नागरिकता बिल पर राज्यसभा में मिल सकती है मोदी सरकार को चुनौती, 4 पार्टियां बिगाड़ सकती हैं नंबरगेम

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नागरिकता बिल पर राज्यसभा में मिल सकती है मोदी सरकार को चुनौती, 4 पार्टियां बिगाड़ सकती हैं नंबरगेम

नई दिल्ली। मोदी सरकार के लिए नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा में पास करवाना तो आसान है लेकिन राज्यसभा में सरकार को कड़ी चुनौती मिल सकती है। बताया जा रहा है कि इस बिल पर जेडीयू, टीआरएस, वाईएसआर कांग्रेस और शिवसेना ने अभी तक अपना रूख तया नही किया है। वोटिंग के समय अब इन दलों पर काफी कुछ निर्भर करेगा।

Rajya Sabha May Get Challenge On Modis Citizenship Bill 4 Parties Can Spoil Number Game :

आपको बता दें कि केन्द्र सरकार ने नागरिकता बिल पर जो संशोधन किया है उसमें बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के हिंदू, जैन, ईसाई, सिख, बौद्ध और पारसी समुदाय को भारतीय नागरिकता देने का प्रस्ताव है। मुस्लिम समुदाय का इस संसोधन में कोई जिक्र नही किया गया है इसलिए विपक्षी दल इस बिल का विरोध कर रहे हैं। सरकार ने नागरिकता संशोधन विधेयक आज लोकसभा में पेश कर दिया है और बहश भी शुरू हो गयी है लेकिन बीजेपी के पास पूर्ण बहुमत है तो लोकसभा में बिल पास होना तया माना जा रहा है। लेकिन राज्यसभा में बिल पास करवाना आसान नही है।

लोकसभा में एनडीए अपनी बदौलत बिल पास करवा सकती है लेकिन राज्सभा में दूसरे दलों पर सबकुछ निर्भर है। हालांकि पिछले दो सालों में बीजेपी और एनडीए की ताकत राज्यसभा में देखने को ​मिली है, तीन तलाक, अनुच्छेद 370 जैसे मामलो पर भी मोदी सरकार ने राज्सभा में बिल पास करवाये हैं। बताया जा रहा है कि बीजेडी और एआइएडीएमके जैसे विपक्षी दल नागरिकता संशोधन बिल पर मोदी सरकार को समर्थन कर सकते हैं।

राज्यसभा में कुल सदस्यों की संख्या 239 है, अगर सदन के सभी सदस्य मतदान करें तो बहुमत के लिए 120 वोट की जरूरत पड़ेगी। एनडीए का अगर दूसरे दल सहयोग करते हैं तो संभावित संख्या 114 बनती है। इनमें बीजेपी के 83, बीजेडी के 7, एआइएडीएमके के 11 और अकाली दल के 3 सदस्य शामिल हैंं। वहीं विपक्ष के पास कांग्रेस के 46, टीएमसी के 13, सपा के 9, सीपीएम और डीएमके के 5-5 और आरजेडी, एनसीपी और बसपा के 4-4 सदस्यों समेत बाकी दलों को मिलाकर कुल 108 सांसदों का समर्थन हासिल है।

नई दिल्ली। मोदी सरकार के लिए नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा में पास करवाना तो आसान है लेकिन राज्यसभा में सरकार को कड़ी चुनौती मिल सकती है। बताया जा रहा है कि इस बिल पर जेडीयू, टीआरएस, वाईएसआर कांग्रेस और शिवसेना ने अभी तक अपना रूख तया नही किया है। वोटिंग के समय अब इन दलों पर काफी कुछ निर्भर करेगा। आपको बता दें कि केन्द्र सरकार ने नागरिकता बिल पर जो संशोधन किया है उसमें बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के हिंदू, जैन, ईसाई, सिख, बौद्ध और पारसी समुदाय को भारतीय नागरिकता देने का प्रस्ताव है। मुस्लिम समुदाय का इस संसोधन में कोई जिक्र नही किया गया है इसलिए विपक्षी दल इस बिल का विरोध कर रहे हैं। सरकार ने नागरिकता संशोधन विधेयक आज लोकसभा में पेश कर दिया है और बहश भी शुरू हो गयी है लेकिन बीजेपी के पास पूर्ण बहुमत है तो लोकसभा में बिल पास होना तया माना जा रहा है। लेकिन राज्यसभा में बिल पास करवाना आसान नही है। लोकसभा में एनडीए अपनी बदौलत बिल पास करवा सकती है लेकिन राज्सभा में दूसरे दलों पर सबकुछ निर्भर है। हालांकि पिछले दो सालों में बीजेपी और एनडीए की ताकत राज्यसभा में देखने को ​मिली है, तीन तलाक, अनुच्छेद 370 जैसे मामलो पर भी मोदी सरकार ने राज्सभा में बिल पास करवाये हैं। बताया जा रहा है कि बीजेडी और एआइएडीएमके जैसे विपक्षी दल नागरिकता संशोधन बिल पर मोदी सरकार को समर्थन कर सकते हैं। राज्यसभा में कुल सदस्यों की संख्या 239 है, अगर सदन के सभी सदस्य मतदान करें तो बहुमत के लिए 120 वोट की जरूरत पड़ेगी। एनडीए का अगर दूसरे दल सहयोग करते हैं तो संभावित संख्या 114 बनती है। इनमें बीजेपी के 83, बीजेडी के 7, एआइएडीएमके के 11 और अकाली दल के 3 सदस्य शामिल हैंं। वहीं विपक्ष के पास कांग्रेस के 46, टीएमसी के 13, सपा के 9, सीपीएम और डीएमके के 5-5 और आरजेडी, एनसीपी और बसपा के 4-4 सदस्यों समेत बाकी दलों को मिलाकर कुल 108 सांसदों का समर्थन हासिल है।