधायक को मिलाकर कुल विधायकों की संख्या 74 होती है। संख्या बल के हिसाब से सपा अपनी एक मात्र उम्मीदवार जया बच्चन को जिताने में सक्षम है। उसके बाद सपा के 10 अतिरिक्त विधायक मिलकर बसपा के उम्मीदवार भीम राव अंबेडकर के लिए आवश्यक 37 मत पूरे करते हैं।

नेरश अग्रवाल के बेटे नितिन अग्रवाल ने बिगाड़ा मायावती का खेल—

बसपा के प्रत्याशी को सपा के सभी 10 विधायकों के वोट मिलने की दशा में ही बसपा का उम्मीदवार जीत सकता है। इस गणित को सपा से बागी हुए नरेश अग्रवाल ने पलट कर रख दिया है। अग्रवाल के बेटे नितिन अग्रवाल जोकि सपा से विधायक हैं। अपने पिता के साथ भाजपा के साथ आ गए हैं। नितिन अग्रवाल का वोट कम होने की स्थिति में बसपा उम्मीदवार जीत के आंकड़े से एक कम रह जाएगा।

राज्यसभा उम्मीदवार न बनाए जाने से खफा नरेश अग्रवाल ने हाल ही में छोड़ी सपा—

नरेश अग्रवाल सपा की​ टिकट पर ही राज्यसभा सांसद चुने गए थे। सांसद के रूप में उनका कार्यकाल पूरा हो रहा है। जिस वजह से वह सपा से दोबारा राज्यसभा जाने की उम्मीद लगाए बैठे थे। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने नरेश अग्रवाल की अनदेखी करते हुए अन्य सांसद और पार्टी में महिलाओं का नेतृत्व करने वाली अभिनेत्री जया बच्चन को पार्टी का उम्मीदवार बनाने का फैसला लिया। जिससे खफा होकर नरेश अग्रवाल ने सपा छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली।

बसपा प्रत्याशी हारा तो भाजपा समर्थित अनिल अग्रवाल का जीतना तय—

राज्यसभा की 10वीं सीट के लिए सपा के बागी नितिन अग्रवाल ने गणित बिगाड़ दिया है। अगर बसपा प्रत्याशी 36 वोटों के साथ हार जाता है तो उस परिस्थिति में दूसरी प्राथमिकता वाले मतों को गिना जाएगा। नियमानुसार प्रथम प्राथमिकता के मतों से उम्मीदवार का चुनाव न होने की स्थिति में दूसरी प्राथमिकता के रूप में मिले मतों की गिनती की जाएगी।विधायकों की संख्याबल के आधार पर भाजपा के एक तिहाई विधायक भी अग्रवाल को द्वितीय प्राथमिकता के रूप में चुनते हैं, तो उस परिस्थिति में बसपा के प्रत्याशी का हारना तय है।