रामनाथ कोविंद के रूप में देश को मिला दूसरा दलित राष्ट्रपति

नई दिल्ली। देश ने रामनाथ कोविंद के रूप में अपना 14वां राष्ट्रपति चुन लिया है। कोविंद दलित समुदाय से आने वाले दूसरे नेता हैं जो देश की सर्वोच्च कहलाने वाली कुर्सी पर आसीन होंगे। देश के पहले दलित राष्ट्रपति केआर नारायणन थे जिन्हें 10वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। रामनाथ कोविंद के विषय में सबसे विशेष यह बात रही कि उन्होंने इस पद के लिए हुए चुनाव में देश के बड़े दलित नेता रहे दिवंगत बाबू जगजीवन राम की बेटी मीरा कुमार को भारी मतों से हराया है। सार्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर 25 जुलाई को रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाएंगे।

मिली जानकारी के मुताबिक रामनाथ कोविंद को 65.65 प्रतिशत मतों के साथ कुल 7,02,044 वोट हासिल हुए, जबकि मीरा कुमार को 34.35 प्रतिशत के साथ 3,67,314 मत मिले।

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विपक्ष की फूट का मिला फायदा

सबसे ज्यादा सांसदों और सबसे ज्यादा राज्यों की सत्ता में काबिज एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद की जीत तय मानी जा रही थी। एनडीए का प्रयास था कि कोविंद को विपक्ष अपना समर्थन देकर निर्विरोध राष्ट्रपति बनाने के लिए अपना समर्थन दे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इस विषय में विपक्षी दलों से समर्थन और विरोध से पहले पुनर्विचार करने की अपील की थी।

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एनडीए के तमाम प्रयासों के बावजूद विपक्षी दलों ने यूपीए की ओर से कांग्रेस की दलित नेता और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। जिसके बाद से एनडीए पर कोविंद को भारी अंतर से जीत दिलाने का दबाव था। इस दिशा में एनडीए को पहली राहत उस समय मिली जब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कोविंद को समर्थन करने की बात कही जिसके बाद, कई अन्य विपक्षी दलों के विधायकों ने भी कोविंद के पक्ष में वोटकर विपक्ष की एक जुटता की कोशिश को नाकाम कर दिया।

कोविंद की जीत पर जश्न में डूबा गांव

कोविंद की शानदार जीत के बाद कानपुर देहात स्थित डेरापुर के परउंख गांव के लोगों में जबर्दस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। गांव वालों का कहना है कि रामनाथ कोविंद ने गांव से हमेशा अपना रिश्ता बनाए रखा। वह भले ही सर्वोच्च न्यायालय में प्रैक्टिस करते रहे हों या फिर राज्यसभा में पहुंचने और बिहार के राज्यपाल नियुक्त होना रहा हो, लेकिन वह गांव के विकास के ​लिए हमेशा गंभीर रहे। आज उनके राष्ट्रपति बनने से परउंख जैसे गांव को नई पहचान मिल गई। जिससे सारा गांव गर्व महसूस कर रहा है।

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