यहां होली में होती हैं रामलीला, धूमधाम से निकलती है राम की बारात

bareilly ramlila
यहां होली में होती हैं रामलीला, धूमधाम से निकलती है राम की बारात

बरेली। जहां होली के मौके पर देश में रंगो से त्योहार मनाया जाता है वहीं उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में दशहरे के मौके पर रामलीला का मंचन किया जाता है। बता दें कि भारत में सभी जगह रामलीला का आयोजन शारदीय नवरात्र में दशहरे के आस पास किया जाता है फिर बरेली में होली में क्यों किया जाता है। इसके पीछे यहां की कई मान्यताएं हैं।

Ramlila Takes Place Here In Holi Rams Procession Comes Out With Pomp :

बताया जाता है कि बरेली में होली के मौके पर रामलीला इसलिए मनाई जाती हैं क्‍योंकि स्‍कंदपुराण के अनुसार रावण वध की तिथ‍ि का वर्णन चैत्र कृष्‍ण एकादशी का है। बरेली में होली पर्व चैत्र कृष्‍ण एकादशी को पड़ता है, इसलिए उसी दिन रामलीला का मंचन किया जाता है। बताया जा रहा है कि यहां पर बीते 160 सालों से रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। वहीं कुछ का यह भी मानना है कि हनुमान जी ने तुलसीदास जी से अलग-अलग ऋतुकाल में रामलीला दिखाने की बात कही। यहां के राम शंखधार का कहना है कि राम का चरित्र जितनी बार अलग-अलग रूपों में दर्शाया जाएगा उतना ही यह युवा चरित्र के विकास में सहायक प्रदान करेगा।

यहां न केवल रामलीला का आयोजन होता है बल्कि पांरपर‍िक तौर पर राम-सिया की बारात भी निकाली जाती है, जिसमें फूलों की वर्षा होती है। बल्कि 20 घंटों वाली यह बारात है होलिका दहन के दिन रात 10 बजे नृसिंह मंदिर से निकलती है और पूरे शहर में होते हुए अगले दिन रात के 6 या 7 बजे के करीब नृसिंह मंदिर पर समाप्‍त होती है। रामलीला का मंचन करने वाले कलाकार अयोध्‍या से आते हैं। राकेश शंखधार कहा कहना है कि अलग-अलग तिथियों पर अलग-अलग लीलाओं का मंचन किया जाता है।

बरेली। जहां होली के मौके पर देश में रंगो से त्योहार मनाया जाता है वहीं उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में दशहरे के मौके पर रामलीला का मंचन किया जाता है। बता दें कि भारत में सभी जगह रामलीला का आयोजन शारदीय नवरात्र में दशहरे के आस पास किया जाता है फिर बरेली में होली में क्यों किया जाता है। इसके पीछे यहां की कई मान्यताएं हैं। बताया जाता है कि बरेली में होली के मौके पर रामलीला इसलिए मनाई जाती हैं क्‍योंकि स्‍कंदपुराण के अनुसार रावण वध की तिथ‍ि का वर्णन चैत्र कृष्‍ण एकादशी का है। बरेली में होली पर्व चैत्र कृष्‍ण एकादशी को पड़ता है, इसलिए उसी दिन रामलीला का मंचन किया जाता है। बताया जा रहा है कि यहां पर बीते 160 सालों से रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। वहीं कुछ का यह भी मानना है कि हनुमान जी ने तुलसीदास जी से अलग-अलग ऋतुकाल में रामलीला दिखाने की बात कही। यहां के राम शंखधार का कहना है कि राम का चरित्र जितनी बार अलग-अलग रूपों में दर्शाया जाएगा उतना ही यह युवा चरित्र के विकास में सहायक प्रदान करेगा। यहां न केवल रामलीला का आयोजन होता है बल्कि पांरपर‍िक तौर पर राम-सिया की बारात भी निकाली जाती है, जिसमें फूलों की वर्षा होती है। बल्कि 20 घंटों वाली यह बारात है होलिका दहन के दिन रात 10 बजे नृसिंह मंदिर से निकलती है और पूरे शहर में होते हुए अगले दिन रात के 6 या 7 बजे के करीब नृसिंह मंदिर पर समाप्‍त होती है। रामलीला का मंचन करने वाले कलाकार अयोध्‍या से आते हैं। राकेश शंखधार कहा कहना है कि अलग-अलग तिथियों पर अलग-अलग लीलाओं का मंचन किया जाता है।