जानिए राज्यसभा के उपसभापति चुनाव की पूरी प्रक्रिया और कैसे होता है हार जीत का फैसला

राज्यसभा ,उपसभापति चुनाव
जानिए राज्यसभा के उपसभापति चुनाव की पूरी प्रक्रिया और कैसे होता है हार जीत का फैसला

नई दिल्ली। राज्यसभा के उपसभापति का चुनाव हो चुका है और नडीए उम्मीदवार हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा का उपसभापति चुना गया है। आपको बता दें कि वर्तमान उपसभापति प्रोफेसर पीजे कुरियन का कार्यकाल 1 जुलाई को खत्म हो गया था इस वजह से यह पद अभी तक खाली था। उपसभापति एक संवैधानिक पद है भारत के संविधान के आर्टिकल 89 में बताया गया है कि उपसभापति पद के खाली होने पर राज्यसभा अपने एक सांसद को उपसभापति पद के लिए चुन सकता है। आज हम आपको राज्यसभा के उपसभापति चुनाव की पूरी प्रक्रिया के बारे में बताने जा रहे हैं।

Rajyasabha Deputy Chairperson Election Procedure :

इस वजह से खाली होते हैं पद

उपसभापति का पद इस्तीफा, पद से हटाए जाने या इस पद पर आसीन राज्यसभा सांसद का कार्यकाल खत्म होने के बाद खाली हो जाता है।

ऐसे होता है राज्यसभा के उपसभापति का चयन

  • कोई भी राज्यसभा सांसद इस संवैधानिक पद के लिए अपने किसी साथी सांसद के नाम का प्रस्ताव आगे बढ़ा सकता है।
  • इस प्रस्ताव पर किसी दूसरे सांसद का समर्थन भी जरूरी है।
  • इसके साथ ही प्रस्ताव को आगे बढ़ाने वाले सदस्य को सांसद द्वारा हस्ताक्षरित एक घोषणा प्रस्तुत करनी होती है जिनका नाम वह प्रस्तावित कर रहा है।
  • इसमें इस बात का उल्लेख रहता है कि निवार्चित होने पर वह उपसभापति के रूप में सेवा करने के लिए तैयार हैं।
  • प्रत्येक सांसद को केवल एक प्रस्ताव को आगे बढ़ाने या उसके समर्थन की अनुमति है।
  • अगर किसी प्रस्ताव में एक से ज्यादा सांसद का नाम हैं तो ऐसे में सदन का बहुमत तय करेगा कि कौन राज्यसभा के उपसभापति के लिए चुना जाएगा।
  • अगर सभी राजनीतिक दलों में किसी एक सांसद के नाम को लेकर आम सहमति बन जाती है, तो इस स्थिति में सांसद को सर्वसम्मति से राज्यसभा का उपसभापति चुन लिया जाएगा।

अबतक कितनी बार हो चुके उपसभापति पद के लिए चुनाव

1969 में पहली बार उपसभापति के पद के लिए चुनाव हुआ था। उसके बाद से अबतक कुल 19 बार उपसभापति पद के लिए चुनाव हो चुके हैं। इनमें से 14 मौकों पर सर्वसम्मति से इस पद के लिए उम्मीदवार को चुन लिया गया यानि चुनाव की नौबत ही नहीं आई।

उपसभापति पद से जुड़ी जरूरी बातें

  • राज्यसभा उपसभापति को पूरी तरह से राज्यसभा के सांसद ही निवार्चित करते हैं।
  • उपसभापति को सभापति/उपराष्ट्रपति की गैरमौजूदगी में राज्यसभा का संचालन करना होता है।
  • इसके साथ ही तटस्था के साथ उच्च सदन की कार्यवाही को भी सुचारू रूप से चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होती है।
नई दिल्ली। राज्यसभा के उपसभापति का चुनाव हो चुका है और नडीए उम्मीदवार हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा का उपसभापति चुना गया है। आपको बता दें कि वर्तमान उपसभापति प्रोफेसर पीजे कुरियन का कार्यकाल 1 जुलाई को खत्म हो गया था इस वजह से यह पद अभी तक खाली था। उपसभापति एक संवैधानिक पद है भारत के संविधान के आर्टिकल 89 में बताया गया है कि उपसभापति पद के खाली होने पर राज्यसभा अपने एक सांसद को उपसभापति पद के लिए चुन सकता है। आज हम आपको राज्यसभा के उपसभापति चुनाव की पूरी प्रक्रिया के बारे में बताने जा रहे हैं।इस वजह से खाली होते हैं पदउपसभापति का पद इस्तीफा, पद से हटाए जाने या इस पद पर आसीन राज्यसभा सांसद का कार्यकाल खत्म होने के बाद खाली हो जाता है।ऐसे होता है राज्यसभा के उपसभापति का चयन
  • कोई भी राज्यसभा सांसद इस संवैधानिक पद के लिए अपने किसी साथी सांसद के नाम का प्रस्ताव आगे बढ़ा सकता है।
  • इस प्रस्ताव पर किसी दूसरे सांसद का समर्थन भी जरूरी है।
  • इसके साथ ही प्रस्ताव को आगे बढ़ाने वाले सदस्य को सांसद द्वारा हस्ताक्षरित एक घोषणा प्रस्तुत करनी होती है जिनका नाम वह प्रस्तावित कर रहा है।
  • इसमें इस बात का उल्लेख रहता है कि निवार्चित होने पर वह उपसभापति के रूप में सेवा करने के लिए तैयार हैं।
  • प्रत्येक सांसद को केवल एक प्रस्ताव को आगे बढ़ाने या उसके समर्थन की अनुमति है।
  • अगर किसी प्रस्ताव में एक से ज्यादा सांसद का नाम हैं तो ऐसे में सदन का बहुमत तय करेगा कि कौन राज्यसभा के उपसभापति के लिए चुना जाएगा।
  • अगर सभी राजनीतिक दलों में किसी एक सांसद के नाम को लेकर आम सहमति बन जाती है, तो इस स्थिति में सांसद को सर्वसम्मति से राज्यसभा का उपसभापति चुन लिया जाएगा।
अबतक कितनी बार हो चुके उपसभापति पद के लिए चुनाव1969 में पहली बार उपसभापति के पद के लिए चुनाव हुआ था। उसके बाद से अबतक कुल 19 बार उपसभापति पद के लिए चुनाव हो चुके हैं। इनमें से 14 मौकों पर सर्वसम्मति से इस पद के लिए उम्मीदवार को चुन लिया गया यानि चुनाव की नौबत ही नहीं आई।उपसभापति पद से जुड़ी जरूरी बातें
  • राज्यसभा उपसभापति को पूरी तरह से राज्यसभा के सांसद ही निवार्चित करते हैं।
  • उपसभापति को सभापति/उपराष्ट्रपति की गैरमौजूदगी में राज्यसभा का संचालन करना होता है।
  • इसके साथ ही तटस्था के साथ उच्च सदन की कार्यवाही को भी सुचारू रूप से चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होती है।