वैज्ञानिकों ने भी लगाई रामसेतु पर मुहर, बताया अद्भुत कारीगरी

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Ramsetu The Claim Of Scientists Man Made Bridges Between India And Sri Lanka

नई दिल्ली। हिंदू के पौराणिक ग्रंथों में जिस पुल का जिक्र है और जो भारत-श्रीलंका को जोड़ता है क्या वह सच है? भू-वैज्ञानिकों का विश्लेषण तो कुछ ऐसा ही बताता है। भारत के दक्षिण-पूर्वी तट के किनारे तमिलनाडु स्थित मन्नार द्वीप के बीच चूना पत्थर से बनी एक श्रंखृला आज भी एक रहस्य बना हुआ है। वैज्ञानिकों ने दावा किया है भारत और श्रीलंका के बीच बना पुल मानव निर्मित है। उल्लेखनीय है कि भारतीय धर्मग्रंथों और जनमानस में इस पुल को रामसेतु के नाम से जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि लंका जाने के लिए राम के नेतृत्व में इस पुल का निर्माण किया गया था।

एनसिएंट लैंड ब्रिज नाम के एक प्रोमो में दावा किया गया है कि रामसेतु के नाम से जाना जाने वाला यह पुल मानव निर्मित है। यह प्रोमो बुधवार की शाम साढ़े सात बजे डिस्कवरी कम्युनिशेन के साइंस चैनल पर अमेरिका में दिखाया जाएगा।अमेरिकन भू-वैज्ञानिकों के मुताबिक, भारत में रामेश्वरम के नजदीक पामबन द्वीप से श्रीलंका के मन्नार द्वीप तक लंबी बनी पत्थरों की यह श्रृंखला मानव निर्मित है। इस प्रोमो को अब तक ग्यारह लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं। इस वीडियो को साइंस चैनल ने करीब 17 घंटे पर अपने सोशल मीडिया पर शेयर किया है।

वैज्ञानिकों ने क्या निष्कर्ष निकाला है और उनका क्या दावा है-
1- भू-वैज्ञानिकों ने नासा की तरफ से ली गई तस्वीर को प्राकृतिक बताया है।
2- वैज्ञानिकों ने अपने विश्लेषण में यह पाया कि 30 मील लंबी यह श्रृंखला चेन मानव निर्मित है।
3- अपने विश्लेषण में भू-वैज्ञानिकों को यह पता चला कि जिस सैंड पर यह पत्थर रखा हुआ है ये कहीं दूर जगह से यहां पर लाया गया है।
4- उनके मुताबिक, यहां पर लाया गए पत्थर करीब 7 हजार साल पुराना है।
5- जबकि, जिस सैंड के ऊपर यह पत्थर रखा गया है वह मजह सिर्फ चार हजार साल पुराना है।
6- हालांकि, कुछ जानकार इसे पांच हजार साल पुराना मानते हैं जिस दौरान रामायण में इसे बनाने की बातें कही गई है।
जाहिर है, वैज्ञानिकों के विश्लेषण के बाद पत्थर के बारे में रहस्य और गहरा गया है कि आखिर ये पत्थर यहां पर कैसे पहुंचा और कौन लेकर आया है।

रामसेतु पुल के बारे में क्या है मान्यताएं
दरअसल, वाल्मीकि रामायण में यह कहा या है कि जब राम ने सीता को लंका के राजा रावण के चंगुल से छुड़ाने के लिए लंका द्वीप पर चढ़ाई की, तो उस वक्त उन्होंने सभी देवताओं का आह्वान किया और युद्ध में विजय के लिए आशीर्वाद मांगा था। इनमें समुद्र के देवता वरुण भी थे। वरुण से उन्होंने समुद्र पार जाने के लिए रास्ता मांगा था। जब वरुण ने उनकी प्रार्थना नहीं सुनी तो उन्होंने समुद्र को सुखाने के लिए धनुष उठाया।
डरे हुए वरुण ने क्षमायाचना करते हुए उन्हें बताया कि श्रीराम की सेना में मौजूद नल-नील नाम के वानर जिस पत्थर पर उनका नाम लिखकर समुद्र में डाल देंगे, वह तैर जाएगा और इस तरह श्री राम की सेना समुद्र पर पुल बनाकर उसे पार कर सकेगी। यही हुआ भी। इसके बाद राम की सेना ने लंका के रास्ते में पुल बनाया और लंका पर हमला कर विजय हासिल की।

नई दिल्ली। हिंदू के पौराणिक ग्रंथों में जिस पुल का जिक्र है और जो भारत-श्रीलंका को जोड़ता है क्या वह सच है? भू-वैज्ञानिकों का विश्लेषण तो कुछ ऐसा ही बताता है। भारत के दक्षिण-पूर्वी तट के किनारे तमिलनाडु स्थित मन्नार द्वीप के बीच चूना पत्थर से बनी एक श्रंखृला आज भी एक रहस्य बना हुआ है। वैज्ञानिकों ने दावा किया है भारत और श्रीलंका के बीच बना पुल मानव निर्मित है। उल्लेखनीय है कि भारतीय धर्मग्रंथों और जनमानस में इस…