राज्यसभा चुनाव: चाचा शिवपाल बिगाड़ेंगे बुआ और बबुआ का गणित, भाजपा के 9वें उम्मीदवार की जीत पक्की

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राज्यसभा चुनाव: चाचा शिवपाल बिगाड़ेंगे बुआ और बबुआ का गणित, भाजपा के 9वें उम्मीदवार की जीत पक्की

लखनऊ । बबुआ अखिलेश यादव और बुआ मायावती के बीच हुई वोटों की सौदेबाजी का अंत किस मोड़ पर होगा ये 23 मार्च को 10 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले मतदान के साथ स्पष्ट हो जाएगा। मायावती ने राज्यसभा की जिस सीट के लिए गोरखपुर और फूलपुर सीट के उप चुनाव में अपनी पार्टी का समर्थन समाजवादी पार्टी को दिया था, वह ​वोटों के गणित में फंसती नजर आ रही है। जिसमें बहुत बड़ी भूमिका सियासी हासिए पर पड़े शिवपाल यादव निभाते नजर आ सकते हैं।

शिवपाल यादव की ताकत की बात करें तो पिछले ​सोलह महीनों से उनकी राजनीतिक कुंडली पर शनि का महादशा बनी हुई है। कभी लखनऊ की सियासत में दखल रखने वाले शिवपाल यादव ने स्वयं को इटावा तक सीमित कर रखा है। हालांकि वह लखनऊ की सियासत पर पूरी नजर बनाए हुए हैं।

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इस बात की पूरी संभावना है कि चाचा शिवपाल राज्यसभा चुनावों में अपने बाहुबल का प्रदर्शन करेंगे।ठीक वैसे ही जैसे राष्ट्रपति चुनाव में समाजवादी पार्टी के सात मतों को भाजपा के प्रत्याशी रामनाथ कोविंद के पक्ष में डलवाकर कर चुके हैं।

शिवपाल यादव के शक्ति प्रदर्शन की उम्मीद को बुधवार को हुई सपा विधायकों की बैठक से गैरहाजिर रहे 7 विधायकों ने बढ़ा दिया है। हालांकि पार्टी के नेताओं का कहना है गैरहाजिर रहने वालों में मो. आजम खां और उनके विधायक पुत्र भी शामिल हैं। जिसने बगावत की उम्मीद पार्टी का कोई भी नेता नहीं कर सकता। वहीं एक नाम भाजपा में शामिल हुए पूर्व समाजवादी नेता नरेश अग्रवाल के बेटे का भी है। पार्टी को उम्मीद है कि पिता के भाजपा में शामिल होने से उनके बेटे की विश्वसनीयता पर पार्टी को किसी तरह का शक नहीं है।

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पार्टी को उम्मीद है कि जो विधायक पार्टी की बैठक में नहीं आए वे बुधवार और गुरुवार को होने वाली पार्टी की डिनर पार्टी में शामिल होंगे। पार्टी को पूरा भरोसा है कि सभी 47 विधायक अखिलेश यादव के निर्देश पर अपने मत का प्रयोग पार्टी के हित को प्राथमिकता पर रखते हुए करेंगे।

शिवपाल कर सकते हैं शक्ति प्रदर्शन —

बसपा के राज्यसभा उम्मीदवार भीम राव अंबेडकर को राज्यसभा पहुंचाने में सपा के अतिरिक्त 10 विधायक सबसे अहम भूमिका निभाएंगे। बसपा के 19, सपा के 10, कांग्रेस के 7 और राजेडी का एक विधायक मिलकर जीत के लिए आवश्यक 37 मत पूरे करते हैं।

कुल 10 सीटों पर आठ अपने उम्मीदवार उतारने के बाद भाजपा ने 9वें उम्मीदवार के रूप में अनिल अग्रवाल को अपना समर्थन देकर मैदान में उतार दिया है। 10 सीटों पर कुल 11 दावेदार हैं। अनिल अग्रवाल के पास भाजपा के 28 अतिरिक्त विधायकों का समर्थन है। शेष 9 विधायकों का वोट पाने के लिए अनिल अग्रवाल सपा, बसपा और कांग्रेस में सेंधमारी करने की पूरी कोशिश करेंगे।

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इस सेंधमारी में सबसे आसान टारगेट सपा में मौजूद शिवपाल समर्थक विधायकों का खेमा होगा। जिसमें शिवपाल समेंत 7 विधायकों के होने की संभावना है। ये सभी राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा के पक्ष में मतदान कर चुके हैं।

अनिल अग्रवाल की जीत का गणित—

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़े कारोबारियों में गिनती रखने वाले अनिल अग्रवाल को भाजपा ने समर्थन से उम्मीदवार बनाया है।अग्रवाल को भाजपा के 28 अतिरिक्त विधायक वोट दे रहे हैं। शेष 9 के गणित में नरेश अग्रवाल के बेटे को शामिल कर लेने पर उनकी जीत मात्र 8 अंक दूर रह जाती है। ऐसे में शिवपाल यादव अपने गुट के साथ अग्रवाल के समर्थन में आ जाते हैं तो अनिल अग्रवाल को मात्र एक वोट की दरकार रहेगी, जिसके लिए गोटें बिछाई जा रहीं हैं।

10वें उम्मीदवार को पर्याप्त मत न मिलने पर भी जीतेगी भाजपा—

यूपी विधानसभा में सबसे अधिक संख्या बल वाली भाजपा के लिए अनिल अग्रवाल को जीत दिलाने की एक और सूरत हो सकती है। जिसमें अनिल अग्रवाल और बसपा दोनों ही जीत के लिए पर्याप्त मत न जुटा पाएं।

उस परिस्थिति में यह देखा जाएगा कि दोनों उम्मीदवारों में से किसे दूसरी प्राथमिकता के रूप में सर्वाधिक मत मिले हैं। इस दशा में अनिल अग्रवाल का जीतना तय है।

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लखनऊ । बबुआ अखिलेश यादव और बुआ मायावती के बीच हुई वोटों की सौदेबाजी का अंत किस मोड़ पर होगा ये 23 मार्च को 10 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले मतदान के साथ स्पष्ट हो जाएगा। मायावती ने राज्यसभा की जिस सीट के लिए गोरखपुर और फूलपुर सीट के उप चुनाव में अपनी पार्टी का समर्थन समाजवादी पार्टी को दिया था, वह ​वोटों के गणित में फंसती नजर आ रही है। जिसमें बहुत बड़ी भूमिका सियासी हासिए पर पड़े…
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